इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
जीएसटी आजादी के बाद अप्रत्यक्ष करों के सुधार में सबसे सार्थक कदम है। जीएसटी के अंतर्गत जिस राज्य मे माल की खपत होगी, उसी राज्य को इसका राजस्व मिलेगा। चूंकि मप्र की गिनती कंस्यूमर स्टेट के रूप में होती है इसीलिए जीएसटी से यहां राजस्व बढ़ना तय है। इंडियन कन्फेक्शनरी मेन्यूफेक्चरर्स (आईसीएम) द्वारा आयोजित आॅल इंडिया कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यह बात वाणिज्यिक कर उपायुक्त सुदीप गुप्ता ने कही।
नक्षत्र गार्डन में संपन्न हुई एक दिवसीय कॉन्फ्रेंस के पहले सत्र को संबोधित करते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि जीएसटी काउंसिल का गठन केन्द्रीय मंत्रिमंडल के द्वारा कर दिया गया है। काउंसिल द्वारा कर से मुक्त वस्तुएं एवं सेवाओं का निर्धारण, कर की दरों का निर्धारण, थ्रेसहोल्ड लिमीट का निर्धारण आदि कार्य किया जाना है। काउंसिल की प्रथम मिटींग इसी माह 22 एवं 23 तारीख को होना है। जीएसटी वैज्ञानिक रूप से तैयार की गई कर प्रणाली है। जिसमें व्याप्त पारदर्शिता के कारण व्यापार करना सरल होगा।
रूकेगी टैक्स चोरी
वरिष्ठ कर सलाहकार आर.एस.गोयल ने बताया कि जीएसटी के अंतर्गत प्रथम बिंदु पर ही कर वसुल लिया जाएगा। अत: जीएसटी के अंतर्गत टैक्स चोरी की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी जिसके परिणामस्वरूप राजस्व मे वृध्दि होने से निकट भविष्य मे कर की दरें कम होगी।
12 महीने में बिल नहीं तो क्रेडिट नहीं
श्री गोयल ने बताया जीएसटी लागु होने के दिनांक को जो स्टॉक शेष रह जाएगा उस स्टॉक का इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने के लिए व्यवसायियों को उससे संबंधित बिल प्रस्तुत करना होंगे। किन्तु यदि ऐसे बिल 12 माह की अवधि के पहले के होंगे तो इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त नही होगा।
लाभ : चूंकि जीएसटी के अंतर्गत ऐसी वस्तुएं जिन पर वर्तमान में एक्साइज डयूटी, सीएसटी, इंट्री टैक्स, वाणिज्यिक कर देय है उन पर वर्तमान मे 32 से 35 प्रतिशत की दर से अप्रत्यक्ष कर का दायित्व आता है जो जीएसटी के बाद घटकर 18 से 20 प्रतिशत रह जाएगा।
नुकसान : जिन वस्तुओं पर वर्तमान में 5 से 6 प्रतिशत टैक्स लगता है या जिन पर एक्साइज डयूटी नही लगती है उन पर भी जीएसटी में 6 से 12 प्रतिशत तक टैक्स देना पड़ सकता है।
जीएसटी आजादी के बाद अप्रत्यक्ष करों के सुधार में सबसे सार्थक कदम है। जीएसटी के अंतर्गत जिस राज्य मे माल की खपत होगी, उसी राज्य को इसका राजस्व मिलेगा। चूंकि मप्र की गिनती कंस्यूमर स्टेट के रूप में होती है इसीलिए जीएसटी से यहां राजस्व बढ़ना तय है। इंडियन कन्फेक्शनरी मेन्यूफेक्चरर्स (आईसीएम) द्वारा आयोजित आॅल इंडिया कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यह बात वाणिज्यिक कर उपायुक्त सुदीप गुप्ता ने कही।
नक्षत्र गार्डन में संपन्न हुई एक दिवसीय कॉन्फ्रेंस के पहले सत्र को संबोधित करते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि जीएसटी काउंसिल का गठन केन्द्रीय मंत्रिमंडल के द्वारा कर दिया गया है। काउंसिल द्वारा कर से मुक्त वस्तुएं एवं सेवाओं का निर्धारण, कर की दरों का निर्धारण, थ्रेसहोल्ड लिमीट का निर्धारण आदि कार्य किया जाना है। काउंसिल की प्रथम मिटींग इसी माह 22 एवं 23 तारीख को होना है। जीएसटी वैज्ञानिक रूप से तैयार की गई कर प्रणाली है। जिसमें व्याप्त पारदर्शिता के कारण व्यापार करना सरल होगा।
रूकेगी टैक्स चोरी
वरिष्ठ कर सलाहकार आर.एस.गोयल ने बताया कि जीएसटी के अंतर्गत प्रथम बिंदु पर ही कर वसुल लिया जाएगा। अत: जीएसटी के अंतर्गत टैक्स चोरी की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी जिसके परिणामस्वरूप राजस्व मे वृध्दि होने से निकट भविष्य मे कर की दरें कम होगी।
12 महीने में बिल नहीं तो क्रेडिट नहीं
श्री गोयल ने बताया जीएसटी लागु होने के दिनांक को जो स्टॉक शेष रह जाएगा उस स्टॉक का इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने के लिए व्यवसायियों को उससे संबंधित बिल प्रस्तुत करना होंगे। किन्तु यदि ऐसे बिल 12 माह की अवधि के पहले के होंगे तो इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त नही होगा।
लाभ : चूंकि जीएसटी के अंतर्गत ऐसी वस्तुएं जिन पर वर्तमान में एक्साइज डयूटी, सीएसटी, इंट्री टैक्स, वाणिज्यिक कर देय है उन पर वर्तमान मे 32 से 35 प्रतिशत की दर से अप्रत्यक्ष कर का दायित्व आता है जो जीएसटी के बाद घटकर 18 से 20 प्रतिशत रह जाएगा।
नुकसान : जिन वस्तुओं पर वर्तमान में 5 से 6 प्रतिशत टैक्स लगता है या जिन पर एक्साइज डयूटी नही लगती है उन पर भी जीएसटी में 6 से 12 प्रतिशत तक टैक्स देना पड़ सकता है।
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