Friday, April 9, 2010

नियंत्रण अघिकारियों ने ही तोड़े नियम

इंदौर। गृह निर्माण संस्थाओं द्वारा की गई जमीन की अफरा-तफरी और धांधलियां उजागर होने के बाद पीडित सदस्यों को प्रशासन के प्रयासों से न्याय की उम्मीद तो जागी, पर एक प्रश्न भी सबके मन में उठ रहा है कि वर्षो से जारी इन धांधलियों के खिलाफ सहकारिता विभाग ने क्या किया? इसका जवाब विभाग की कागजी कार्रवाई को देखकर ही मिल जाता है। सहकारिता अधिनियम की विभिन्न धाराओं में संस्थाओं पर हुई कार्रवाई का फायदा धांधलीबाज कर्ताधर्ताओं को ही प्राप्त हुआ। कहने को तो सहकारिता विभाग ने सैकड़ों संस्थाओं पर नियंत्रण अधिकारी नियुक्त किए, पर इन्होंने कार्रवाई करने के बजाए धांधलियों पर पर्दा डाला और दोषी संचालकों को संरक्षण दिया।

पड़ताल में चौंकाने वाली जानकारी
"पत्रिका" पड़ताल में खुलासा हुआ कि वर्ष 2009 तक कुल 176 संस्थाओं पर नियंत्रण अधिकारी नियुक्त किए गए। इन अधिकारियों ने पीडित सदस्यों के हित में काम करना तो दूर की गई कार्रवाई की जानकारी से अपने ही महकमे को दूर रखा। कायदे से इन नियंत्रण अधिकारियों को तीन महीने में संस्था के चुनाव करवाना थे। नहीं करवाने पर संस्था की रिपोर्ट आला अफसरों और शासन को भेजना थी। अधिकारियों का यही व्यवहार गृह निर्माण संस्थाओं में हुई धांधलियों की शुरूआत मानी जा सकती है। सदस्यों की शिकायतों के बाद भी नियंत्रण अधिकारी वर्षो से संस्थाओं में जमे हैं।

मिलीभगत से तय होते रिसीवर
संस्थाओं पर नियंत्रण अधिकारी नियुक्त करना और करवाना दो प्रमुख खेल सहकारिता विभाग में होते हैं। जिन संस्थाओं को प्रमुख रूप से दर्शाया गया है उनमें मिलीभगत के साथ नियंत्रण अधिकारियों की नियुक्ति होना सामने आया है। विभाग के जानकारों के मुताबिक असिमित धांधलियों को
करने वाले संस्थाओं के कर्ताधर्ता कार्रवाई से बचने के लिए यह खेल खेलते हैं। इनमें से काफी संस्थाओं के तो अनुबंध प्राधिकरण के साथ है और उन्हें भूखंड भी मिलने वाले हैं। सदस्यों को बरगलाने के लिए भी सारा षड्यंत्र रचा गया।

इन धाराओं में हुई कार्रवाई
सहकारिता विभाग ने 176 संस्थाओं पर धारा 49(8) के तहत कार्रवाई करते हुए अपने अधिकारियों को नियंत्रण अधिकारी नियुक्त कर दिया। नियमानुसार इन अधिकारियों को तीन माह में निर्वाचन प्रक्रिया पूरी कर बोर्ड का गठन करना था। कुल 176 संस्थाओं में 27 ऎसी हंै जिनमे वर्ष 2002 से 06 के मध्य नियंत्रण अधिकारी बनाए गए। 30 संस्थाओं में वर्ष 2007 में तथा शेष संस्थाओं में 2008 और 09 में नियंत्रण अधिकारी नियुक्त किए गए। इसी प्रकार धारा 53(1), 53(2) और धारा 53 (10) के अंतर्गत 24 गृह निर्माण संस्थाओं पर प्रभारी नियुक्त हैं।

विकास जैन को जमानत
इंदौर। विकास अपार्टमेंट संस्था मामले में कोर्ट ने आरोपी विकास जैन को जमानत दे दी। गौरतलब है कि उस पर करोड़ों रूपए की जमीन सस्ते दामों में खरीदने का आरोप है। बुधवार को उसके वकील की ओर से जमानत के लिए अर्जी लगाई गई। इस पर कोर्ट ने उसे एक लाख रूपए नकद जमा करने व 50 हजार रूपए की जमानत व इतने ही मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।

संस्थाएं और प्रभारी अधिकारी
आकाश गृह निर्माण— जीडी परिहार
श्रीरामकृपा— आरएस शर्मा
दीप्ति — आनंद खत्री
प्रेस्टीज— केवी विजयवर्गीय
सिद्धि विनायक— डीके शर्मा
पद्माशीष— एचएस तिवारी
शिखर— अश्विनी राणे
शेल्टर— बीएस भंवर
साक्षी— पवन अग्रवाल
उमेश नगर— संतोष जोशी
आनंदबाग— रमेश पेंढारकर
अतिशा— विनोद वर्मा
बिहार— केके जमरे
बीशानगर— विनोद रावल
भंवरराज— आरके गुप्ता
राहुल— आनंद खत्री
श्री महादुर्गा— पीसी सोलंकी
श्री कुशल— केवी विजयवर्गीय
शिवानी— एसएल वास्केल
सांईशरण— आरसी सेन
शुभाशीष— एसएल वास्केल
कारसदेव— डीके शर्मा
पयोधी— संतोष जोशी
गजानंद — प्रमोद तोमर
व्यंकटेश नगर— एचएस तिवारी
श्री तपन— एसएल वास्केल
अनमोल— आईडी सराफ
तृष्णा— आरबी कनकने
लीलादेवी — केवी विजयवर्गीय
लक्ष्मणनगर— संतोष जोशी

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