एआईएमपी सदस्यों को जीएसटी से रुबरू कराया वाणिज्यिक कर आयुक्त ने
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
अलग-अलग राज्यों द्वारा लागू कर प्रणालियों के स्थान पर जीएसटी के रूप में एक ही कर प्रणाली लागू होने से व्यापारियों की समस्या कम होगी। चेक पोस्ट हटने से वाहन अभी 280 किलोमीटर/दिन ही यात्रा कर पा रहे हैं। जीएसटी के बाद यह दूरी 444 किलोमीटर/दिन हो जाएगी। इससे ट्रांसपोर्टेशन कास्ट कम होगी। मुनाफा बढ़ेगा। एसोसिएशन आॅफ इण्ड्रस्टीज म.प्र. (एआईएमपी) द्वारा जीएसटी पर आयोजित सेमीनार में यह जानकारी वाणिज्यिक कर आयुक्त राघवेंद्र सिंह ने दी।
उद्योगपतियों को जीएसटी के प्रावधानों से रुबरू कराने के मकसद से उद्योग भवन पोलोग्राउण्ड पर आयोजित सेमीनार को संबोधित करते हुए बतौर मुख्य अतिथित श्री सिंह ने कहा कि अभी रेवेन्यू न्यूट्रल रेट 15 से 16 प्रतिशत है। कुछ प्रोडक्ट कर मुक्त हैं। जीएसटी के बाद कुछ वस्तुओं के लोवर रेट, कुछ के स्टेंडर्ड टैक्स रेट लागू होंगे। डी मेरिट गुड्स पर 40 प्रतिशत तक होंगे। इसीलिए संभावना है कि स्टेंडर्ड रेट 18 से 20 प्रतिशत होंगे। संचालन संस्था के सचीव योगेश मेहता ने किया।
2 प्रतिशत कंपोजिशन देगा झंझट से मुक्ति
जीएसटी से जहां दोहरे करारोपण से मुक्ति मिलेगी वही दूसरी ओर पूरे देश में एक समान कर की दर होने से व्यापार एवं व्यवसाय करना सरल होगा। 50 लाख तक के टर्नओवर वाले छोटे व्यवसाइयों को 2 प्रतिशत की दर से कम्पोजिशन फीस जमा कराने पर अलग से कर की वसूली, इनपुट टैक्स रिबेट (आईटीआर), इनपुट टैक्स क्रेडिट(आईटीसी) के दावे और मासिक रिटर्न से मुक्ति मिलेगी।
सुधीप गुप्ता, उपायुक्त
वाणिज्यिक कर
जीएसटी से मिलेगी उद्योगों को नई उर्जा
विश्वव्यापी मंदी के कारण गिरते औद्योगिक उत्पादन, गलाकाट प्रतिस्पर्धा, उपभोक्ताओं की क्षीण क्रय शक्ति की समस्या से जूझ रहे उद्योगों को जीएसटी से नई उर्जा मिलेगी। करों के एकीकरण से न सिर्फ करों की संख्या कम व दर कम होगी बल्कि व्यापारियों का समय बचेगा। उत्पादन बढ़ेगा। जीडीपी के साथ उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ेगी। जीएसटी के पारदर्शी एवं कम्प्यूटराइजेशन के कारण मानवीय हस्तक्षेप कम होने से व्यवसाइयों की परेशानियां कम होगी। चेकपोस्ट हट जाएगी। चूंकि प्रदेश भारत वर्ष से सड़क मार्ग से जुडा हैं, अत: विभिन्न कम्पनियां यहां से अपना अपना व्यवसाय संचालित करना चाहेंगी।
आर.एस.गोयल
वरिष्ठ कर सलाहकार
उद्योगपतियों को अप्रत्यक्ष कर की नई प्रणाली के अनुसार स्वयं की तैयारी पुख्ता रखनी चाहिए ताकि जीएसटी के लागू होने से प्राप्त होने वाले लाभ को भुनाया जा सके।
ओमप्रकाश धूत, अध्यक्ष
