रेणुकामाता मल्टीस्टेट को-आॅपरेटिव बैंक पर इनकम टैक्स की कार्रवाई
5 हजार करोड़ के हवाले का अनुमान
इंदौर. विनोद शर्मा।
सुभाषचौक स्थित रेणुकामाता मल्टीस्टेट को-आॅपरेटिव बैंक में 90 फीसदी खाते रेडीमेड कारोबारियों के हैं। इस बैंक का इस्तेमाल फर्जी डीडी (डिमांड ड्राफ्ट) घुमाने के साथ कारोबारियों का दो नंबरी पैसा महाराष्ट्र और गुजरात के शहरों में पहुंचाने के लिए होता है। ये खुलासा सेंधवा, रायपुर के बाद मंगलवार को इंदौर में इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग की छानबीन के दौरान हुआ। बैंक की सभी ब्रांचों के साथ उसके खातेदार भी इनकम टैक्स के निशाने पर है। बैंक के रास्ते 5 हजार करोड़ से अधिक के हवाले का अनुमान लगाया जा रहा है।
विंग ने मंगलवार की शाम बैंक पर दबिश दी। विस्तृत जांच की। जांच के दौरान करीब 40 लाख रुपए लॉकर से मिले हैं जिन्हें सीज कर लिया गया। कार्रवाई देर रात तक चलती रही। इससे पहले रेणुकामाता की सेंधवा ब्रांच पर कार्रवाई हो चुकी है। वहां तकरीबन 2000 करोड़ के हवाले के प्रमाण मिलने की बात कही जा रही है। सोमवार को विंग ने रायपुर में भी बैंक के ठिकानों पर दबिश दी थी। जहां सर्वे के बाद कार्रवाई को सर्च में कन्वर्ट करना पड़ा। इसी कड़ी में इंदौर में भी कार्रवाई हुई।
कार्यक्षेत्र दो राज्यों का, काम चार राज्यों में
बैंक (पंजीयन क्र. एमएससीएस/सीआर/290/2008) का पंजीकृÞत पता एल-24 एमआईडीसी अहमदनगर, नासिक है। पंजीयन के अनुसार बैंक का कार्यक्षेत्र महाराष्ट्र और गुजरात होना है लेकिन बैंक चार राज्यों में काम कर रही है। बैंक का पूरा तानाबना हवाले को लेकर ही बुना गया है। इंदौर में बैंक को करीब 10 साल हो गए हैं।
यहां सब काम एक निजी बैंक की तरह होता है। फिर मामला वेलकम किट के साथ एटीएम पिन देने का हो या फिर हर शाखा के साथ एटीएम का। डाटा सेंटर है। इसके एटीएम में विड्रॉल के साथ फास्ट केस आॅप्शन भी है। इसमें 100 से 10 हजार रुपए तक के आॅपशन है। 2014 में 385 सदस्य बने थे जबकि 2015 में 1647 सदस्य।
हवाला के हवाले है बैंक
एक दशक में एक हजार से अधिक मेम्बर बनाए हैं। इनमें करीब 650 रेडीमेड के कारोबार से जुड़े हैं। खाते कर्मचारियों के नाम पर है। संचालन दलालों के माध्यम से होता है। कारोबारियों की महाराष्ट्र और गुजरात के कारोबारियों से डील भी दलाल कराते हैं और दो नंबर का पैसा भी वही पहुंचाते हैं। इसीलिए खाते खोले गए हैं ताकि यहां से बेनामी डीडी बनाकर महाराष्ट्र-गुजरात तक इंदौरी कारोबारियों की रकम लाई ले जाई जा सके। कुटाल कॉम्पलेक्स, नाकोड़ा टॉवर, शिव विलास पैलेस, तिलकपथ और ईमलीबाजार के रेडीमेड कारोबारी जुड़े हैं इस बैंक से।
ऐसा है सिस्टम...
-- हवाला का माध्यम से कोई राशि आती है और वह सेम डे कारोबारी तक पहुंचती है तो उस पर एक प्रतिशत ‘सर्विस’ चार्ज देना होगा।
-- तीन दिन में ‘विड्रॉल’ कराएं तो जितना पैसा आया है उतना मिल जाएगा।
-- तीन दिन के बाद यदि पैसा ‘विड्रॉल’ होता है तो उस पर बैंक 6 प्रतिशत का ब्याज भी देती है। क्योंकि इस राशि का इस्तेमाल दूसरे लेन-देन में हो जाता है।
ऐसे होता है ड्राफ्ट एक्सचेंज...
