Monday, April 12, 2010

फर्जी संस्थाएं काट रही हैं कॉलोनियां


विनोद शर्मा.
इंदौर. शहर में ऐसी भी कुछ हाउसिंग सोसायटियां हैं जो बगैर पंजीयन के आधे-अधूरे अनुबंधों के साथ कॉलोनियां काट रही हैं। इससे बेखबर सहकारिता विभाग की मानें तो सोसायटियों से उसका दूर तक वास्ता नहीं है। कार्रवाई के लिए पुलिस-प्रशासन स्वतंत्र है।

इन तथ्यों का खुलासा उस समय हुआ जब नगर निगम के कॉलोनी सेल उपायुक्त ने आलोकनगर को अवैध बताकर 22 जु़लाई को संयोगितागंज थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराई। मूसाखेड़ी क्षेत्र के पार्षद दिलीप कौशल की शिकायत पर दर्ज कराई गई रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया था कि कॉलोनी अवैध है। कॉलोनी काटने वाली संस्था के.एन. गृहनिर्माण सहकारी संस्था का सहकारिता विभाग से कोई वास्ता नहीं है।


patrika ने मामले की पड़ताल की तो पता चला के.एन. गृह निर्माण संस्था ही नहीं बल्कि ऐसी चार संस्थाएं हाउसिंग सोसायटी के नाम पर अवैध कॉलोनियां काट रही हैं। इनमें डायमंड गृहनिर्माण सहकारी संस्था, हरिओम गृहनिर्माण सहकारी संस्था और हरिओम पन्नानगर शामिल हैं।


सहकारिता विभाग की मानें तो के.एन. गृहनिर्माण, हरिओम गृहनिर्माण और हरिओम पन्नानगर पंजीकृत नहीं हैं। डायमंड गृहनिर्माण सहकारी संस्था पंजीकृत थी लेकिन पांच वर्ष पहले उसका पंजीयन निरस्त किया जा चुका है। बहरहाल संस्था में परिसमापक नियुक्त हैं। परिसमापक जी.डी. परिहार ने बताया मैं चौथा परिसमापक हूं। संस्था आज भी मृत है।




फर्जी स्टाम्प और फर्जी नोटरी
जिन स्टाम्प्स पर संस्थाओं द्वारा नोटरी की गई उस पर सिर्फ संस्था का नाम है। सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने बताया मयूरनगर क्षेत्र की प्रमुख विवादित कॉलोनी है। इसकी जांच के दौरान कॉलोनाइजर के पास से प्रिंटिंग मशीन, फर्जी स्टाम्प और स्टाम्प वेंडरों की सील बरामद हुई थी। प्रथम दृष्टया ये स्टाम्प भी फर्जी नजर आ रहे हैं।

मुश्ताक के खिलाफ 420 का मुकदमा दर्ज
गुलजार कॉलोनी की रजिया पति हुमाह शेख की शिकायत पर संयोगितागंज पुलिस ने 30 जुलाई की रात 11.40 बजे कॉलोनाइजर मुश्ताक के खिलाफ 420 का मुकदमा दर्ज किया। फरियादी ने उन पर पैसा लेकर भी प्लॉट न देने का आरोप लगाया था।

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