- 14 गांवों की 12355 एकड़ जमीन के फिरेंगे दिन
इंदौर. विनोद शर्मा ।
सिहस्थ में करोड़ों लोगों को स्नान कराने वाली नर्मदा-शिप्रा लिंक जल्द ही बलवाड़ा सहित 14 गांवों की 12 हजार एकड़ से अधिक जमीन की प्यास भी बुझाएगी। क्षेत्रवासियों की मांग को देखते हुए नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) ने इसके लिए 52 करोड़ की योजना बनाई है जिसके तहत लिंक से इंदौर तक आने वाला नर्मदा का 25 फीसदी पानी क्षेत्र को दिया जाएगा। मार्च से टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
एनवीडीए ने 2150 करोड़ की नर्मदा-गंभीर परियोजना पर काम शुरू कर दिया है। इस परियोजना की पर्यावरणीय अनुमति में बड़ी अड़चन बलवाड़ा और आसपास के क्षेत्र की कृषि व वन भूमि का अधिग्रहण था। इसीलिए 3 जून 2015 को जनसुनवाई हुई। लोगों ने अपनी और खेतों की बदहाली दिखाते हुए नर्मदा के पानी की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने हरी झंडी दे दी। इसके बाद ‘बलवाड़ा एरिगेशन’ प्रोजेक्ट बना। प्रोजेक्ट के आकार लेने के बाद शिप्रा तक आने वाले 5 क्यूमेक/सेकंड (5000 लीटर/सेकंड) में से 1.2 क्यूमेक (1200 लीटर/सेकंड) पानी बलवाड़ा को मिलेगा।
12355 एकड़ जमीन होगी तर
-- 52.78 करोड़ की अनुमानित लागत के साथ तैयार हुए इस प्रोजेक्ट के तहत क्षेत्र को चोरल के पास स्थित गवालू गांव से पानी मिलेगा। यहां नर्मदा-शिप्रा लिंक परियोजना का पंपिंग स्टेशन और बेक प्रेशर टेंक (बीपीटी) भी है। इस बीपीटी से पानी का हिस्सा कर बलवाड़ा और आसपास के गांव को दिया जाएगा।
-- बीपी टैंक से नीचे की ओर 2 किलोमीटर तक 200 एमएम डाया की मेनलाइन डलेगी। आगे 2.1 किलोमीटर में 800 एमएम की नहर होगी तो दूसरी तरफ 2 किलोमीटर में 600 एमएम की नहर।
-- नर्मदा-गंभीर की तरह यहां की बड़ी बाधा रेल लाइन है। इसीलिए लाइन में भी क्रॉसिंग आएगा। क्रॉसिंग के बाद एक आउटलेट छोड़ा जाएगा ‘जैसे आईआईटी और पीथमपुर के लिए सिमरोल में छोड़ा गया है’ ताकि जरूरत पड़ने पर बलवाड़ा का तालाब भरा जा सके।
पानी सिर्फ 120 दिन मिलेगा
एनवीडीए के अधिकारियों ने बताया कि पानी पूरी तरह से नहीं दिया जाएगा। पानी सिर्फ उन 120 दिनों में ही दिया जाएगा जिनमें रबी के सीजन की फसलों में सिंचाई की जाना है। बाकी दिनों में पानी सामान्य रूप से शिप्रा को ही दिया जाएगा।
इंदौर. विनोद शर्मा ।
सिहस्थ में करोड़ों लोगों को स्नान कराने वाली नर्मदा-शिप्रा लिंक जल्द ही बलवाड़ा सहित 14 गांवों की 12 हजार एकड़ से अधिक जमीन की प्यास भी बुझाएगी। क्षेत्रवासियों की मांग को देखते हुए नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) ने इसके लिए 52 करोड़ की योजना बनाई है जिसके तहत लिंक से इंदौर तक आने वाला नर्मदा का 25 फीसदी पानी क्षेत्र को दिया जाएगा। मार्च से टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
एनवीडीए ने 2150 करोड़ की नर्मदा-गंभीर परियोजना पर काम शुरू कर दिया है। इस परियोजना की पर्यावरणीय अनुमति में बड़ी अड़चन बलवाड़ा और आसपास के क्षेत्र की कृषि व वन भूमि का अधिग्रहण था। इसीलिए 3 जून 2015 को जनसुनवाई हुई। लोगों ने अपनी और खेतों की बदहाली दिखाते हुए नर्मदा के पानी की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने हरी झंडी दे दी। इसके बाद ‘बलवाड़ा एरिगेशन’ प्रोजेक्ट बना। प्रोजेक्ट के आकार लेने के बाद शिप्रा तक आने वाले 5 क्यूमेक/सेकंड (5000 लीटर/सेकंड) में से 1.2 क्यूमेक (1200 लीटर/सेकंड) पानी बलवाड़ा को मिलेगा।
12355 एकड़ जमीन होगी तर
-- 52.78 करोड़ की अनुमानित लागत के साथ तैयार हुए इस प्रोजेक्ट के तहत क्षेत्र को चोरल के पास स्थित गवालू गांव से पानी मिलेगा। यहां नर्मदा-शिप्रा लिंक परियोजना का पंपिंग स्टेशन और बेक प्रेशर टेंक (बीपीटी) भी है। इस बीपीटी से पानी का हिस्सा कर बलवाड़ा और आसपास के गांव को दिया जाएगा।
-- बीपी टैंक से नीचे की ओर 2 किलोमीटर तक 200 एमएम डाया की मेनलाइन डलेगी। आगे 2.1 किलोमीटर में 800 एमएम की नहर होगी तो दूसरी तरफ 2 किलोमीटर में 600 एमएम की नहर।
-- नर्मदा-गंभीर की तरह यहां की बड़ी बाधा रेल लाइन है। इसीलिए लाइन में भी क्रॉसिंग आएगा। क्रॉसिंग के बाद एक आउटलेट छोड़ा जाएगा ‘जैसे आईआईटी और पीथमपुर के लिए सिमरोल में छोड़ा गया है’ ताकि जरूरत पड़ने पर बलवाड़ा का तालाब भरा जा सके।
पानी सिर्फ 120 दिन मिलेगा
एनवीडीए के अधिकारियों ने बताया कि पानी पूरी तरह से नहीं दिया जाएगा। पानी सिर्फ उन 120 दिनों में ही दिया जाएगा जिनमें रबी के सीजन की फसलों में सिंचाई की जाना है। बाकी दिनों में पानी सामान्य रूप से शिप्रा को ही दिया जाएगा।
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