गुरुशरण, कान्हा, राजेंद्र सूरी और श्रीवर्धमान को-आॅपरेटिव बैंकों की तरह यहां भी फर्जी डीडी का बड़ा खेल है। बैंक में ऐसे कई खाते हैं जिनके खातेदारों को मासिक वेतन देकर उनका खाता हवाले के लिए इस्तेमाल होता है। इन्हीं खातेदारों के नाम से फर्जी डीडी बनवाए जाते हैं इन डीडी को कारोबारियों को दे दिया जाता है। जैसे किसी होटल में रूपए की जगह कई बार सिगरेट या माचिस की पत्ती इस्तेमाल होती है वैसे ही यह डीडी एक से दूसरे कारोबारियों के बीच हस्तांतरित होती रहती है ताकि पकड़-धकड़ में बचाव आसान हो।
कपड़ा कारोबारियों में हड़कंप..
पहले सेंधवा और फिर रायपुर में सोमवार को हुई कार्रवाई के बाद ही इंदौर के कपड़ा कारोबारियों ने बैंक से कामकाज बंद कर दिया। यहां तक आपस में डीडी भी नहीं एक्सचेंज की। क्योंकि इससे पहले गुरुशरण और कान्हां में इन्हीं कारोबारियों के काले कारनामों की कलई खुल चुकी है।
एक नजर में बैंक
कुल ब्रांच : 103
राज्य : महाराष्ट्र, गुजरात, मप्र, आंध्रप्रदेश, कनार्टका और दिल्ली
कुल डिपॉजिट : 235.92 करोड़ (मई 2015 तक )
सिक्योर्ड एडवांस : 65.26 करोड़
लोन जो दिया : 177.38 करोड़
अध्यक्ष : प्रशांत भालेराव
उपाध्यक्ष : पांडुरंग देवकर
(मार्च 2015 को 332 करोड़ 99 लाख 66 हजार 613 रुपए की आॅडिट रिपोर्ट सबमिट की। )
खेल ऐसे भी
एक व्यक्ति आया उसने 5 लाख रुपए की डीडी बनवाई। पहचान-पत्र दिया। दूसरा व्यक्ति आया उसने 10 लाख की डीडी बनवाई लेकिन पहचान पत्र नहीं था। ऐसे में बैंक वाले पहले व्यक्ति के पहचान-पत्र पर ही दूसरी डीडी बना देते हैं इससे जिसने 5 लाख की डीडी बनवाई है उसकी कुल 15 लाख की डीडी बताई जाती है जबकि 10 लाख देने वाले का नाम तक नहीं रहता। इससे मोटी कमीशन ली जाती है। बैंक का खाता बैंक आॅफ बड़ौदा में भी है। एक नंबर का रोटेशन दिखाने के लिए यहां से वहां चक्रा चलाया जाता है।
5 हजार करोड़ के हवाले का अनुमान
इंदौर. विनोद शर्मा।
सुभाषचौक स्थित रेणुकामाता मल्टीस्टेट को-आॅपरेटिव बैंक में 90 फीसदी खाते रेडीमेड कारोबारियों के हैं। इस बैंक का इस्तेमाल फर्जी डीडी (डिमांड ड्राफ्ट) घुमाने के साथ कारोबारियों का दो नंबरी पैसा महाराष्ट्र और गुजरात के शहरों में पहुंचाने के लिए होता है। ये खुलासा सेंधवा, रायपुर के बाद मंगलवार को इंदौर में इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग की छानबीन के दौरान हुआ। बैंक की सभी ब्रांचों के साथ उसके खातेदार भी इनकम टैक्स के निशाने पर है। बैंक के रास्ते 5 हजार करोड़ से अधिक के हवाले का अनुमान लगाया जा रहा है।
विंग ने मंगलवार की शाम बैंक पर दबिश दी। विस्तृत जांच की। जांच के दौरान करीब 40 लाख रुपए लॉकर से मिले हैं जिन्हें सीज कर लिया गया। कार्रवाई देर रात तक चलती रही। इससे पहले रेणुकामाता की सेंधवा ब्रांच पर कार्रवाई हो चुकी है। वहां तकरीबन 2000 करोड़ के हवाले के प्रमाण मिलने की बात कही जा रही है। सोमवार को विंग ने रायपुर में भी बैंक के ठिकानों पर दबिश दी थी। जहां सर्वे के बाद कार्रवाई को सर्च में कन्वर्ट करना पड़ा। इसी कड़ी में इंदौर में भी कार्रवाई हुई।
कार्यक्षेत्र दो राज्यों का, काम चार राज्यों में
बैंक (पंजीयन क्र. एमएससीएस/सीआर/290/2008) का पंजीकृÞत पता एल-24 एमआईडीसी अहमदनगर, नासिक है। पंजीयन के अनुसार बैंक का कार्यक्षेत्र महाराष्ट्र और गुजरात होना है लेकिन बैंक चार राज्यों में काम कर रही है। बैंक का पूरा तानाबना हवाले को लेकर ही बुना गया है। इंदौर में बैंक को करीब 10 साल हो गए हैं।
यहां सब काम एक निजी बैंक की तरह होता है। फिर मामला वेलकम किट के साथ एटीएम पिन देने का हो या फिर हर शाखा के साथ एटीएम का। डाटा सेंटर है। इसके एटीएम में विड्रॉल के साथ फास्ट केस आॅप्शन भी है। इसमें 100 से 10 हजार रुपए तक के आॅपशन है। 2014 में 385 सदस्य बने थे जबकि 2015 में 1647 सदस्य।
हवाला के हवाले है बैंक
एक दशक में एक हजार से अधिक मेम्बर बनाए हैं। इनमें करीब 650 रेडीमेड के कारोबार से जुड़े हैं। खाते कर्मचारियों के नाम पर है। संचालन दलालों के माध्यम से होता है। कारोबारियों की महाराष्ट्र और गुजरात के कारोबारियों से डील भी दलाल कराते हैं और दो नंबर का पैसा भी वही पहुंचाते हैं। इसीलिए खाते खोले गए हैं ताकि यहां से बेनामी डीडी बनाकर महाराष्ट्र-गुजरात तक इंदौरी कारोबारियों की रकम लाई ले जाई जा सके। कुटाल कॉम्पलेक्स, नाकोड़ा टॉवर, शिव विलास पैलेस, तिलकपथ और ईमलीबाजार के रेडीमेड कारोबारी जुड़े हैं इस बैंक से।
ऐसा है सिस्टम...
