Thursday, April 15, 2010

धनलक्ष्मी भी अवैध


इंदौर। सुगनीदेवी कॉलेज परिसर की जिस जमीन के कारण उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और विधायक रमेश मेंदोला पर 100 करोड़ के हेरफेर के आरोप लग रहे हैं, उस पर बनी इमारत भी अवैध है। धनलक्ष्मी अपार्टमेंट विजयवर्गीय, मेंदोला के सहआरोपी विजय कोठारी और मनीष संघवी की धनलक्ष्मी केमिकल ने बनवाया है।

औद्योगिक उपयोग की जमीन पर बगैर टीएंडसीपी मंजूरी के निगम से नक्शा मंजूर कराकर निर्माण होने के कारण परदेशीपुरा चौराहे स्थित यह इमारत अवैध की श्रेणी में है। कोठारी और संघवी की कंपनी को यह जमीन उद्योग के लिए निगम से लीज पर मिली थी।

इसे बाद में नंदानगर सहकारी साख संस्था के अध्यक्ष रमेश मेंदोला को 1.38 करोड़ रूपए में बेच दिया गया। मामले में तत्कालीन मेयर विजयवर्गीय, मेंदोला, कोठारी एवं संघवी के खिलाफ लोकायुक्त जांच शुरू हो चुकी है।

चार बिल्डिंगों की मिली थी मंजूरी
तत्कालीन निगम इंजीनियर नित्यानंद जोशी और जीएम अवाशिया ने धनलक्ष्मी केमिकल्स के नक्शों को मंजूरी दी थी। अब दोनों रिटायर हो चुके हैं। मंजूरी चार अपार्टमेंट की थी। इसमें से एक 1991 में बन चुका था और दूसरे का काम जारी था।

क्यों अवैध है बिल्डिंग?
- निगम ने जमीन औद्योगिक उपयोग के लिए लीज पर दी थी। भू-उपयोग परिवर्तन के लिए निगम की मंजूरी ली जाना थी, जो नहीं ली गई।
- निगम के लीज दस्तावेजों में आज भी जमीन का भू-उपयोग औद्योगिक है।
- निगम की मंजूरी मिलने के बाद टीएंडसीपी को आवेदन किया जाना था। इसके बगैर सरकार की मंजूरी के भू-उपयोग परिवर्तन नहीं कर सकता।

रहते हैं 23 परिवार
अपार्टमेंट में कैलाश गांधी, सचिन जैन, धनपाल मेहता, रमेशचंद्र मेहता, रसीला बेन, जीवनलाल शाह, प्रेमसिंह पारिख समेत 23 परिवार रहते हैं। रहवासियों का कहना है हमने धनलक्ष्मी केमिकल्स से फ्लैट खरीदे हैं, जिसकी रजिस्ट्रियां हमारे पास है। नक्शों में गड़बड़ थी तो निगम को उस वक्त कार्रवाई करना थी, जब अवैध इमारत बन रही थी।

ढहाने गए थे अफसर
गैरकानूनी मंजूरी की जानकारी मिलते ही तत्कालीन निगम प्रशासक एसएस उप्पल ने 1991 में ही नगरीय प्रशासन प्रमुख सचिव को जानकारी देकर इसे जमींदोज करने की अनुमति मांगी। अनुमति मिलते ही रिमूवल दस्ते के साथ उप्पल भी मौके पर पहुंचे, लेकिन अचानक कार्रवाई टल गई। इस घटनाक्रम के बाद ही बाकी तीन बिल्डिंगें नहीं बन सकीं।

"सौ करोड़" की फाइल खुली
सुगनीदेवी कॉलेज परिसर की सौ करोड़ रू. कीमत वाली जमीन की गड़बड़ी के मामले में लोकायुक्त अफसर थोड़ी हरकत में दिख रहे हैं। बुधवार को आंबेडकर जयंती की छुट्टी के बावजूद अफसर जांच करते रहे। तत्कालीन महापौर कैलाश विजयवर्गीय, रमेश मेंदोला, धनलक्ष्मी केमिकल इंडस्ट्रीज के भागीदार विजय कोठारी और मनीष संघवी की भूमिका की जांच की जा रही है। इसमें तत्कालीन निगमायुक्त व एमआईसी सदस्य भी घेरे में हैं।

मंगलवार को राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने कोर्ट में कहा था कि नगरीय प्रशासन प्रमुख सचिव से जानकारी नहीं मिलने के कारण जांच नहीं हो सकी। इस पर कोर्ट ने लोकायुक्त को जांच सौंपी थी। मंगलवार को ही लोकायुक्त पीपी नावेलकर ने जांच शुरू करने के निर्देश भी दिए थे।

उधर, जांच शुरू होते ही घोटाले से जुड़े लोगों में खलबली मची हुई है। धनलक्ष्मी केमिकल इंडस्ट्रीज द्वारा रमेश मेंदोला की नंदानगर साख सहकारी संस्था को 3 एकड़ लीज की जमीन 1.38 करोड़ रू. में बेचने और इसकी अनुमति देने वाली एमआईसी में सदस्य कौन-कौन थे? इसे लेकर अब तत्कालीन सदस्यों में भी खलबली है।

1 comment:

  1. गैरकानूनी मंजूरी की जानकारी 1991 में ही मिल गयी थी उस समय महापौर कौन थे ?
    रिमूवल दस्ते के साथ उप्पल भी मौके पर पहुंचे, लेकिन अचानक कार्रवाई टल गई।
    क्यो टल गयी ?

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