Friday, September 16, 2016

रमानी बंधुओं ने इंदौर में भी खरीदी जमीनें

25 लाख से शुरू कारोबार तीन दशक में पहुंचा एक हजार करोड़ पार
- 100 करोड़ की तो काली कमाई ही
इंदौर. विनोद शर्मा।
200 डिस्ट्रीब्यूटर और 10 हजार से ज्यादा सेलिंग पॉइन्ट के साथ 100 से अधिक फ्लैवर की आईस्क्रीम का कारोबार करने वाले रमानी समूह की काली कमाई का आंकड़ा करीब सौ करोड़ तक जाएगा। आईस्क्रीम, बेकरी आइटम, इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट, रियल एस्टेट और फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में हाथ आजमा रहे इस समूह ने भोपाल और हरदा के साथ ही इंदौर में भी बड़े पैमाने पर जमीनों में निवेश कर रखा है। इनकम टैक्स को इसके दस्तावेजी प्रमाण मिल चुक हैं। तलाश है इंदौर के उन निवेशकों की जो रमानी के भागीदार हैं।
इन्वेस्टिगेशन विंग की छापेमारी ने टॉप क्लास बिजनेस हाउस रमानीज के कामकाज की वास्तविकता भी जगजाहिर कर दी। 25 लाख रुपए के निवेश के साथ आईस्क्रीम का कारोबार शुरू करने वाले रमानी बंधु आज तकरीबन एक हजार करोड़ के आसामी हैं। यहां तक पहुंचने के लिए कभी बैंकों का सहारा लिया तो कभी सफेदपोश मालदारों का। इनमें अधिकारी भी हैं और मंत्री-नेता भी। अधिकारियों का आंकलन है कि काली कमाई 100 करोड़ के करीब है। इसमें सरेंडर में कितनी सामने आती है और असेसमेंट में कितनी यह आने वाले दिन में ही क्लीयर होगा।
यह है कि रमानी समूह के सर्वेसर्वा
श्यामदास रमानी : न्यू मार्केट में बालचंद्र कुकरेजा की मधु आईस्क्रीम की दुकान थी। ब्रांड आगरा का था। कुकरेजा ने अपना कामकाज दामाद श्यामदास रमानी को हस्तांतरित किया। परिवहन के कारण आईस्क्रीम की बर्बादी देखते हुए रमानी ने ब्रांड की यूनिट भोपाल में स्थापित करने की मंशा जताई जिसे कंपनी ने रिजेक्ट कर दिया। तब रमानी ने कड़ा निर्णय लेते हुए 25 लाख रुपए के निवेश के साथ टॉप एंड टाउन ब्रांड के नाम से आईस्क्रीम बनाना शुरू कर दी।
प्रकाश रमानी : रमानी परिवार के बड़े बेटे। 16 साल की उम्र से पिता के साथ बिजनेस देखा। अपने सपने को पूरा करने के मकसद से ट्रिनिटी इंस्टिट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च की स्थापना की। बाकी बिजनेस भाइयों के हवाले। पूरा फोकस कॉलेज पर।
डायरेक्टर : रमानी आईस्क्रीम कंपनी लि.(1991 से), रमानी होल्डिंग प्रा.लि. (2004 से ) और टोरोक्यू सॉफ्ट सॉल्यूशन प्रा.लि. (2015 से)
विजय रमानी : इन्हें रमानी परिवार का संकटमोचन कहा जाता है। मुलत: रमानी इन्फ्रास्ट्रक्चर का काम देखते हैं जो कि ईशान रियल एस्टेट के रूप में काम कर रही है। टॉप एंड टाउन ब्रांड और विजय के वित्त कौशल को देखते हुए बड़े लोग अपनी काली कमाई यहां निवेश करते हैं ताकि पैसा बड़े मुनाफे के साथ मिले।
