Friday, September 16, 2016

बिल केमिकल का, आयात सीजनल प्रोडक्ट का

प्रेस्टीज पोलिमर की मनमानी
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
केमिकल की आड़ में आयात किए गए चायनीज पटाखों का जखिरा पकड़ने वाली डायरेक्टर रेवेन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआई) की टीम गुरुवार को भी कंटेनर की जांच करती रही। वहीं इस बात के भी कयास लगाए जाते रहे कि डेढ़ साल पहले एसईजेड में कदम रखने वाली प्रेस्टीज पोलिमर प्रा.लि. आखिर केमिकल की आड़ में अब तक क्या और कितना आयात कर चुकी है।
गुरुवार को एक और कंटेनर खोला गया। इसमें भी चायनीज पटाखे सहित अन्य प्रतिबंधित उत्पादों का जखिरा मिला। तीन कंटेनर के पटाखों की कीमत अब तक साढ़े तीन करोड़ आंकी जा रही है। अभी पांच कंटेनर और खुलना है। बिखरे सामान को देखते हुए मैदानी अमला भी बढ़ाया जा चुका है। जिनकी मदद से माल चेक करने में वक्त भी कम लगेगा। हालांकि पूरे मामले में आईसीडी पीथमपुर में पदस्थ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं कि आखिर वे एसईजेड में आने वाले माल की तफ्तीश क्यों नहीं करते।
गड़बड़ की प्रेस्टीज
आमद : स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसईजेड) के डायरेक्टर रहे ईश्वर सिंह से अच्छे संबंधों के चलते मनीष भल्ला ने प्रेस्टीज पोलिमर के ट्रेडिंग प्लेटफार्म के रूप में डेढ़ साल पहले एसईजेड-1 में शिरकत की।
काम करने का तरीका : एसईजेड में उन यूनिट को स्थान दिया जाता है जिनका काम आयात करना और उसे नए सिरे से एक्सपोर्ट करना है। ऐसे में प्रेस्टीज जैसी ट्रेडिंग कंपनियां प्रोडक्ट आयात करती हैं और उसे री-पेकिंग करके री-एक्सपोर्ट करती हैं।
छूट : एक्सपोर्ट करने वाले उत्पाद या उनमें इस्तेमाल होने वाले उत्पाद का आयात होता है तो उस पर कस्टम ड्यूटी की छूट मिलती है। यदि प्रोडक्ट को एक्सपोर्ट करने के बजाय देश में ही इस्तेमाल किया या बेचा जाता है तो इसे कस्टम ड्यूटी की चोरी कहा जाता है।
गड़बड़ : अब जबकि प्रेस्टीज पोलिमर कंपनी के नाम से आए आयातित बिल के अनुसार कंटेनर में केमिकल हैं तो वह केमिकल री-एक्सपोर्ट कर सकती थी। वास्तव में केमिकल की आड़ में प्रतिबंधित चायनीज पटाखे आए हैं इसीलिए उन्हें री-एक्सपोर्ट नहीं किया जा सकता। ऐसे में कंपनी की जो सिस्टर कंसर्न कंपनियां है पायोनियर पॉलिमर प्रा.लि. और आॅरियो आॅर्गेनिक्स प्रा.लि. वे जो केमिकल बनाती है उनका केमिकल कंपनी अपने लेवल से एक्सपोर्ट करती है।
शंका : चूंकि अभी दिवाली का सीजन आना है इसीलिए कंपनी ने पटाखे आयात किए हैं इसीलिए शंका जताई जा रही है कि कंपनी सीजन के हिसाब से केमिकल की आड़ में प्रोडक्ट मंगाती हैं।
जांच का विषय : मुद्दा यह है कि आखिर कंपनी ने डेढ़ साल में यहां केमिकल के नाम पर कितनी बार अन्य उत्पाद आयात किए हैं। कस्टम ने कभी इसकी जांच क्यों नहीं की। या अब जबकि मामला डीआरआई के प्रयासों से उजागर हो चुका है तो क्या आगे कंपनी के डेढ़ साल में किए गए कारोबार की जांच भी होगी।

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