Tuesday, April 13, 2010

कस रहा शिकंजा



इंदौर। सुगनीदेवी कॉलेज परिसर की करीब 100 करोड़ की तीन एकड़ जमीन के मामले में विशेष न्यायाधीश ने राज्य आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) को जांच से जुड़ी जानकारी की रिपोर्ट तत्काल पेश करने के आदेश दिए हैं। जानकारी मांगने से ब्यूरो में खलबली है। अफसर फाइलें खंगालने में लगे हैं। मंगलवार को रिपोर्ट पेश होगी।

इस बीच लोकायुक्त ने आवेदन कोर्ट में पेश किया, जिसमें लिखा कि मामले की जांच पहले ईओडब्ल्यू ने की थी तो उससे स्थिति स्पष्ट कर ली जाए कि कार्रवाई हुई, लंबित है या मामला खारिज हो गया। इस पर विशेष न्यायाधीश एसके रघुवंशी ने सुनवाई की। ईओडब्ल्यू के विशेष लोक अभियोजक अश्लेष शर्मा ने बताया कोर्ट ने एसपी महेंद्रसिंह सिकरवार को पत्र लिखकर जानकारी मांगी है।

अगर ब्यूरो ने कार्रवाई की है या लंबित है अथवा जैसी भी स्थिति है, उसे लेकर तत्काल रिपोर्ट पेश करें। रिपोर्ट मंगलवार को पेश की जाएगी। गौरतलब है पिछले दिनों कोर्ट ने उद्योगमंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक रमेश मेंदोला, मे. धनलक्ष्मी केमिकल इंडस्ट्रीज के भागीदार विजय कोठारी और मनीष संघवी के खिलाफ लोकायुक्त को जांच कर रिपोर्ट 90 दिन में पेश करने का कहा था। यह भी हवाला दिया गया था कि दोष साबित होता है तो धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं में केस भी दर्ज करें।

अवर सचिव ने भी ली थी आपत्ति
अवर सचिव ने 14 सितंबर 2009 को निगमायुक्त को पत्र लिखकर स्पष्ट कहा था कि लीज की भूमि को धनलक्ष्मी केमिकल को आवंटित करने के बारे में शासन की अनुमति और निगम के बीच हुए अनुबंध में यह शर्त नहीं थी कि धनलक्ष्मी इंडस्ट्रीज लीज पर आवंटित भूमि या उसके अधिकारों का विक्रय करने को स्वतंत्र रहेगी।

यदि धनलक्ष्मी लीज को आगे जारी नहीं रखना चाहती थी तो उसे नियमानुसार निगम को वापस करना चाहिए था। अवर सचिव ने एक पत्र में निगमायुक्त को यह भी लिखा था कि उक्त जमीन निगम को सौंपे बिना नंदानगर साख सहकारी संस्था को बिना टेंडर बुलाए कैसे बेच दी गई?

जांच की हकीकत
आखिर ईओडब्ल्यू में कब शिकायत की गई थी? क्या इसमें जांच शुरू हुई? क्या दबाव के चलते मामला दबा दिया गया? ऎसे कई सवाल अब भी अनसुलझे हैं। जानकारी के मुताबिक 27 फरवरी 2009 को मामले में परिवादी सुरेश सेठ ने शिकायत सिर्फ ईओडब्ल्यू की इंदौर विंग को ही नहीं, बल्कि आईजी (भोपाल) को भी की थी यानी एक साल से ज्यादा समय हो गया, लेकिन ब्यूरो में मामला ठंडे बस्ते में रहा।

तारीख-पर-तारीख

शिकायतों की फेहरिस्त
*17 मई 07 को आवास एवं पर्यावरण मंत्री जयंत मलैया को।
*1 मई 08 को निगमायुक्त नीरज मंडलोई को।
*6 अक्टूबर 08 को फिर निगमायुक्त नीरज मंडलोई को।
*12 फरवरी 09 को निगमायुक्त सीबी सिंह को।
*2 मार्च 2009 को इन्हें डिमांड ऑफ जस्टिस का नोटिस

1. मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन
2. गृह सचिव
3. पुलिस महानिदेशक
4. आईजी (ईओडब्ल्यू, भोपाल)
5. डीआईजी, 6. आईजी
7. एसपी
8. कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी
9. एसपी, ईओडब्ल्यू, इंदौर


17 जून 09 को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से शिकायत।
शिकायतों की फेहरिस्त पर सुनवाई न होने पर मार्च 2010 में कोर्ट की शरण। कोर्ट से लोकायुक्त को कैलाश विजयवर्गीय, रमेश मेंदोला, विजय कोठारी और मनीष संघवी की भूमिका को लेकर जांच के आदेश।

नगर निगम भी हरकत में, सौंपेगा सरकार को रिपोर्ट, खंगाली फाइलें
करोड़ों के घपले में नगर निगम विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपेगा। इसमें निगम जमीन को लेकर अब तक अलग-अलग कार्रवाई और मौजूदा स्थिति का ब्योरा होगा।

यह काम लीज शाखा और विधि विभाग के अफसरों को सौंपा गया है, जिन्होंने करीब 100-100 पेज की दो बड़ी फाइलें ढूंढ़ निकाली हैं। इसमें 1940 में हिम्मतलाल एंड संस को दी गई लीज से लेकर 2002 में धनलक्ष्मी और नंदानगर साख संस्था के बीच करार के दस्तावेज हैं।

निगम की चिंता लोकायुक्त जांच को लेकर भी है जिसमें अफसरों से पूछताछ के आसार हैं। कमिश्नर के अलावा 1980 में मास्टर प्लान के बाद पहला अनुबंध करने वाले सिटी इंजीनियर से 2002 तक पदस्थ इंजीनियरों से भी जांच एजेंसी जानकारी मांग सकती है।

रिपोर्ट इसलिए भी लंबी-चौड़ी बनाई जा रही है ताकि वक्त आने पर जवाब पेश किया जा सके। रिपोर्ट सरकार के पास भेजने के बाद वहां से भी कोई निर्णय हो सकता है, क्योंकि मामला कबीना मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और विधायक रमेश मेंदोला से जुड़ा है।

नंदानगर संस्था ने लिखी थी चिट्ठी
मार्च में नंदानगर साख संस्था ने निगम को चिट्ठी लिखकर पूछा था कि उनके व धनलक्ष्मी केमिकल के बीच जमीन हस्तांतरण के मामले में क्या हुआ है। इस पर निगम ने जवाब दिया था कि मामला सरकार के स्तर पर विचाराधीन है।

- कोर्ट के आदेश पर देख रहे हैं कि हमारी भूमिका क्या होगी। रिपोर्ट भी तैयार कर रहे हैं जो सरकार को भेजी जाएगी। इसमें जमीन से जुड़ा हर बिंदु शामिल रहेगा। विधि विशेषज्ञों से भी सलाह ली जा रही है। फिलहाल हस्तांतरण का मामला सरकार के पास लंबित है।
-सीबी सिंह, कमिश्नर

चिंता नहीं मिल रहे कागजों की
बताते हैं अफसरों की चिंता कुछ चिट्ठी व अनुबंध पत्रों को लेकर है, जो फाइलों में नहीं मिल रहे। लिहाजा, फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों पर ही रिपोर्ट बनाई जा रही है। रिपोर्ट में निगम लीज अनुबंध को लेकर 1940, 1977, 1980, 2002 में हुए अलग-अलग मामलों का ब्योरा देगा। यह भी बताया जाएगा कि जमीन का हस्तांतरण दो-तीन मर्तबा हो चुका है और हर बार अनुबंध के मुताबिक ही कार्रवाई की गई।

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