
इंदौर। सुगनीदेवी कॉलेज परिसर की जिस तीन एकड़ जमीन में लोकायुक्त जांच के आदेश हुए हैं, उसकी कीमत 100 करोड़ है। धनलक्ष्मी केमिकल इंडस्ट्रीज ने यह जमीन रमेश मेंदोला की नंदानगर साख सहकारी संस्था को महज 1.38 करोड़ रूपए में बेचा था। इस सौदे में तत्कालीन महापौर कैलाश विजयवर्गीय पर महापौर परिषद (एमआईसी) के रास्ते मदद का आरोप है।
धनलक्ष्मी के भागीदार विजय नगीन कोठारी और मनीष रमणीकभाई संघवी थे, जिन्होंने पहले सरकार से 2400 रूपए साल की लीज पर जमीन ली और बाद में मेंदोला से सौदा किया। इसी कारण से चारों के खिलाफ कोर्ट ने लोकायुक्त जांच के आदेश दिए हैं। यह बात पूर्व मंत्री व परिवादी सुरेश सेठ ने शनिवार को मीडिया से कही। उनके एडवोकेट राजेंद्र शर्मा ने पुष्टि के लिए दस्तावेज भी उपलब्ध करवाए, जिससे कई तथ्य उजागर होते हैं।
गड़बड़ी की कड़ी दर कड़ी
कड़ी 1
13 नवंबर 1980 को आवास एवं पर्यावरण मंत्री रहते हुए सुरेश सेठ ने सुगनीदेवी कॉलेज परिसर की शासन की लीज की आठ में से तीन एकड़ जमीन धनलक्ष्मी केमिकल इंडस्ट्रीज को 30 साल के उपयोग के लिए 2400 रूपए वार्षिक लीज पर दी।
कड़ी 2
तत्कालीन महापौर कैलाश विजयवर्गीय की परिषद बनते ही 10 हजार वर्गफीट जमीन पर धनलक्ष्मी केमिकल ने मल्टी तान दी।
कड़ी 3
6 अक्टूबर 2004 को एमआईसी ने जमीन को रमेश मेंदोला की नंदानगर साख सहकारी संस्था को बेचने की अनुमति दी।
कड़ी 4
जुलाई 2007 में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के उपसचिव नरेश पाल ने निगमायुक्त को कई बिंदुओं पर आपत्तियां जताते हुए नंदानगर संस्था को जमीन देने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
अब उठ रहे ये पांच सवाल*
सरकार ने जमीन हस्तांतरण की अनुमति नहीं दी, इसलिए अभी संस्था का कब्जा कानूनी नहीं है। क्या सरकार अतिक्रमण हटाएगी?
* क्या लोकायुक्त तय समय 6 जुलाई 10 तक रिपोर्ट पेश कर पाएगी?
* निगमायुक्त समेत जिस-जिस अफसर ने मामले को दबाए रखा, क्या उनके खिलाफ सरकार कोई त्वरित कार्रवाई करेगी?
* धनलक्ष्मी संचालकों से क्या वसूली की कार्रवाई होगी?
* कॉलेज समेत समस्त आठ एकड़ जमीन की लीज 13 नवंबर 2010 को समाप्त होगी। क्या सरकार इसके बाद इसे अपने हाथ में लेगी?
घपला क्यों?
लीज की जमीन को कोई भी व्यक्ति या संस्था किसी को बेच नहीं सकती। अत: एमआईसी की मंजूरी और धनलक्ष्मी केमिकल द्वारा सौदा किया जाना अवैध था।
कैलाश सेे मांगा इस्तीफा"
मुख्यमंत्री बताएं सिंहस्थ, पेंशन, इंदौर नवरतन बाग भूमि घोटाले सहित अन्य मामलों में कदाचरण मामला सिद्ध होने के बाद भी विजयवर्गीय को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है। उनसे इस्तीफा लेना चाहिए।"
- केके मिश्रा, प्रवक्ता, प्रदेश कांग्रेस
भाजपा ने कहा जांच होने दो
"मामला न्यायालय का है। जल्द ही दूध का दूध-पानी का पानी हो जाएगा। संगठन स्तर पर इस मामले में कोई बात नहीं हुई। इसलिए अभी इस पर कुछ नहीं कह सकते।"
- नरेंद्र सिंह तोमर, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा
"मेरे महापौर पद के कार्यकाल में सिर्फ नामांतरण की कार्रवाई हुई है। निर्णय निगम परिषद का था। मुझ पर और भी आरोप लगे हैं। कोर्ट ने जांच का आदेश दिया है। अब जांच हो जाने दीजिए। इसके बाद ही कुछ कह सकेंगे। "
- कैलाश विजयवर्गीय, उद्योग मंत्री
उक्त सौदे पर सहमति कांग्रेस के शासनकाल में ही पक्ष-विपक्ष के समक्ष दी गई। इसके लिए निगम ने बाकायदा अनुमति दी जिसके प्रमाण हैं। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से भी अनुमति ली गई।
- रमेश मेंदोला, विधायक
कड़ी 1
ReplyDelete13 नवंबर 1980 को आवास एवं पर्यावरण मंत्री रहते हुए सुरेश सेठ ने सुगनीदेवी कॉलेज परिसर की शासन की लीज की आठ में से तीन एकड़ जमीन धनलक्ष्मी केमिकल इंडस्ट्रीज को 30 साल के उपयोग के लिए 2400 रूपए वार्षिक लीज पर दी।
क्या यह पता करना उचित नही होगा कि धनलक्ष्मी केमिकल इंडस्ट्रीज से पहले यह जमीन किसके नाम पर थी और किन नियमो के तहत यह जमीन धनलक्ष्मी को दी गयी, और धनलक्ष्मी ने कितना भुगतान किया ?
धनलक्ष्मी को इस जमीन पर भवन बनाने की अनुमति कब दी गयी