Monday, April 12, 2010

जमीन के जालसाज नहीं आ रहे बाज



इंदौर। जमीन के दर्द को लेकर दो महीने से जारी जन-अभियान और उसे मिले पुलिस-प्रशासनिक समर्थन के बाद भी जमीन के जालसाजों के हौसले बुलंद हैं। हालत यह है कि इसी दौरान खजराना में तीन अवैध कॉलोनियां काट दी गई। शिकायत मिलने के बाद मौके पर पहुंचा निगम का दस्ता बगैर कार्रवाई यह कहकर लौट आया कि अभी निर्माण नहीं हुआ है, सिर्फ रंगोली डली है। हालांकि यहां प्लॉटों की बिक्री जारी है।

तीन कॉलोनी, 400 से ज्यादा प्लॉट : खजराना में पहले ही 150 से ज्यादा अवैध कॉलोनियां हैं। निगम न इनका नियमितिकरण कर पाया और न ही नई अवैध कॉलोनियों पर अंकुश लगा पाया। इसका नतीजा है कि यहां अवैध कॉलोनियां कटती जा रही है। बीते दिनों शहंशाह सूरी नगर के पीछे दो कॉलोनी काटी गई। तीसरी कमाल कम्यूनिटी हॉल के पास। तीनों में 400 से ज्यादा प्लॉट हैं। कॉलोनाइजर रंगोली डालकर प्लॉट बेच रहे हैं। किसी ने पूरी कीमत तो किसी ने बुकिंग राशि अदा कर प्लॉट अपने नाम भी करा लिए हैं।

अब पुलिस का काम
"पंचनामा बनाकर कॉलोनाइजरों की नामजद शिकायत थाने पर की थी। हम शिकायत कर सकते हैं। मुकदमा दर्ज करना पुलिस का काम है।"
- राकेश शर्मा, भवन अधिकारी-साकेतनगर जोन

जानकारी नहीं मिली
"कॉलोनियों के बारे में मुझे न कोई शिकायत मिली और न ही जोन से कोई रिपोर्ट। गुरूवार को मौका दिखवाकर कार्रवाई करेंगे।"
- लता अग्रवाल, उपायुक्त कॉलोनी सेल

चार महीने में दें प्लॉट
इंदौर। जमीन के दर्द से दु:खी परिहार परिवार को 17 साल बाद अपना हक मिला तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उपभोक्ता फोरम ने परस्पर कॉलोनी, वीआईपी में ही प्लॉट देने के साथ महात्मा गांधी गृह निर्माण संस्था को चार महीने में रजिस्ट्री कराने के भी आदेश दिए हैं। संस्था के सदस्य छावनी निवासी मनीष परिहार ने परस्पर कॉलोनी वीआईपी में 25 नवंबर 1991 को 28,500 रूपए देकर 1500 वर्गफीट का प्लॉट आरक्षित कराया था। इसके 1,74,726 रूपए जमा कराने के बाद भी संस्था ने प्लॉट आवंटित नहीं किया।

डिफाल्टर बता दिया था : संस्था का तर्क था कि परिवादी डिफाल्टर सदस्य है। उसने समय पर राशि जमा नहीं कराई, इसके चलते उसकी वरीयता व प्लॉट की पात्रता खत्म हो चुकी है। बाद में इसकी विवेचना के दौरान संस्था ने तर्क दिया कि परिवादी आवश्यक विकास व्यय व ब्याज जमा कराने को तैयार है तो वह प्लॉट देने को राजी है। फोरम ने आदेश दिया कि संस्था इंदौर विकास प्राधिकरण के लॉ ऑफिसर से विचार-विमर्श करे। परिवादी से बकाया विकास शुल्क लेकर परस्पर कॉलोनी, वीआईपी में प्लॉट की रजिस्ट्री कराई जाए। यह प्रकिया चार महीने में पूरी हो जाना चाहिए। फोरम ने परिहार को हुए मानसिक कष्ट के लिए पांच हजार तथा परिवाद व्यय के एक हजार रूपए भी चुकाने का आदेश दिया।

विनोद शर्मा

No comments:

Post a Comment