-- हवाला का माध्यम से कोई राशि आती है और वह सेम डे कारोबारी तक पहुंचती है तो उस पर एक प्रतिशत ‘सर्विस’ चार्ज देना होगा।
-- तीन दिन में ‘विड्रॉल’ कराएं तो जितना पैसा आया है उतना मिल जाएगा।
-- तीन दिन के बाद यदि पैसा ‘विड्रॉल’ होता है तो उस पर बैंक 6 प्रतिशत का ब्याज भी देती है। क्योंकि इस राशि का इस्तेमाल दूसरे लेन-देन में हो जाता है।
ऐसे होता है ड्राफ्ट एक्सचेंज...
गुरुशरण, कान्हा, राजेंद्र सूरी और श्रीवर्धमान को-आॅपरेटिव बैंकों की तरह यहां भी फर्जी डीडी का बड़ा खेल है। बैंक में ऐसे कई खाते हैं जिनके खातेदारों को मासिक वेतन देकर उनका खाता हवाले के लिए इस्तेमाल होता है। इन्हीं खातेदारों के नाम से फर्जी डीडी बनवाए जाते हैं इन डीडी को कारोबारियों को दे दिया जाता है। जैसे किसी होटल में रूपए की जगह कई बार सिगरेट या माचिस की पत्ती इस्तेमाल होती है वैसे ही यह डीडी एक से दूसरे कारोबारियों के बीच हस्तांतरित होती रहती है ताकि पकड़-धकड़ में बचाव आसान हो।
कपड़ा कारोबारियों में हड़कंप..
पहले सेंधवा और फिर रायपुर में सोमवार को हुई कार्रवाई के बाद ही इंदौर के कपड़ा कारोबारियों ने बैंक से कामकाज बंद कर दिया। यहां तक आपस में डीडी भी नहीं एक्सचेंज की। क्योंकि इससे पहले गुरुशरण और कान्हां में इन्हीं कारोबारियों के काले कारनामों की कलई खुल चुकी है।
एक नजर में बैंक
कुल ब्रांच : 103
राज्य : महाराष्ट्र, गुजरात, मप्र, आंध्रप्रदेश, कनार्टका और दिल्ली
कुल डिपॉजिट : 235.92 करोड़ (मई 2015 तक )
सिक्योर्ड एडवांस : 65.26 करोड़
लोन जो दिया : 177.38 करोड़
अध्यक्ष : प्रशांत भालेराव
उपाध्यक्ष : पांडुरंग देवकर
(मार्च 2015 को 332 करोड़ 99 लाख 66 हजार 613 रुपए की आॅडिट रिपोर्ट सबमिट की। )
खेल ऐसे भी
एक व्यक्ति आया उसने 5 लाख रुपए की डीडी बनवाई। पहचान-पत्र दिया। दूसरा व्यक्ति आया उसने 10 लाख की डीडी बनवाई लेकिन पहचान पत्र नहीं था। ऐसे में बैंक वाले पहले व्यक्ति के पहचान-पत्र पर ही दूसरी डीडी बना देते हैं इससे जिसने 5 लाख की डीडी बनवाई है उसकी कुल 15 लाख की डीडी बताई जाती है जबकि 10 लाख देने वाले का नाम तक नहीं रहता। इससे मोटी कमीशन ली जाती है। बैंक का खाता बैंक आॅफ बड़ौदा में भी है। एक नंबर का रोटेशन दिखाने के लिए यहां से वहां चक्रा चलाया जाता है।
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