Friday, September 16, 2016

चेरेटि की आड़ में चोरी

  इनकम टैक्स की कार्रवाई से बेनकाब रमानी परिवार, सामने आया ट्रिनिटी कॉलेज का सच
भोपाल. विनोद शर्मा ।
टॉप एंड टाउन ब्रांड के नाम से आईस्क्रीम बनाने वाले जिस रमानी परिवार को शहर का आदर्श बिजनेसमैन समझा जाता रहा है उसने चेरेटी को टैक्स चोरी का धंधा बना दिया है। 2007 में कोकटा बायपास रायसेन रोड स्थित ट्रिनिटी इंस्टिट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर इसका बड़ा उदाहरण है। यहां बच्चों की संख्या और फीस को कम बताकर स्टाफ के साथ ही खर्चे ज्यादा बताए जाते हैं ताकि टैक्स कम चुकाना पड़े। इसका खुलासा मंगलवार से जारी इनकम टैक्स की छापेमार कार्रवाई में भी हो चुका है।
1970 में मधु आईस्क्रीम के नाम से आईस्क्रीम का कारोबार शुरू करने वाले रमानी परिवार ने 2007 में कोकटा बायपास से लगी 15 एकड़ जमीन पर ट्रिनिटी की स्थापना की थी। मकसद था मुल्य आधारित उच्च गुणवत्ता युक्त प्रोफेशनल एज्युकेशन देना जो कि कॉलेज की पूछपरख बढ़ने के साथ फुर्रर्र हो गया। रमानी आईस्क्रीम के साथ इनकम टैक्स की इन्वेस्टिगेशन विंग ने इंस्टिट्यूट में भी दबिश दी। कार्रवाई के दौरान पता चला कि कॉलेज में दो तरह के अटेंडेंस रजिस्टर हैं। एक में स्टाफ की वास्तविक संख्या है और उन्हीं के आधार पर एक अन्य वेतन रजिस्टर भी है। दूसरे रजिस्टर में स्टाफ की संख्या और वेतन भी दोगुना ज्यादा दर्ज है। इसके लिए रजिस्टर में कई ऐसे लोगों के नाम लिखे गए हैं जिनका कोई वजूद नहीं है।
परिवार को ही बना दिया प्रोफेसर
कॉलेज में खर्च बढ़ाने के मकसद से प्रोफेसर और असिसटेंट प्रोफेसर की संख्या भी वास्तविकता से दोगुनी बताई गई है। फर्जी प्रोफेसरों में रमानी परिवार या उनके रिश्तेदारों के नाम भी लिखे हैं जिन्हें हर महीने मोटा वेतन जारी होता है।
डबल इंट्री सिस्टम
कॉलेज में बच्चों की संख्या दो तरह से दर्ज है। एक वास्तविक और दूसरी वास्तविक से कम जो कि सरकारी विभागों के लिए है। जैसे यदि 100 बच्चे हैं तो आॅन रिकॉर्ड 60 ही बताए जाते हैं। ज्यादातर फीस केश ली जाती है। इसीलिए 40 बच्चों की फीस ‘जो कि 60 हजार/सालाना से ज्यादा है’, सीधे संचालकों की जैब में जाती है।
नेट प्रॉफिट 35 प्रतिशत, बताया 4 प्रतिशत
समूह ने अपना नेट प्रॉफिट 4 प्रतिशत बता रखा है जबकि कार्रवाई के बाद आयकर अधिकारियों का अनुमान है कि नेट प्रोफिट 35 प्रतिशत तक है। अंतर सीधा 31 प्रतिशत का जो कि काली कमाई है।
रमानी के खिलाफ वॉरंट जारी
कार्रवाई के दौरान फरार हुए विजय रमानी का अब तक कोई पता नहीं चला। परिवार के लोग कभी बैंकॉक बताते हैं। कभी कहीं की। जांच में सहयोग न मिलने की स्थिति में इनकम टैक्स ने एसपी के नाम विजय का वारंट आॅफ प्रोडक्शन जारी कर दिया है। इसका मतलब यह है कि अब विजय को इनकम टैक्स के सामने पेश करने की जिम्मेदारी एसपी, भोपाल की होगी। वारंट के बाद रमानी बंधु का रूख बदला है और वे जांच में सहयोग कर रहे हैं।
रीयल एस्टेट के धुरंधर खिलाड़ी
रमानी परिवार में रीयल एस्टेट की कमानी विजय ने संभाल रखी है। अयोध्यानगर के पास इस परिवार की एक टाउनशीप है जहां मंदी के बीच भी फटाफट फ्लैट बिक गए। समूह ने हरदा में भी कॉलोनी काट रखी है।
कर्मचारियों ने छिपाए थे कम्प्यूटर
ईशान बिल्डर के आॅफिस पर जब रेड हुई तो वहां के कर्मचारियों ने दो कम्प्यूटर एक कार में छिपा दिए थे। इन कम्प्यूटर में रमानी परिवार की काली कमाई का कच्चा चिट्ठा है। डिप्टी डायरेक्टर इनकम टैक्स सन्नी कछवाह ने सिस्टम पकड़े और डाटा रिकवर किया।

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