डायरेक्टर : रमानी आईस्क्रीम कं.लि. (2009 से), रमानी होल्डिंग (2004 से), हाईलाइन एज्यूकेयर इंडिया प्रा.लि. (2014 से) और गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र प्रदुशन निवारण केंद्र (2016 से)
हरीश रमानी : बिजनेस वर्ल्ड में अच्छी पकड़। टॉप एंड टाउन आईस्क्रीम का डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और पब्लिक रिलेशन संभालते हैं।
डायरेक्टर : मानी आईस्क्रीम (1993 से) और रमानी होल्डिंग में (2004 से)
अरूण रमानी : प्रयोगधर्मी हैं इसीलिए टॉप एंड टाउन आईस्क्रीम को अपने इनावेटिव आईडियाज से नेशनल ब्रांड बनाया। 2009 में मिनिस्ट्री आॅफ कॉर्पोरेट अफेयर्स द्वारा अरूण यंग अचीवर्स अवार्ड से सम्मानित हो चुके हें।
डायरेक्टर : रमानी आईस्क्रीम (1993 से), रमानी होल्डिंग में (2004 से)  और  इंडियन आईस्क्रीम मैन्युफेक्चरर एसोसिएशन  में (2011 से)
किशोर रमानी : टॉप एंड टाउन ब्रांड के नाम से बेकरी सेक्शन संभालते हैं। बेकरी 2002 से गोविंदपुरा में स्थापित है।  अपने पिता के साथ फार्मासेक्शन भी संभालते हैं।
डायरेक्टर : रमानी होल्डिंग (2004) और लॉर्ड मेडीकेअर (2005)
पार्टनर
तेजींदरसिंह : रियल एस्टेट के मंजे खिलाड़ी जिन्हें सोनू भाई भी कहते हैं। विंडसर अरालिया के नाम से दर्जनभर प्रोजेक्ट किए।
ऐसे आया पैसा
बैंकों से लोन : टॉप एंड टाउन आईस्क्रीम के नाम पर 200 6 में बैंक आॅफ बरौदा से 3.90 करोड़, 2007 में पंजाब नेशनल बैंक से 1.20 करोड़, 2007 में पंजाब एंड सिंध बैंक से 19.00 करोड़, 2008 में एक्सिस बैंक  से 2.02 करोड़, 2008 में श्री इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लि. से 22 लाख, 2010 में पंजाब एंड सिंध बैंक से 10.87 करोड़, 2014 में एचडीएफसी से 15 लाख, 2014 में पंजाब एंड सिंध से 50 लाख, 2014 में एसबीआई से 43.50 करोड़, 2015 में आईडीबीआई 2.94 करोड़, 2002 में पीएनबी से 2.31 करोड़, 2003 में पीएनबी से 2.80 करोड़, 2005 में पीएनबी से 90 लाख, 2005 में पीएनबी से 68 लाख, एसबीआई से 1994 में 59 लाख, देना बैंक से 2001 में 24 लाख, 2003 में पीएनबी से 90 लाख और 1.20 करोड़ का लोन लिया।  कुल 94.34 करोड़ रुपए का कर्ज।
आईस्क्रीम : समूह के 200 एक्स्ल्यूसिव पार्लर हैं। 10 हजार आउटलेट्स। इनमें 100 फीसदी कारोबार केश होता है। 95 फीसदी कारोबार बिना बिल के होता है जो कि काली कमाई का बड़ा माध्यम है।
रियल एस्टेट : रायसेन रोड पर 15 एकड़ में ईशान पार्क बनाई। इसमें प्लॉटिंग के साथ ही मल्टीस्टोरी प्रोजेक्ट भी है। ज्यादातर लेन-देन केश से। यही स्थिति 20 एकड़ में बनी ईशान विस्टा और 38 एकड़ में होशंगाबाद रोड पर आकार ले रही ईशान ग्रांड  एस्टेट है। भोपाल, हरदा, रायसेन, इंदौर में भी जमीनें खरीदी।
ट्रिनिटी   कॉलेज : चेरेटी के नाम पर कमाई का साधन। आवक कम और खर्च ज्यादा बताए ताकि इनकम कम दिखे। या न दिखे।

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