दबंग रिपोर्टर, इंदौर।
महत्वकांक्षी इंदौर-दाहोद रेल परियोजना में जमीन अधिग्रहण का बहाना अब नहीं चलेगा। बजट की कमी नहीं है। छह महीने में हर हाल में अधिग्रहण पूरा करें और ट्रेक के टुक-टुक काम को रफ्तार दें। ढिलाई किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगी। मंगलवार को रेल अधिकारियों की बैठक लेते हुए तल्ख तेवर के साथ यह चेतावनी लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने दी।
रेसीडेंसी कोठी में हुई बैठक में ताई ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रोजेक्ट की रफ्तार सिरदर्द बन चुकी है। अधिग्रहण बाधा है तो इसे जल्द दूर करें। अब तो बजट में भी 300 करोड़ मिले हैं। अधिकारियों ने बताया कि सागौर-गुणावद के बीच 15 किलोमीटर और गुणावद से धार के बीच 12 किलोमीटर में समस्या है। झाबुआ से पिटोल के बीच अधिग्रहण हुआ नहीं है। इस पर ताई ने कहा कि जहां जमीन मिली है या मिल रही है वहां तो गति दें। 30 किलोमीटर का घाट सेक्शन है वहां टनल और पहाड़ कटिंग का काम तेज किया जा सकता है। रहा अधिग्रहण का मुद्दा तो छह महीने में यह काम तो पूरा कर लो। इसके लिए रेलवे और प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधियों को एक होना होगा। बैठक में झाबुआ सांसद कांतिलाला भूरिया, धार सांसद सावित्री ठाकुर के साथ ही तीनों जिलों के कलेक्टर और पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक जीसी अग्रवाल व रेलवे के अन्य अधिकारी मौजूद थे।
भूरिया ने राज्य सरकार पर निशाना साधा
झाबुआ सांसद भूरिया ने कहा योजना में देरी के लिए मप्र और गुजरात सरकार जिम्मेदार है जिनकी वजह से वक्त पर भू-अधिग्रहण नहीं हुआ। इनकी ढिलाई का खामियाजा न सिर्फ रेलवे ने बढ़ी हुई लागत के रूप में भुगता है बल्कि दोनों राज्यों की जनता भी परेशानी झेल रही है।
एटीसीपी के लिए पहले खंडवा सनावद ब्राडगेज...
पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक श्री अग्रवाल के मुताबिक 2019 तक खंडवा में एंटीसीपी का प्लांट शुरू होना है। इसीलिए महू-सनावद के पहले सनावाद-खडंवा के बीच ब्राडगेज कर देंगे। इस बीच महू-सनावद पर भी काम होगा। आवश्यक राशि भी रेलवे को दे दी। टेंडर हो चुके हैं। इंदौर-दाहोद और धार-छोटा उदयपुर प्रोजेक्ट में भी अधिग्रहण जल्द होगा यह आश्वसन संबंधित कलेक्टर भी दे चुके हैं।
टनल पर टेंशन...
टीही से पीथमपुर चौपाटी होते हुए खंडवा तक टनल बनना है। इसके काम भी अभी पेपर पर ही है जिसके लिए भी ताई ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा 2011 तक टनल नहीं थी, बाद में डिजाइन बदलकर टनल बढ़ा दी। अब योजना में बदलाव संभव नहीं है। बस फटाफट काम करो।
ताई ऐसे तो 10 साल में भी पूरा नहीं होगा प्रोजेक्ट
एक दशक तक चली लंंबी कवायद के बाद 2008 में 202 किलोमीटर लंबी इंदौर-दाहोद परियोजना का काम शुरू हुआ था। अब तक इंदौर से टिही के बीच ही 18 किलोमीटर लंबी लाइन ही डली है। टीही से पीथमपुर चौपाटी के बीच सिर्फ अर्थवर्क है। इसी तरह खंडवा (पीथमुपर) से तीन किलोमीटर तक अर्थवर्क ही नजर आता है। इस गति से 2026 तक भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं होगा।
लागत कहां से कहां...
