Monday, April 12, 2010

अफसर-रसूखदार बने हिस्सेदार


इंदौर। पुलिस प्रशासन जिन भू-माफियाओं के खिलाफ अब शिकंजा कस रहा है, कभी उनकी ही दागी गृह निर्माण संस्थाओं से महकमे के कई अघिकारियों ने जमीनें खरीदी थीं। सीलिंग से प्रभावित आधी से अधिक इन जमीनों के खरीदारों में आधा दर्जन से अधिक पुलिस अघिकारी और रसूखदार लोग शामिल हैं। इस खुलासे से यह संकेत तो मिलता ही है कि जमीन के नाम पर ठगी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई सालों क्यों अटकी रही।

सीलिंग प्रभावित जमीन भी बेची
मजदूर पंचायत गृह निर्माण सहकारी संस्था की हालत भी ऎसी ही है। खसरा नं. 152 (रकबा 1.7 हेक्टेयर यानी 1.82 लाख वर्गफीट) जमीन सीलिंग प्रभावित होने के बाद भी संस्था के नाम है। वहीं खसरा नं. 167 को चार हिस्सों में बांटकर 5000 से 20,000 वर्गफीट तक प्लॉटों की गैर सदस्यों के नाम रजिस्ट्री कर दी गई। इसमें 167/1/1 (रकबा 0.185 हेक्टेयर यानी 19,913 वर्गफीट) जमीन भूपेंद्र सिंह पिता धर्मेद्रसिंह के नाम है। इंदौर में आरआई रहे भूपेंद्र दूसरे जिले में डीएसपी हैं। शेष पेज

केस 1
साढ़े पांच एकड़ 13 हिस्सों में बेची
खजराना स्थित देवी अहिल्या श्रमिक कामगार गृह निर्माण सहकारी संस्था ने वैसे तो डेढ़ सौ एकड़ से अधिक जमीन बेची है, पर सर्वे नंबर 136 (रकबा 5.57 एकड़) का मामला खास है। इसे 13 हिस्सों में बेचा गया। इनमें खसरा नं. 136/3/1/मिन-3 (रकबा 0.335 हेक्टेयर यानी 36000 वर्गफीट से ज्यादा) बलदेवसिंह ठाकुर की पत्नी यशोदा, बेटों कुं. महेंद्र सिंह और कु. शैलेंद्र सिंह के नाम है। राजस्व विभाग में ठाकुर का पता फुडरा गांव, आष्टा तहसील, जिला सीहोर दर्ज है। यह उनका पुश्तैनी पता है। इंदौर में टीआई रहे ठाकुर अभी देवास में सीएसपी हैं। उनका मौजूदा पता इंदौर की स्कीम-74 का है।

केस 2
दो दिन पहले गए काम रूकवाने
दूसरा नाम है सिद्दिका पति शब्बीर खान का। उनके नाम खसरा 136/3/1/मिन-1 की 22,469 वर्गफीट जमीन है। सिद्दिका श्रीनगर कॉलोनी निवासी रिटायर्ड डीएसपी सिराज खान की बेटी हैं। दो दिन पहले खान अपने प्लॉट के पास एक महिला द्वारा जारी निर्माण रूकवाने खजराना थाने भी गए थे। थाना प्रभारी बीएस परिहार ने इसकी पुष्टि की। मामला एसडीएम के सामने है। दोनों जमीनें सीलिंग से प्रभावित हैं।

"मेरा किसी जमीन से कोई लेना-देना नहीं है। मैंने कभी कोई जमीन नहीं खरीदी।"
- सिराज खान, पूर्व डीएसपी


क्यों अवैध हैं जमीनों के ये सौदे*
सहकारिता नियमों के तहत इंदौर विकास प्राघिकरण द्वारा रहवासी क्षेत्र में 2000 वर्गफीट तक की सीमा तय है। हालांकि संस्थाओं के लिए सीमा तय नहीं है। पर सभी प्लॉट तकरीबन समान आकार के होना चाहिए। सामान्यत: संस्था 1500 वर्गफीट से ज्यादा के प्लॉट नहीं देती।
* जमीनें सीलिंग से प्रभावित हैं। इन्हें प्रशासनिक अनुमति के बगैर नहीं बेचा जा सकता। सौदों में अनुमति नहीं ली गई और खरीदने वाले संस्थाओं के सदस्य भी नहीं हैं।

बड़े-बड़े खरीदार
देवी अहिल्या गृह निर्माण सहकारी संस्था
*खसरा नं. 136/1/2 (0.094 हेक्टेयर) अशोक रामलाल पिता जोखूलाल सोनी। नंदानगर गली नं. 2
*खसरा नं. 136/3/1 मिन-2 (0.042 हेक्टेयर)- उदयसिंह पिता नानासिंह, उमादेवी पति उदयसिंह, शैलेंद्रसिंह पिता उदयसिंह, लोकेंद्र सिंह पिता उदयसिंह, वीरेंद्रसिंह पिता उदयसिंह। निवासी रतलाम कोठी
*खसरा नं. 136/4/2 (0.084 हेक्टेयर)- ठाकुर बृजमोहनसिंह पिता हिम्मतसिंह गौरिया। पता खमरीया
*खसरा नं. 136/3/4 (0.84 हेक्टेयर)- भारत पिता श्रीकृष्ण पाठक। निवासी स्कीम-54
*खसरा नं. 136/3/3 (0.126 हेक्टेयर)- न्यू पलासिया निवासी अजय पिता झावेरीलाल ब्रrोचा
*खसरा नं. 136/3/2 (0.042 हेक्टेयर)- नीता पति अजय ब्रrोचा
*खसरा नं. 136/3/5 (0.046 हेक्टेयर)- विजयसिंह पिता आरपी सिंह। निवासी लाल मस्जिद चौराहा मालीपुरा उज्जैन

सदस्यों का हक मारने वाले सजा के पात्र"
सदस्यों के हक पर भांजी मारने वाला हर व्यक्ति सजा का हकदार है। फिर वह पुलिस अघिकारी ही क्यों न हो। इससे कार्रवाई पर कोई फर्क नहीं पड़ता।"
- संजय राणा, आईजी

क्या कहते हैं जमीन खरीदने वाले"
जमीन खरीदी की बातें झूठी हैं। जिसने जमीन खरीदी वह जाने।"
- आरएस यादव, सीएसपी

बच्चों ने खरीदी होगी। मुझे जानकारी नहीं।"
- बलदेवसिंह ठाकुर, सीएसपी

"देवी अहिल्या संस्था से खरीदी थी। सीलिंग से मुक्त है। संस्था के सदस्य थे। सदस्य कौन था और सदस्यता क्रमांक क्या है, पता नहीं।"
- शैलेंद्र सिंह पिता उदय सिंह

1 comment: