विनोद शर्मा Tuesday, May 05, 2009 01:26 [IST]
इंदौर. इंदौर के सूखे कंठ को राहत देने की क्षमता रखने वाले बिलावली तालाब की सेहत सुधारने में नगर निगम की बिलकुल रुचि नहीं दिखती। यदि ऐसा होता तो तालाब के चौड़ीकरण, गहरीकरण और सौंदर्यीकरण के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण की 15 करोड़ की योजना चार साल तक स्वीकृति के लिए यूं ही धूल नहीं खाती रहती। अब हालांकि नगर निगम प्राधिकरण के साथ मिलकर काम करने की मंशा जता रहा है, लेकिन उसकी अनदेखी के चलते पानी की जो किल्लत शहर ने झेली है उसकी भरपाई कैसे हो पाएगी।
अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे बिलावली तालाब के संरक्षण के लिए प्राधिकरण ने 2004-05 में विस्तृत योजना तैयार की थी। उस वक्त निगम ने उसके प्रस्ताव को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि तालाब निगम के हैं और उनकी देखभाल के लिए वह सक्षम है। इसके बाद निगम ने योजना बनाकर उसे अंजाम देना तो दूर तालाब और चैनल की नियमित सफाई करना भी बंद कर दिया। दिनों-दिन बढ़ती तालाबों की बदहाली व गहराते जलसंकट को देखते हुए प्राधिकरण ने नए सिरे से योजना बनाना शुरू कर दिया है।
इस संबंध में प्राधिकरण अध्यक्ष मधु वर्मा ने बताया हमारे पास 15 करोड़ की योजना तैयार है। योजना के तहत बड़ा बिलावली-छोटा बिलावली- मुंडी-राऊ तालाब की आगम क्षेत्र के साथ जलसंग्रहण क्षेत्र को व्यवस्थित करेंगे। स्वीकृति की उम्मीद के साथ योजना दोबारा नगर निगम को सौंपेंगें।
क्यों जरूरी है योजना
बायपास बनने के बाद बड़ा बिलावली तालाब में पानी की आव पहले ही कम हो चुकी थी। दो-तीन वर्षो में ग्रामीणों ने उस राऊ-निहालपुर और बिलावली चैनल को भी नहीं बख्शा जो राऊ की पहाड़ियां का बरसाती पानी तालाब तक पहुंचाती थी। सफाई की कमी और अतिक्रमण ने चैनल की उपयोगिता के साथ तालाब के जलस्तर को भी समेटकर रख दिया। छह साल पहले महापौर कैलाश विजयवर्गीय ने राऊ से बिलावली पैदल यात्रा करके गाद और चैनल के अवरोध दूर करने का आश्वासन दिया था। निगम ने वर्षो से चैनल की सफाई नहीं की और न ही अतिक्रमण हटाए।
कैसी है चैनल
तालाबों के चैनल में कुल छह तालाब और अंत में नहरभंडारा (खान नदी) आती है। राऊ की पहाड़ियों का पानी नाले के माध्यम से राऊ के छोटे तालाब में जमा होता है। यहां से एबी रोड पार करते हुए निहालपुर स्थित मुंडी तालाब पहुंचता है। मुंडी भरने के बाद पानी बड़ा बिलावली और वहां से ओवरफ्लो होकर छोटे बिलावली में जाता है। इसके पाद पानी पीपल्यापाला में जमा होता है और वहां से नहरभंडारा (खान नदी) में जाता है। खंडवा रोड के दूसरी ओर स्थित लिंबोदी तालाब भी इस चैनल का एक हिस्सा है। जहां रालामंडल की पहाड़ियों का पानी जमा होता है और ओवरफ्लो होकर बड़े बिलावली तालाब में पहुंचता है।
15 इंच बरसात में लबालब होगा पीपल्यापाला
- दो दिशाओं में डल रही दो किलोमीटर लंबी लाइनों से तालाब पहुंचेगा बरसाती पानी
- 50 लाख खर्च होंगे
इंदौर में अल्पवर्षा का दौर आगे भी यूं ही जारी रहता है तो भी पीपल्यापाला तालाब शहरवासियों को लबालब भरा ही नजर आएगा। इसके लिए इंदौर विकास प्राधिकरण आसपास की कॉलोनियों-बस्तियों में व्यर्थ बहने वाले बरसाती पानी को सहेजकर तालाब तक पहुंचाएगा। योजना के तहत दो दिशाओं में तकरीबन दो किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई जा रही है।
उम्र का सैकड़ा पर कर चुके पीपल्यापाला तालाब को रीजनल पार्क की शक्ल देने के साथ ही प्राधिकरण ने उसका हलक बारहों महीने गिला रखने की कवायद भी शुरू कर दी है। इसके लिए पहले तालाब को पूरा भरा जाएगा और बाद में इंटरनल चैनल बनेगी जिससे पानी तालाब से निकलकर गार्डन होते हुए दोबारा तालाब पहुंचेगा।
कैसे भरेगा तालाब
प्राधिकरण अध्यक्ष श्री वर्मा और सीईओ प्रमोद गुप्ता के अनुसार रिंग रोड (पीपल्याराव) स्थित प्रतिक्षा ढाबे और जीतनगर सहित आसपास की दूसरी बस्तियों को तालाब तक जोड़ने के लिए तकरीबन एक किलोमीटर लंबी लाइन डाली जा रही है। लाइन बरसात के दौरान उस पानी को तालाब तक पहुंचाएगी जो अभी रिंग रोड और बस्तियों से नालों में बह जाता है।
दूसरी लाइन मां विहार कॉलोनी से एमआर-3 और आसपास की बस्तियों को तालाब से जोड़ने के लिए डाली जा रही है। इसकी लंबाई 900 मीटर है। मां विहार तक बस्तियां और ढालू जमीन है। यहां का जो बरसाती पानी अब तक नहरभंडारे के नाले में जाता था अब उसे तालाब पहुंचाया जाएगा।
तैयार है तस्वीर बदलने की रूपरेखा
क्या-क्या होगा
* राऊ-बिलावली और बिलावली-पीपल्यापाला चैनल को गाद निकालकर दोगुना तक चौड़ा करेंगे।
* राऊ तालाब के साथ मुंडी तालाब को गहरा करके उनकी मजबूती बढ़ाएंगे।
* बड़े बिलावली की मोरी को व्यवस्थित करेंगे।
* छोटा बिलावली तालाब की दरकती पाल भी ठीक करेंगे।
* सौंदर्यीकरण के लिए पाल के आसपास पौधारोपण भी प्रस्तावित है।
हमने कभी मना नहीं किया
प्राधिकरण की योजना अच्छी है और वह काम करने के लिए स्वतंत्र है। हमने शहरहित से जुड़ी प्राधिकरण की किसी भी योजना को नामंजूर नहीं किया। इसका बड़ा उदाहरण है शहरी क्षेत्र में उनके द्वारा बनाई जाने वाली सड़कें।
-डॉ. उमाशशि शर्मा, महापौर
साथ काम करने के लिए तैयार हैं
प्राधिकरण की पहली योजना मेरे प्राधिकरण सीईओ रहते ही तैयार की गई थी। अब यदि तालाबों के विकास संबंधित कोई योजना प्राधिकरण से मिलती है तो हम उनके साथ काम करने के लिए तैयार हैं। हमें इस संबंध में कोई ऐतराज नहीं।
-सी.बी.सिंह, निगमायुक्त
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