एआईएमपी
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
अलग-अलग राज्यों द्वारा लागू कर प्रणालियों के स्थान पर जीएसटी के रूप में एक ही कर प्रणाली लागू होने से व्यापारियों की समस्या कम होगी। चेक पोस्ट हटने से वाहन अभी 280 किलोमीटर/दिन ही यात्रा कर पा रहे हैं। जीएसटी के बाद यह दूरी 444 किलोमीटर/दिन हो जाएगी। इससे ट्रांसपोर्टेशन कास्ट कम होगी। मुनाफा बढ़ेगा। एसोसिएशन आॅफ इण्ड्रस्टीज म.प्र. (एआईएमपी) द्वारा जीएसटी पर आयोजित सेमीनार में यह जानकारी वाणिज्यिक कर आयुक्त राघवेंद्र सिंह ने दी।
उद्योगपतियों को जीएसटी के प्रावधानों से रुबरू कराने के मकसद से उद्योग भवन पोलोग्राउण्ड पर आयोजित सेमीनार को संबोधित करते हुए बतौर मुख्य अतिथित श्री सिंह ने कहा कि अभी रेवेन्यू न्यूट्रल रेट 15 से 16 प्रतिशत है। कुछ प्रोडक्ट कर मुक्त हैं। जीएसटी के बाद कुछ वस्तुओं के लोवर रेट, कुछ के स्टेंडर्ड टैक्स रेट लागू होंगे। डी मेरिट गुड्स पर 40 प्रतिशत तक होंगे। इसीलिए संभावना है कि स्टेंडर्ड रेट 18 से 20 प्रतिशत होंगे। संचालन संस्था के सचीव योगेश मेहता ने किया।
2 प्रतिशत कंपोजिशन देगा झंझट से मुक्ति
जीएसटी से जहां दोहरे करारोपण से मुक्ति मिलेगी वही दूसरी ओर पूरे देश में एक समान कर की दर होने से व्यापार एवं व्यवसाय करना सरल होगा। 50 लाख तक के टर्नओवर वाले छोटे व्यवसाइयों को 2 प्रतिशत की दर से कम्पोजिशन फीस जमा कराने पर अलग से कर की वसूली, इनपुट टैक्स रिबेट (आईटीआर), इनपुट टैक्स क्रेडिट(आईटीसी) के दावे और मासिक रिटर्न से मुक्ति मिलेगी।
सुधीप गुप्ता, उपायुक्त
वाणिज्यिक कर
जीएसटी से मिलेगी उद्योगों को नई उर्जा
विश्वव्यापी मंदी के कारण गिरते औद्योगिक उत्पादन, गलाकाट प्रतिस्पर्धा, उपभोक्ताओं की क्षीण क्रय शक्ति की समस्या से जूझ रहे उद्योगों को जीएसटी से नई उर्जा मिलेगी। करों के एकीकरण से न सिर्फ करों की संख्या कम व दर कम होगी बल्कि व्यापारियों का समय बचेगा। उत्पादन बढ़ेगा। जीडीपी के साथ उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ेगी। जीएसटी के पारदर्शी एवं कम्प्यूटराइजेशन के कारण मानवीय हस्तक्षेप कम होने से व्यवसाइयों की परेशानियां कम होगी। चेकपोस्ट हट जाएगी। चूंकि प्रदेश भारत वर्ष से सड़क मार्ग से जुडा हैं, अत: विभिन्न कम्पनियां यहां से अपना अपना व्यवसाय संचालित करना चाहेंगी।
आर.एस.गोयल
वरिष्ठ कर सलाहकार
उद्योगपतियों को अप्रत्यक्ष कर की नई प्रणाली के अनुसार स्वयं की तैयारी पुख्ता रखनी चाहिए ताकि जीएसटी के लागू होने से प्राप्त होने वाले लाभ को भुनाया जा सके।
ओमप्रकाश धूत, अध्यक्ष
एआईएमपी
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