2008 में जिस वक्त परियोजना का शिलान्यास हुआ था तब इसकी लागत 642 करोड़ आंकी जा रही थी। काम के मुकाबले लागत तेजी से बढ़ी। आठ वर्षों में 2.72 गुना बढ़ी जबकि काम हुआ 2.25 किलोमीटर/साल के औसत से।
प्रोजेक्ट 2013 में पूरा होना था, होगा 2023 में
शुरूआत के साथ प्रोजेक्ट की समयसीमा 2013 तय की गई थी लेकिन मौजूदा काम को देखते हुए कहा जा सकता है कि परियोजना 2023 में पूरी होगी। 10 साल देर से। 202 में से 20 किलोमीटर में गुजरात काम कर चुका है। करीब 20 किलोमीटर में मप्र। बचे 160 किलोमीटर, जहां काम होना है
महत्वकांक्षी इंदौर-दाहोद रेल परियोजना में जमीन अधिग्रहण का बहाना अब नहीं चलेगा। बजट की कमी नहीं है। छह महीने में हर हाल में अधिग्रहण पूरा करें और ट्रेक के टुक-टुक काम को रफ्तार दें। ढिलाई किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगी। मंगलवार को रेल अधिकारियों की बैठक लेते हुए तल्ख तेवर के साथ यह चेतावनी लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने दी।
रेसीडेंसी कोठी में हुई बैठक में ताई ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रोजेक्ट की रफ्तार सिरदर्द बन चुकी है। अधिग्रहण बाधा है तो इसे जल्द दूर करें। अब तो बजट में भी 300 करोड़ मिले हैं। अधिकारियों ने बताया कि सागौर-गुणावद के बीच 15 किलोमीटर और गुणावद से धार के बीच 12 किलोमीटर में समस्या है। झाबुआ से पिटोल के बीच अधिग्रहण हुआ नहीं है। इस पर ताई ने कहा कि जहां जमीन मिली है या मिल रही है वहां तो गति दें। 30 किलोमीटर का घाट सेक्शन है वहां टनल और पहाड़ कटिंग का काम तेज किया जा सकता है। रहा अधिग्रहण का मुद्दा तो छह महीने में यह काम तो पूरा कर लो। इसके लिए रेलवे और प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधियों को एक होना होगा। बैठक में झाबुआ सांसद कांतिलाला भूरिया, धार सांसद सावित्री ठाकुर के साथ ही तीनों जिलों के कलेक्टर और पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक जीसी अग्रवाल व रेलवे के अन्य अधिकारी मौजूद थे।
भूरिया ने राज्य सरकार पर निशाना साधा
झाबुआ सांसद भूरिया ने कहा योजना में देरी के लिए मप्र और गुजरात सरकार जिम्मेदार है जिनकी वजह से वक्त पर भू-अधिग्रहण नहीं हुआ। इनकी ढिलाई का खामियाजा न सिर्फ रेलवे ने बढ़ी हुई लागत के रूप में भुगता है बल्कि दोनों राज्यों की जनता भी परेशानी झेल रही है।
एटीसीपी के लिए पहले खंडवा सनावद ब्राडगेज...
पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक श्री अग्रवाल के मुताबिक 2019 तक खंडवा में एंटीसीपी का प्लांट शुरू होना है। इसीलिए महू-सनावद के पहले सनावाद-खडंवा के बीच ब्राडगेज कर देंगे। इस बीच महू-सनावद पर भी काम होगा। आवश्यक राशि भी रेलवे को दे दी। टेंडर हो चुके हैं। इंदौर-दाहोद और धार-छोटा उदयपुर प्रोजेक्ट में भी अधिग्रहण जल्द होगा यह आश्वसन संबंधित कलेक्टर भी दे चुके हैं।
टनल पर टेंशन...
टीही से पीथमपुर चौपाटी होते हुए खंडवा तक टनल बनना है। इसके काम भी अभी पेपर पर ही है जिसके लिए भी ताई ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा 2011 तक टनल नहीं थी, बाद में डिजाइन बदलकर टनल बढ़ा दी। अब योजना में बदलाव संभव नहीं है। बस फटाफट काम करो।
ताई ऐसे तो 10 साल में भी पूरा नहीं होगा प्रोजेक्ट
एक दशक तक चली लंंबी कवायद के बाद 2008 में 202 किलोमीटर लंबी इंदौर-दाहोद परियोजना का काम शुरू हुआ था। अब तक इंदौर से टिही के बीच ही 18 किलोमीटर लंबी लाइन ही डली है। टीही से पीथमपुर चौपाटी के बीच सिर्फ अर्थवर्क है। इसी तरह खंडवा (पीथमुपर) से तीन किलोमीटर तक अर्थवर्क ही नजर आता है। इस गति से 2026 तक भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं होगा।
लागत कहां से कहां...
2008 में जिस वक्त परियोजना का शिलान्यास हुआ था तब इसकी लागत 642 करोड़ आंकी जा रही थी। काम के मुकाबले लागत तेजी से बढ़ी। आठ वर्षों में 2.72 गुना बढ़ी जबकि काम हुआ 2.25 किलोमीटर/साल के औसत से।
प्रोजेक्ट 2013 में पूरा होना था, होगा 2023 में
शुरूआत के साथ प्रोजेक्ट की समयसीमा 2013 तय की गई थी लेकिन मौजूदा काम को देखते हुए कहा जा सकता है कि परियोजना 2023 में पूरी होगी। 10 साल देर से। 202 में से 20 किलोमीटर में गुजरात काम कर चुका है। करीब 20 किलोमीटर में मप्र। बचे 160 किलोमीटर, जहां काम होना है
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