
इंदौर। सुगनी देवी कॉलेज पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी कॉलेज को सालाना पैसा देने के साथ हर तरह की जिम्मेदारी से हाथ खींचने की तैयारी में है। कार्य परिषद की अगली बैठक में भी इस पर विचार-विमर्श किया जाएगा। चर्चा कॉलेज को निजी हाथों में सौंपे जाने की है।
पिछले आठ साल से कॉलेज का संचालन यूनिवर्सिटी द्वारा किया जा रहा है। इसके लिए हर साल लगभग 14 लाख रूपए यूनिवर्सिटी और इतनी ही राशि शासन द्वारा दी जाती है। कुछ पैसा सेल्फ फायनेंस कोर्सेüस से आने वाली फीस से आता है। शुरू से ही घाटे का सौदा मानकर यूनिवर्सिटी ने इसमें रूचि नहीं ली। परिणामस्वरूप आठ साल में भी कॉलेज खुद का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं है। साल में दी जाने वाली मोटी रकम अब यूनिवर्सिटी को अखरने लगी है। हालत यह है कि आधा जनवरी खत्म होने के बाद भी फैकल्टी के वेतन की राशि जारी नहीं की गई। यूनिवर्सिटी प्रशासन इस मामले पर बोलने को तैयार नहीं है। हालांकि दबी जुबान से यह जरूर कहा जा रहा है कि आखिर कॉलेज को पैसा कब तक दें?
भाजपा नेता की निगाह
इस बीच मिल क्षेत्र के कद्दावर भाजपा नेता इसे लेने में रूचि दिखा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार पार्टी में गहरी पैठ रखने वाले भाजपा नेता के दो समर्थक पिछले दिनों कुलपति डॉ. अजीतसिंह सेहरावत से भी इस मामले को लेकर मिल चुके हंै। यदि कोई बड़ा रोड़ा नहीं आता है तो यह कॉलेज जल्द ही निजी हाथों में चला जाएगा। 2010 में ही जमीन की लीज का नवीनीकरण किया जाना है। इसी दौरान स्थानांतरण की कार्रवाई भी संभावित है।
बढ़ेगा आर्थिक बोझ
शासन से अनुदान होने के कारण यहां फीस ज्यादा नहीं है। निजी हाथों में कॉलेज जाने के बाद प्रबंधन मनमानी फीस वसूलेगा, जिससे गरीब विद्यार्थियों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
ये है इतिहास
कपड़ा मिलों के मजदूरों की बेटियों को उच्च शिक्षा देने के लिए हुकमचंद मिल के कैलाश अग्रवाल ने कॉलेज खोलने का सपना देखा। निगम से 99 साल की लीज पर जमीन लेकर 1982 में कॉलेज स्थापित किया गया। मिल के बंद होने पर अग्रवाल ने इसे चलाने से मना कर दिया। शासन को भी इस संबंध में अवगत कराया गया। 2003 में देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी ने छात्राओं के भविष्य को ध्यान में रखकर इसे गोद ले लिया। शासन को साक्षी मानते हुए यूनिवर्सिटी और अग्रवाल ग्रुप के ओंकार चेरेटी ट्रस्ट के बीच एक एमओयू साइन हुआ। शासन ने भी अनुदान राशि देने की घोषणा कर दी।
- कार्य परिष्ाद की अगली बैठक में सुगनी देवी को दिए जाने वाली राशि पर चर्चा की जाएगी। पैसा देने की भी हमारी अपनी सीमा है। इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकता।
डॉ. अजीतसिंह सेहरावत, कुलपति
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