इंदौर. ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की खरीदी और बिक्री के दौरान अब कोई भी धोखाधड़ी नहीं कर सकेगा। एक क्लिक करते ही खसरा नंबर और भू-उपयोग के साथ जमीन की जानकारी कम्प्यूटर स्क्रीन पर होगी। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने पहले चरण में शहर सीमा से लगे 90 गांवों को ऑनलाइन करना शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन के सहयोग से 25 गांवों की जानकारियां एकत्र की जा चुकी हैं।
पहले चरण में शहर सीमा से लगे उन 90 गांवों की जानकारी जुटाई जा रही है जो मास्टर प्लान-2021 का हिस्सा हैं। इसमें सांवेर रोड तरफ भौंरासला, कुम्हैड़ी, बरदरी, रेवती, जाख्या, भांग्या, भानगढ़, शक्कर खेड़ी और नेमावर रोड तरफ देवगुराड़िया, बिचौली, सनावदिया और दुधिया सहित 25 गांवों का मसौदा तकरीबन तैयार है। इसमें मिल्कियत व क्षेत्रफल सहित जमीन का सर्वे नंबर, खसरा नंबर और उसके भू-उपयोग संबंधी सभी जानकारियां होंगी। जमीन को लेकर राजस्व विभाग में चल रहे विवाद भी इसमें शामिल हैं। गांव की प्रस्तावित सड़कें और उनकी सेंट्रल लाइन भी मसौदे में शामिल होगी।
ऑनलाइन व्यवस्था की कमान पूरी तरह विभाग के संयुक्त संचालक विजय सावलकर ने संभाल रखी है। उन्होंने बताया लोगों को जमीन संबंधी धोखाधड़ी से बचाने के लिए व्यवस्था पर काम कर रहे हैं। मौका मुआयना कर, गूगल अर्थ और राजस्व विभाग के सहयोग से जानकारियां इकट्ठा कर रहे हैं। तीस फीसदी जानकारियां एकत्र हैं बाकी काम भी दो-तीन महीने में पूरा हो जाएगा।
सड़कें होंगी गांव से बाहर
प्रस्तावित सड़कें बनाने के लिए अब ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षो पुराने मकान तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। टीएंडसीपी के अधिकारियों की मानें तो नई सड़कों को गांव के बाहर से निकालने की तैयारी चल रही है। इस संबंध में एमपीटीएंडसीपी संचालक से भी सहमति ली जाएगी।
हरे-भरे होंगे तालाब और नाले
टीएंडसीपी तालाब और नालों के संरक्षण पर खासा जोर दे रहा है। प्लान के अनुसार तालाबों के आसपास की तीस मीटर जमीन ग्रीन एरिया होगी। वहीं नालों के दोनों ओर नौ-नौ मीटर का क्षेत्र हराभरा होगा। श्री सावलकर ने बताया हमारी कोशिश है कि अब कोई भी तालाब या नाला भू-माफियाओं की भेंट न चढ़े।
कैसे जुटाएंगे जानकारी
इंटरनेट पर टीएंडसीपी की साइट खोलना होगी। इसमें होम पेज पर ही रिकॉर्ड सर्च का ऑप्शन है। इसमें गांव का नाम या खसरा नंबर डालकर जमीन की जानकारी निकाली जा सकेगी। अभी तक शुल्क देकर सूचना के अधिकार में जानकारी जुटाना पड़ती थी। विभाग के चक्कर काटना पड़ते थे सो अलग। साइट पर जानकारी नि:शुल्क मिलेगी।
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