इंदौर। जमीन की जालसाजी में कर्मचारी राज्य बीमा निगम के कुछ अफसरों ने भू-माफियाओं को भी पीछे छोड़ दिया। इंदौर के नंदानगर क्षेत्र में एमआर-9 और एमआर-10 के बीच सरकार से 109 एकड़ जमीन निगम को सशर्त दी थी, लेकिन अफसरों ने 22 एकड़ से ज्यादा जमीन एक रूपए वर्गफीट लीज पर दो गृह निर्माण संस्थाओं के नाम कर डाली। लगभग तीस करोड़ रूपए बाजार भाव की जमीन की लिखा-पढ़ी भी पांच-पांच रूपए के स्टॉम्प पर है। संस्था अध्यक्षों के साथ निगम के तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक वीरेंद्र नागर का नाम दर्ज हैं।
दोनों संस्थाएं निगम के अघिकारियों-कर्मचारियों की हैं, जिन्होंने गैर सदस्यों को भी प्लॉट दे रजिस्ट्रियां करा दीं। शिकायत पर जिला पंजीयक ने लीज शर्तो का उल्लंघन मान रजिस्ट्री निरस्त कराने के लिए कोर्ट की सलाह दी। नंदानगर से लगी भमौरी दुबे की 109 एकड़ जमीन कर्मचारी राज्य बीमा निगम (कराबीनि) इंदौर को प्रदेश सरकार ने 5 अक्टूबर 1962 को 90 साल की लीज पर दी थी।
जमीन श्रमिकों के कल्याण, चिकित्सा सेवाएं, निगम दफ्तर व कर्मचारी आवास में काम आना चाहिए, लेकिन अफसरों ने जमीन का लगभग चौथाई हिस्सा तीन लीज डीड से कराबीनि योजना कर्मचारी और कराबीनि कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी संस्था को सौंप दिया। न प्रदेश सरकार की मंजूरी ली, न संस्थाओं ने ही जमीनों की रजिस्ट्री कराई। संस्थाओं ने इस जमीन पर सत्यम विहार और सुयश विहार कॉलोनी विकसित की। एडवोकेट मुकेश देवल के मुताबिक जमीन निगम की मिल्कियत नहीं, नामांतरित की गई है। ऎसे में निगम को स्टाफ के लिए सरकारी आवास ही बनाना थे, लेकिन जमीन संस्थाओं को सौंप दी। कानूनन जमीन लीज पर लेने वाला उसे किसी और को दोबारा लीज पर नहीं दे सकता।
नजूल ने भी थमाए नोटिस
शिकायत मिलने पर 6 मई 2009 को नजूल अघिकारी ने निगम के डायरेक्टर और दोनों संस्थाध्यक्षों को कारण बताओ नोटिस देकर तीन दिन में जानकारी मांगी थी। 21 जुलाई 2009 को दूसरा नोटिस भी दिया और पूछा निगम ने जमीन को फ्रीहोल्ड संपत्ति कैसे मान लिया?
कोर्ट की शरण लें
इसकी शिकायत किसी किशोर कुमार ने जिला पंजीयक को की तो 6 जनवरी 2010 को कोर्ट की शरण लेने की सलाह दी गई। साथ में स्पष्ट किया एक साल से ज्यादा के लिए दिए पट्टे के दस्तावेज की रजिस्ट्री कानूनन अनिवार्य है। विक्रेता अचल संपत्ति का इस्तेमाल शर्तो के आधार पर ही करेगा।
लीज उल्लंघन का मामला
मामला लीज के उल्लंघन का है। पंजीकृत दस्तावेज निरस्त करने का अधिकार रजिस्ट्रार कार्यालय को नहीं है, इसलिए शिकायतकर्ता को कोर्ट में अपील करने की सलाह दी गई।
- डॉ. श्रीकांत पांडे, जिला पंजीयक
जो भी हुआ, बहुत पुराना है। तत्कालीन अधिकारियों ने कानून देखकर ही यह काम किया होगा। मुझे जहां तक जानकारी है मुख्यालय से अनुमति लेने के बाद ही जमीन लीज पर दी है। कुछ गलत हुआ है तो प्रशासन की जांच में खुलासा हो जाएगा। ऎसा हुआ तो हम भी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। जरूरत पर पेनल्टी भी लगाएंगे। लीज डीड दिल्ली मुख्यालय में है। क्या शर्तेü थी यह दस्तावेज देखने के बाद ही बता पाएंगे।
- एके मुखोपाध्याय, क्षेत्रीय निदेशक, कराबीनि
No comments:
Post a Comment