Wednesday, February 24, 2016

अक्टूबर में दर्ज हुआ था केस, सितंबर से थी सतीश को जानकारी


जम्मू कंकाल कांड की गुत्थी के बाद अब सूरत दुश्कर्म प्रकरण भी गुत्थी भी सुलझने लगी
इंदौर. विनोद शर्मा ।
संत श्री आसाराम बापू को बदनाम करने की साजिशें रचने वाले सतीश वाधवानी की गिरफ्तारी और उसके मोबाइल से निकल रहे राज ने न सिर्फ जम्मू आश्रम में मिले कथित कंकाल की ग़ुत्थी सुलझाई बल्कि सूरत में दर्ज हुए दुश्कर्म के केस पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि सतीश और उसके सहयोगी प्रकाश राजदेव को पहले से पता था कि अहमदाबाद-सूरत में बापू और नारायणसार्इं के खिलाफ दुश्कर्म का मामला दर्ज होगा। कैसे? इसकी जांच जारी है।
15 अगस्त को दर्ज हुए जोधपुर प्रकरण के बाद 30 अगस्त को बापू की गिरफ्तारी हुई। इसके कुछ ही दिन बाद सतीश के बेहाफ पर प्रकाश ने इंदौर आश्रम के प्रबंधक को फोन लगाया। कहा कि जल्द ही सूरत में भी दोनों के खिलाफ केस दर्ज होगा। अभी वक्त है, कहो तो अभी से मामला सेटल करें। बात बनी नहीं। 6 अक्टूबर 2013 को सूरत के जहांगीरपुरा थाने में बापू और नारायणसार्इं के खिलाफ दो बहनों ने यौन उत्पीड़न का प्रकरण दर्ज कराया। 4 दिसंबर को नारायणसार्इं की दिल्ली से गिरफ्तारी हुई। हालांकि 2015 में बापू पर आरोप लगाने वाली बड़ी बहन पलट गई। पहले उसने बयान पलटने का आवेदन दिया जिस पर पुलिस ने आपत्ति ली। बाद में इंदौर आकर उसने मीडिया के सामने कहा था कि दबाव में आकर आरोप लगाया था।
10 करोड़ और 7 करोड़ की जमीन थी डिमांड
सतीश मुलत: नारायणसार्इं से जुड़ा था। इंदौर प्रवास के दौरान उनकी गाड़ी ड्राइव करता था। इसीलिए वह सार्इं की पत्नी के भी करीब था, उन्हें कथा के दौरान के सच्चे-झूठे किस्से सुनाता था। बाद में महिला साधकों के प्रति उसकी हरकतें देखकर नारायण सार्इं ने उसे भगा दिया। तभी से सतीश ने ठान लिया कि वह नारायण सार्इं से मिर्जापुर की वह एक लाख वर्गफीट जमीन लेकर रहेगा जो उसके परिवार ने दान में दी थी। बापू की गिरफ्तारी के बाद सतीश ने उनके करीबियों से 10 करोड़ नकद और मिर्जापुर की जमीन मांगी थी। सतीश के जमीनी लालच से उसका परिवार भी नाराज है।
सोची-समझी साजिश में पकड़ाए सार्इं
सतीश सहित सभी षड़यंत्रकारी यह जानते थे कि यदि सिर्फ बापू अंदर जाते हैं तो नारायण सार्इं पूरी ताकत झौंक देंगे उन्हें बाहर लाने के लिए। इसीलिए सूरत प्रकरण दर्ज हुआ ताकि नारायणसार्इं भी बाहर न रहे। साजिशकर्ता जानते थे कि दोनों के अंदर जाने से साधकों का विश्वास टूटेगा और उनके समर्थकों का मनोबल।
सवालों में साजीश
- सतीश ने कहा कि मैंने नारायण सार्इं को छोड़ा जबकि वह 1994 से 2011 तक उनके साथ रहा। परिवार की इतनी सार्इं में अगाध श्रृद्धा जो जमीन दान दे दी। फिर सतीश ने क्यों छोड़ा?
- यदि जमीन लेना ही थी तो सतीश के परिजन विजय औ ईश्वर वाधवानी वापस मांगते जिनके नाम जमीन दर्ज थी। सतीश को सार्इं द्वारा हकाले जाने के बाद भी उन्होंने जमीन नहीं मांगी क्योंकि वे अपने उसकी हकीकत जानते थे।
- आखिर वो कौनसी शक्ति थी जिसके दबाव का जिक्र सूरत में बापू पर दुश्कर्म का आरोप लगाकर बाद पलटी पीड़िता ने किया था?
- शाहजहांपुर की लड़की, छिंदवाड़ा आश्रम में पड़ती रही। जोधपुर आश्रम गई। जोधपुर की घटना पर दिल्ली में जाकर प्रकरण दर्ज क्यों कराया? सिर्फ इसलिए क्योंकि वहां पास्को लगता है जिसमें जमानत आसान नहीं होती।
- बापू की गिरफ्तारी के बाद ही सूरत के दुश्कर्म मामले क्यों सामने आए? पहले क्यों नहीं? यदि जान के खतरे की बात कही जाती है तो जिस वक्त प्रकरण दर्ज हुआ था उस वक्त  बापू भले अंदर थे लेकिन सार्इं बाहर थे।
- जब बापू-सार्इं के अंदर जाने के बाद जान का खतरा टला और पीड़ित सामने आने लगे तो सवाल यह भी है कि आखिर फिर तीन वर्षों में गवाहों पर हमले किसने और क्यों किए। वह भी जमानत अर्जी पर सुनवाई की तारीख से ठीक पहले।

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