Friday, April 9, 2010

धुएं में उड़ गई योजना



विनोद शर्मा Wednesday, April 08, 2009 02:19 [IST]

इंदौर.


सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देने के तीन साल बाद भी कचरा प्रबंधन और बूचड़खानों के आधुनिकीकरण में नगर निगम नाकाम ही है। इसके कारण ट्रेंचिंग ग्राउंड से लगे उन क्षेत्रों के बाशिंदों के लिए चिंता बढ़ गई है जिनके यहां कचरा निपटान के अभाव में हवा के साथ ही पानी भी प्रदूषित होने लगा है।

इस संबंध में फोटो के साथ मैदानी रिपोर्ट तैयार करके मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड निगम को बीते सप्ताह नोटिस भी थमा चुका है। बोर्ड का कहना है नियमानुसार कचरे के निपटान की व्यवस्था और इसके लिए प्रस्तावित योजनाओं पर जल्द काम शुरू हो।

शहरी क्षेत्रों को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वर्ष 2000 में कुछ मापदंड तय किए थे। इनके अनुसार हर शहर में नगरीय निकाय को कचरे के ठोस प्रबंधन के साथ उसके उपचार की व्यवस्था करना थी। मापदंडों को लागू हुए नौ साल हो चुके हैं लेकिन शहर में एक भी बिंदु का पालन नहीं हो पाया। कोर्ट और बोर्ड के नोटिस पर 2006 में महापौर डॉ. उमाशशि शर्मा और तत्कालीन निगमायुक्त विनोद शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था।

इस बात को तीन साल हो चुके हैं लेकिन निगम हलफनामे को मैदानी शक्ल नहीं दे पाया। गैरकानूनी रूप से ट्रेंचिंग ग्राउंड पर फैला कचरा भूजल और जलता हुआ कचरा वायु को प्रदूषित कर रहा है। फरवरी में बोर्ड द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार कचरा जलने से तकरीबन दो वर्गकिलोमीटर क्षेत्र में वायु प्रदूषण तो बढ़ा ही देवगुराड़िया, सनावदिया, दूधिया सहित आसपास के गांवों के बोरिंगों का पानी भी प्रदूषित होने लगा है।

बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ए.ए. मिश्रा ने इस संबंध में बताया निगम हलफनाम के अनुसार एक भी काम नहीं कर पाया। इसको लेकर मुख्यालय से निगम को सालाना रिमाइंडर और नोटिस जारी होते हैं। योजनाओं के प्रस्तुतिकरण के लिए निगम के संबंधित अधिकारियों को मुख्यालय में दो सप्ताह पहले तलब भी किया गया लेकिन कोई गया ही नहीं। रिपोर्ट की कॉपी मुख्यालय के साथ निगम प्रशासन को भी भेज चुके हैं।

ये था नगर निगम के हलफनामे में

हलफनामे में स्पष्ट था कि 2000 से 2006 के बीच किन्हीं कारणों से निगम कचरा प्रबंधन और अत्याधुनिक बूचड़खाने पर काम नहीं कर पाया। इस संबंध में मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी कई मर्तबा नोटिस दे चुका है। साइट क्लीयर है। हम कोर्ट को विश्वास दिलाते हैं कि दिसंबर 2007 तक इंदौर में प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित कर वहां कचरे से खाद बनाना शुरू कर देंगे। अवैध बूचड़खानों पर अंकुश के लिए अत्याधुनिक बूचड़खाना भी बनाएंगे। इसके लिए 15 एकड़ जमीन भी चिह्न्ति की जा चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट बोर्ड के मापदंड

कचरा प्रबंधन

* घर-घर से कचरा इकट्ठा करना निगम की जिम्मेदारी।
* संग्रहण स्थलों को दुरुस्त करना।
* गीले और सूखे कचरे को अलग करना।
* कचरे की रिसाइकिलिंग।
* कचरे से खाद, कोयला, गैस या बिजली बनाना।
* प्रदूषण नियंत्रण के लिए सेनेट्री लैंडफील की व्यवस्था करना।

ये है हकीकत
* कुछ इलाकों में ही घरों से इकट्ठा होता है कचरा।
* संग्रहण स्थल बदहाल। पक्के बनाने की योजना बीच में ही बंद।
* प्रथककरण, रिसाइकिलिंग और प्रोसेसिंग की कोई व्यवस्था नहीं।
* ट्रेंचिंग ग्राउंड पर खुले में फैलाते हैं कचरा।
* कचरा गाड़ियों की हालत खस्ता।

बूचड़खाने

* आधुनिकीकरण करना होगा।
* दूषित जल के उपचार की व्यवस्था।
* अन्य अनावश्यक सामग्रियों के निपटान की व्यवस्था भी की जाए।
* अवैध बूचड़खानों पर अंकुश।

हो यह रहा है
विरोध के कारण बूचड़खाने के लिए निगम जमीन चिह्न्ति नहीं कर पाया। ट्रेंचिंग ग्राउंड पर बनना था पर विरोध के बाद वक्फ बोर्ड की जमीनों पर फैसला होना है। धड़ल्ले से चल रहे हैं अवैध बूचड़खाने।

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