Friday, April 9, 2010

खेत किसी का कॉलोनी किसी और की

इंदौर। कुम्हेड़ी ग्राम निवासी लक्ष्मीनारायण व्यास की एमआर-10 रोड से लगे प्रकाशनगर के पास आठ बीघा जमीन है जहां गेंहू की फसल लहलहा रही है। सप्ताहभर से लोग खेत पर जाते हैं और फसल कब निकलेगी यह पूछकर लौट जाते हैं। लोगों की आवाजाही देख वे दंग रह गए। तहकीकात की तो पता चला भूमाफिया उनके खेत को कॉलोनी बताकर प्लॉट बेच चुके हैं और खरीदारों को कब्जे के लिए फसल निकलने का इंतजार है। श्री व्यास पहले तो घबरा गए लेकिन दस्तावेज दिखाने के बाद वकील से मिले आश्वासन के बाद उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस कंट्रोल रूम पर भी की। हालांकि कार्रवाई कुछ नहीं हुई।
सिर्फ श्री व्यास ही नहीं, आधा दर्जन से अधिक ऐसे किसान हैं जिनकी करोड़ों की जमीनों का किसी ने बाले-बाले ही सौदा कर दिया लेकिन उन्हें भनक तक नहीं लगी। पता भी लगा तो उस वक्त जब प्लॉट खरीदने वाले खेत पर कब्जा लेने पहुंच गए। बैठे-बठाए बेवजह की परेशानी ऐसे गले पड़ी कि कभी वकीलों के तो कभी अधिकारियों के चक्कर काटना पड़ रहे हैं। श्री व्यास ने बताया खेत पर लोगों की आवाजाही दो-तीन महीने से जारी थी लेकिन न कभी मैंने उनसे बात की न ही कभी उन्होंने मुझसे। जमीन के पुश्तैनी दस्तावेज हैं इसलिए कभी पूछताछ की आवश्यकता नहीं पड़ी। लोग कब्जा लेने आए तो पता चला जमीन का सौदा हो चुका है। मामले की शिकायत हीरानगर थाने के साथ एसपी ऑफिस पर भी कर दी है। दूसरा मामला भांगिया ग्राम पंचायत और उसके सरकारी कांकड़ से लगी जमीनों का है। इंद्रपाल सिंह यादव, अशोक यादव और भीमसिंह पिता मानसिंह (कॉलोनाइजर) ने कांकड़ के साथ कॉलोनी बताकर इस जमीन को भी बेच दिया। असल में यह जमीन भांगिया निवासी राजेंद्र दुबे की है जबकि 12 बीघा लंबे-चौड़े कांकड़ की कुछ जमीन सेवाभूमि के रूप में चौकीदार और कुछ भांगिया निवासी बौंदरजी मंडोलिया और नाथूलाल को पट्टे पर उपयोग के लिए प्रशासन ने दी थी। कॉलोनाइजर और उसके समर्थकों का कहना है कि जमीन उन्होंने पांच लाख रुपए में खरीदी थी। दूसरी ओर श्री दुबे का कहना है मुंह उठाकर किसी की जमीन को अपनी बता देने से वह अपनी नहीं होती। जमीन का किसी के साथ कोई सौदा नहीं हुआ। कॉलोनाइजर ने प्लॉट के नाम पर लोगों को ठगा है। सौदे की बात सिरे से खारिज करते हुए बौंदरजी के बेटे हीरालाल मंडोलिया ने बताया जमीन पट्टे की है और उसे बेचकर हमें जेल नहीं जाना। प्रशासन कभी भी पट्टा निरस्त करके कब्जा ले सकता है। जमा पूंजी से बने मेरे नए मकान को देखकर हर कोई कॉलोनाइजर की बात पर भरोसा कर रहा है।
जमीन सरकारी, सौदा हुआ है
ठ्ठ जाख्या-भांगिया के सरपंच प्रेमसिंह चौहान का कहना है 12 बीघा जमीन सरकारी कांकड़ है। चौकीदार का तो नहीं पता लेकिन मंडोलिया परिवार ने जमीन बेची इसकी शिकायत मुझे भी मिली थी जिसकी जानकारी पटवारी को देकर कार्रवाई की मांग कर चुका हूं। ठ्ठ रेवती-बरदरी ग्राम के सरपंच पति आनंदीलाल शर्मा ने बताया भूमाफियाओं की निगाहें थी लेकिन वक्त रहते शिकायत करके उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।

एसडीएम ने मौका देखकर गिरफ्तारी के निर्देश दिए थे
जमीन प्राधिकरण को सौंपी

कुम्हेड़ी सरपंच राजेश चौकसे ने बताया अवैधानिक रूप से काटी जा रही कॉलोनी की शिकायत तीन महीने पहले की थी। तत्कालीन एसडीएम सुनील दुबे ने मौका मुआयना किया और कॉलोनाइजरों की गिरफ्तारी के आदेश भी जारी किए थे। हालांकि बार-बार याद दिलाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो पाई। प्रकाशनगर और उससे लगी खुली जमीन पंचायत तहसील के अनुमोदन के बाद इंदौर विकास प्राधिकरण को सौंप चुकी है। प्राधिकरण यहां स्कीम-139 से हटाए जाने वाले परिवारों को यहां बसाएगा। यहां 52 लाख की सड़क का भूमि पूजन भी हो चुका है।

तहसील को रिपोर्ट सौंप दी थी
क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों से अनजान नहीं हूं। कुछ दिन पहले ही तहसीलदार को रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया था कि भौरासला के सर्वे नं. 170 और भांगिया के सर्वे नं. 1/1 में इंद्रपाल सिंह यादव, अशोक यादव और भीमसिंह पिता मानसिंह ने अवैध रूप से कॉलोनी काटी है। बाद में तहसील कोर्ट से इन्हें नोटिस भी जारी हुए थे। नोटिस का क्या हुआ मुझे जानकारी नहीं।
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योगेंद्र श्रीवास्तव, पटवारी

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