Friday, September 16, 2016

केअरलेस क्योरवेल % सेंटिंग हो चुकी थी, विस्फोट ने खोली पोल और आंखे


इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
एअर सिलेंडर में विस्फोट ने क्योरवेल हॉस्पिटल के तमाम इंतजामात की पोल तो खोली ही निर्माण में नगर निगम के मैदानी अमले की मिलीभगत का किस्सा भी उजागर कर दिया। यकायक नगर निगम को याद आ गया कि 26 साल से चले आ रहे इस अस्पताल में स्वीकृति के विपरीत निर्माण हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों को भी पता चला कि अस्पताल में गैरकानूनी रूप से बेसमेंट को जनरल वार्ड की तरह इस्तेमाल किया जाता रहा है।
चौतरफा छोड़ी जाने वाली मार्जिनल ओपन स्पेस (एमओएस) पर कब्जा करके अस्पताल प्रबंधन ने पार्किंग तक नहीं छोड़ी थी। सारी गाड़ियां रोड पर खड़ी होती रही। लोग परेशान होते रहे। न नगर निगम ने नोटिस देकर कब्जा हटवाने की कोशिश की और न ही विस्फोट के बाद अस्पताल अस्थाई रूप से बंद करवाने वाले जिला प्रशासन या यातायात पुलिस ने। विस्फोट ने प्रबंधन की लापरवाही के साथ इन विभागों में अर्से से बंद पड़ी फाइलें भी खुल गई। तब जाकर पता चला कि अस्पताल के अवैध निर्माण को लेकर वर्षोें पहले जांच तो हुई थी लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठते हैं जिन्होंने पहले अवैध निर्माण व पार्किंग की जमीन पर कब्जा होने दिया और वे भी जिन्होंने जांच तो की लेकिन कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा सके। यातायात पुलिस के अमले की भूमिका भी जांची जाना चाहिए  जिसने सड़क पर खड़ी गाड़ियों के खिलाफ कभी कार्रवाई नहीं की।
अब है मौका...
चलते अस्पताल में कार्रवाई हो तो मरीजों को दिक्कत होती है? शायद जिन कारणों से क्योरवेल पर कार्रवाई नहीं हुई उनमें अधिकारियों की यह सोच भी रही होगी। ऐसे में नगर निगम के पास अब सुनहरा मौका है जब गड़बड़ के चलते जिला प्रशासन अस्पताल को खाली करवा चुका है। अब नगर निगम एमओएस से कब्जे हटवाकर पार्किंग की व्यवस्था कर सकता है। इसके अलावा जो भी अवैध निर्माण हुआ है उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। अस्पताल की सड़क पर पार्किंग से परेशान लोग भी अब कार्रवाई की मांग करने लगे हैं।

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