
इंदौर। जमीन से जुड़े मामलों में क्षेत्र क्रमांक एक के विधायक सुदर्शन गुप्ता के नाम का खुलासा हुआ है। गुप्ता और उनका परिवार मां सरस्वती गृह निर्माण सहकारी संस्था का 2006 में सदस्य बना, जबकि तुलसी नगर के प्लॉट उनके नाम 2005 में ही हो चुके थे। प्लॉट भी एक-दो नहीं, क्रम से पूरे चार। डेढ़ हजार रूपए प्रति वर्गफीट के हिसाब से इनकी कीमत करीब 90 लाख रूपए आंकी जा रही है। संस्था के अध्यक्ष शिवनारायण अग्रवाल हैं। अग्रवाल देवी अहिल्या गृह निर्माण सहकारी संस्था के 22 फरार संचालकों में से एक हैं।
15 हजार वाले को प्लॉट, 52 हजार वाले डिफाल्टर
गुप्ता परिवार को दिया गया हर प्लॉट 1500 वर्गफीट का है। परिवार ने विकास शुल्क के साथ हर प्लॉट के 15 हजार रूपए चुकाए। रजिस्ट्री भी हो गई। वहीं गुप्ता परिवार से पहले सदस्य बने शरद जैन से 37500, वीरेंद्रसिंह से 28500, राधा यादव से 31500, दिगंबर जैन यंग ग्रुप से 52500 और सुमित कैलाश नाहर से 50 हजार रूपए लेने के बाद भी संस्था ने डिफाल्टर घोषित कर दिया गया।
किसके नाम कौन-सा प्लॉट
सुदर्शन गुप्ता
पिता- इंदरमल गुप्ता
पता- 4/5, महेशनगर
सदस्यता- 18 मई 2006
जमा राशि-विकास शुल्क- 15 हजार
आवंटित प्लॉट नं. 153/अव
रजिस्ट्री/तारीख- 4371/2 मार्च 2005
शकुंतला गुप्ता (गुप्ता की पत्नी)
पिता- वल्लभदास गुप्ता
पता- 4/5, महेशनगर
सदस्यता ली- 18 मई 2006
जमा राशि-विकास शुल्क- 15 हजार
आवंटित प्लॉट नं. 156/अव
रजिस्ट्री- 4296/26 फर. 2005
इसलिए सौदे में गड़बड़ी
* किसी संस्था में परिवार का एक ही व्यक्ति प्लॉट ले सकता है। यहां अपने, पत्नी व मां के नाम कई हैं।
* पत्नी की पहचान छुपाई। पति के बजाय ससुर का नाम लगाया।
* स्वयं के आगे पिता का नाम इंदरमल गुप्ता, वहीं मां के नाम के आगे इंद्रदेव आर्य।
सुदर्शन से सवाल-जवाब
-- आपने संस्था से कोई प्लॉट खरीदा था?
हां, 15-20 साल पहले। हाथोहाथ बेच दिया।
-- कहां खरीदा था?
याद नहीं।
-- सरस्वती संस्था में खरीदा था?
किसकी है यह संस्था?
-- अग्रवाल बंधुओं की?
नहीं, मैंने तो रि-सेल में खरीदी।
-- रजिस्ट्री 2005 में हुई, सदस्य 2006 में बने?
रि-सेल में खरीदा। 2005 में रजिस्ट्री कराई, फिर नाम ट्रांसफर कराया और सदस्यता ली।
-- कितने प्लॉट लिए थे?
बस एक।
-- दस्तावेजों में पत्नी के नाम पर भी प्लॉट है?
उन्होंने भी रिसेल में लिया होगा।
-- किससे खरीदे प्लॉट?
पूरे दस्तावेज थे। ओरिजनल जिससे खरीदा उसे दे दिए। फोटोकॉपी संस्था को दे दी।
-- आपकी माताजी के नाम पर भी प्लॉट हैं?
हां, तो हम अलग रहते हैं और माता-पिता अलग। वे तो ले सकते हैं।
-- सभी प्लॉट बेच दिए?
हां। पैसों की जरूरत पड़ी तो बेच दिए।
-- किसे बेचे।
किसी माहेश्वरी को।
-- नियमानुसार संस्था से खरीदा प्लॉट दस साल से पहले नहीं बेचा जा सकता।
मैंने संस्था से नहीं खरीदा था।
-- संस्था के खाते में प्लॉट पेटे 15-15 हजार रूपए जमा हैं?
वह नामांतरण के लिए दिए थे।
सुदर्शन गुप्ता, विधायक
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