Friday, September 16, 2016

दो आवेदन पर मंजूर कर दिए 197 बंगले

इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
रोड के लिए आरक्षित जमीन पर बगीचा बनाकर जिस केलिफोर्निया सिटी की सजावट की गई उसमें एक ही आवेदन पर 146 प्लॉटों पर बंगले बनाने की अनुमति जारी हो गई। दूसरे आवेदन में 51 प्लॉट पर बंगले मंजूर हो गए। जबकि कानूनन जितने प्लॉट उतने आवेदन होना चाहिए।
हिंगोनिया की 54 एकड़ जमीन पर बनी कॉलोनी में एक के बाद एक नई कहानी सामने आ रही है। ताजा मामला यह है कि कॉलोनाइजर जिन प्लॉटों पर रो-हाउसेस की तरह बंगले बनाकर बेच रहा है उन 197 प्लॉटों पर बंगले बनाने की अनुमति सिर्फ दो आवेदन पर ही झलारिया पंचायत ने 2012-13 में जारी कर दी थी। जिम्मेदार भले इस जायज करार दे रहे हों लेकिन जानकारों की मानें तो ऐसा नहीं किया जा सकता। इसकी दो बड़ी वजह है। पहली कॉलोनी के जिस हिस्से पर बंगले मंजूर हुए हैं उस पर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने भूखंड विकास का ले-आउट मंजूर कर रखा है। दूसरा, नियमानुसार जितने प्लॉट उतने आवेदन होना चाहिए। क्योंकि हर प्लॉट का अपना एरिया है।
तो रो-हाउस या ग्रुप हाउसिंग की मंजूरी लेते
हाई-वे इन्फ्रास्ट्रक्चर ने जनवरी 2012 में कॉलोनी की जो टीएनसी कराई थी उसमें प्लॉट और पी+6 की बिल्डिंग्स का जिक्र था। बंगलों का नहीं। 2012 में ही कंपनी ने पंचायत में आवेदन लगाया और बंगले मंजूर कराए। बंगले रो-हाउस की तरह बन रहे हैं जबकि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग में भूखंडीय कॉलोनी के नियम अलग है और ग्रुप हाउसिंग के अलग।
विकास भी पूरा नहीं
कॉलोनी की भवन अनुज्ञा तब जारी होती है जब एसडीओ आॅफिस से उसका कंपलिशन सर्टिफिकेट जारी हो चुका हो। इसके विपरीत पंचायत ने भवन अनुज्ञा कॉलोनी का विकास पूरा होने से पहले ही जारी कर दी। कॉलोनी में अब भी 30 फीसदी सड़कें अधूरी है। एमिनिटिज के नाम पर गार्डन बने हैं। पानी की टंकी है। कॉलोनी का अपना बिजली सब स्टेशन नहीं है। प्राइमरी स्कूल नहीं बना। सब पोस्ट आॅफिस नहीं है। प्राइमरी हैल्थ सेंटर नहीं है। मार्केट नहीं है। क्लब नहीं है। गरीबों के लिए बनने वाले ईडब्ल्यूएस यूनिट सिर्फ डॉक्यूमेंट पर ही हैं। 

No comments:

Post a Comment