Wednesday, February 24, 2016

सुस्त सर्वे की भेंट चढ़ी 20 हजार करोड़ की रेल परियोजनाएं

इंदौर. विनोद शर्मा ।
आगामी रेल बजट में जहां न सिर्फ इंदौर बल्कि पूरे मप्र को रेल मंत्रालय से मिलने वाली नई सौगातों का इंतजार है। वहीं यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि बजट उन योजनाओं को भी गति देगा जो सर्वे के नाम पर वर्षों से दस्तावेजों में ही झूल रही हैं या फिर उन योजनाओं पर भी पुनर्विचार करेगा जिन्हें रेट आॅफ रिटर्न के नाम पर नकारा जा चुका है। आंकड़ों के लिहाज से बात करें 10 वर्षों में मप्र में 3863 करोड़ की 1015 किलोमीटर की लाइनें आरओआर के कारण नकार दी गई वहीं तकरीबन 16 हजार करोड़ की तकरीबन 2239 किलोमीटर लाइनें रेलवे के सुस्त सर्वें की भेट चड़ चुकी हैं।
अर्से से महसूस की जा रही लोगों की जरूरत देखने और क्षेत्रीय सांसदों की मांग के बाद रेल मंत्रालय रेल परियोजनाओं को हरी झंडी देता है। यह बात अलग है कि इन परियोजनाओं के सर्वे को लेकर रेलवे का रवैया सुस्त ही रहा है। जब तक सर्वे पूरा होता है तब तक प्रोजेक्ट की लागत दोगुनी हो जाती है या फिर रेट आॅफ रिटर्न में उतार-चढ़ाव आ जाता है। नतीजा अच्छी भली योजना ठंडे बस्ते में। फिर मुद्दा उज्जैन-झालावाड़-रामगंज मंडी का हो या फिर सिरपुर-महू या खंडवा-धार लाइन का।
नेटवर्क मजबूत होगा, मिलेगी कई इलाकों को ट्रेन...
मप्र राज्य परिवहन निगम के बंद होने के बाद निजी बसों की दादागिरी झेल रहे प्रदेशवासियों को लंबित रेल परियोजनाओं के अमल में आने से राहत मिलना तय है। नए इलाके लाइन से जुड़ेंगे। जैसे खंडवा-धार, ब्यावरा-राजगढ़-बीना, भोपाल-सागर-छतरपुर-खजुराहो, खरगोन, आगर, सुसनेर, आष्टा-भोपाल-देवास। यहां रेट आॅफ रिटर्न के माइनस जाने का सवाल ही नहीं उठता। बावजूद इसके कई परियोजनाएं रेट आॅफ रिटर्न माइनस बताकर अटका रखी है।
लागत कहां की कहां पहुंच गई, परियोजना वही
176 किलोमीटर लंबी रतलाम-बांसवाड़ा-डूंगरपुर रेल लाइन 2008-09 में मंजूर की गई थी। लागत आंकी गई 1184 करोड़। सर्वे में रेट आॅफ रिटर्न -2.35 प्रतिशत आया इसलिए योजना पर ब्रेक लगा दिया। जनता की मांग पर दोबारा सर्वे हुआ जो 2010 में पूरा हुआ। इसमें रेट आॅफ रिटर्न +3.88 प्रतिशत आया जबकि उस वक्त तब लागत बढ़कर 2082 करोड़ हो चुकी थी।
बड़ी सादरी-नीमच परियोजना 2011-12 में मंजूर हुई। 48 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की लागत 303 करोड़ आंकी गई। दिसंबर 2011 में आई सर्वे रिपोर्ट में -3.25 प्रतिशत रेट आॅफ रिटर्न दिखाया और प्रोजेक्ट होल्ड कर दिया। फरवरी 2013 में आई सर्वे रिपोर्ट में रेट आॅफ रिटर्न -3.76 प्रतिशत आया। उस वक्त तक लागत 303 से बढ़कर 399.38 करोड़ हो चुकी थी।
यह प्रोजेक्ट भी पेपर में ही...
नीचम-सिंगोली-कोटा : 150 किलोमीटर लंबी इस लाइन का सर्वे माच्र 2014 में हुआ। जुलाई 2014 म1ें सर्वे डिलिट कर दिया गया।
रतलाम-चित्तौड़गढ़ :: 189 किलोमीटर लंबी डबल लेन पर कुछ काम नहीं।
प्रतापगढ़-मंदसौर : 32 किलोमीटर लंबी नई ब्रॉडगेज लाइन पश्चिम रेलवे के मुख्यालय में अटकी। सिर्फ टोपोशीट पर काम।
चंद्रावती गंज-उज्जैन : 22.96 किलोमीटर लंबी मीटर गेज लाइन को ब्रांड गेज लाइन से बदला जाना था।
रतलाम-वडोदरा : 259 किलोमीटर लंबी इस लाइन का सर्वे ही 10 प्रतिशत हुआ जबकि 2015-16 में पूरा होना था।
आष्टा-भोपाल : 2013-14 में मंजूर हुई यह लाइन भी डिपार्टमेंट की फाइलों से गायब।
एक नजर में 10 साल की रेल परियोजनाएं...
स्वीकृत : 259
सर्वे कंप्लीट-प्रोजेक्ट स्थगित : 246
रिपोर्ट की समीक्षा जारी : 198
कुल : 704 परियोजनाएं
26 अगस्त 2014 तक की रिपोर्ट





सर्वे के बाद तोड़ दिया दम
लाइन स्वीकृत वर्ष लंबाई लागत रेट आॅफ रिटर्न
खंडवा-खरगोन-सेंधवा-नारदाना 2004-05 225 550 -2.46
उज्जैन-झालावाड़-रामगंज मंडल 2007-08 190 860 -2.76
सिरपुर-महू 2008-09 185 1450 10.31
छिंदवाड़ा-नैनपुर 2004-05 140 228 -5
श्रीधाम-रामटेक-सियोनी 2004-05 275 775 -3
कुल लंबाई 1015किमी 3863 करोड़
इन प्रोजेक्ट पर संस्पेंस बरकरार
खंडवा-धार 2010-11 250 2025 -3.43
झांसी-बीना 2010-11 153 1162 13.12
बिना-उरई-महोबा 2011-12 217 1741 -12.73
पीपर्यागांव-ललितपुर-चंदेरी 2011-12 80 396 -12.36
बड़ी सादरी-नीमच 2011-12 48 303 - 3.25
ब्यावरा-राजगढ़-बीना 2013-14 147 974 -1.5
सागर-छतरपुर-खजुराहो-भोपाल 2013-14 320 1916 -6.5
सतना-रीवा 2013-14 49 165 15

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