Friday, September 16, 2016

सीबीआई को भी नहीं मिलेगी घोषित संपत्ति की जानकारी

अंतिम चरण में आईडीएस को लेकर सीबीडीटी की पहल
इंदौर. विनोद शर्मा ।
आयकर विभाग की स्वघोषित आय स्कीम (आईडीएस) के तहत काली कमाई सरेंडर करने वालों की संख्या 30 सितंबर नजदीक आते-आते और बढ़ गई है। वहीं स्कीम के तहत अब तक प्रिंसिपल चीफ कमिश्नरेट (मप्र-छग) में 550 करोड़ तक काली कमाई सरेंडर हुई है। उधर,  सीबीडीटी ने स्पष्ट कर दिया है कि सरेंडर राशि के संबंध में किसी तरह की जानकारी कोर्ट को छोड़ किसी के साथ साझा नहीं की जा सकती। फिर भले वह टैक्सेशन डिपार्टमेंट हो या फिर सीबीआई जैसी इन्वेस्टिगेशन एजेंसी।
सितंबर के पहले हफ्ते तक डिक्लेरेशन की स्थिति कमजोर थी जो अब बढ़ चुकी है। मंत्रालय को 1 लाख करोड़ के खुलासे का अनुमान है। चूंकि स्कीम स्व: घोषणा की है इसीलिए अधिकारियों को टार्गेट नहीं दिए गए हैं। बावजूद इसके अब तक छत्तीसगढ़ में 300 करोड़ और मप्र में 250 करोड़ से ज्यादा सरेंडर हो चुके हैं। चीफ कमिश्नरेट इंदौर की स्थिति चीफ कमिश्नरेट भोपाल से बेहतर है। इंदौर में फर्जी लोन, फर्जी तरीके से लिए लॉन्ग टर्म केपिटल गेन (एलटीसीजी) और नकदी में होने वाले बिजनेस लेनदेन के मामले सामने आए हैं। यहां सरेंडर राशि का अनुमान 100 करोड़ से ज्यादा लगाया जा रहा है। हालांकि स्कीम की शर्तों का हवाला देते हुए अधिकारी डिक्लेरेशन की संख्या से लेकर डिक्लेयर इनकम तक की जानकरी नहीं दे रहे हैं। उनकी मानें तो आंकड़ा 30 सितंबर के बाद सार्वजनिक होगा।
आगे नहीं बढ़ेगी तारीख
स्कीम के तहत छह बार आ चुके सीबीडीटी के स्पष्टीकरण और टैक्स की राशि चुकाने के लिए बढ़ाई गई समयसीमा को देखते हुए आईडीएस की समयसीमा भी 30 सितंबर के बाद भी बढ़ाए जाने का कयास लगाया जा रहा था। इसके विपरीत बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया कि 30 सितंबर ही अंतिम मौका है। तारीख नहीं बढ़ेगी।
बड़े फायदे हैं स्कीम के...
- इनकम टैक्स डिक्लेयर जानकारी को सेंट्रल एक्साइज, सर्विस टैक्स, ईडी या वाणिज्यिक कर जैसे डिपार्टमेंट के साथ साझा नहीं कर सकता। इतना ही नहीं किसी भी लॉ इन्फोर्समेंट एजेंसी (सीबीआई, ईओडब्लयू, लोकायुक्त) को भी जानकारी नहीं दे सकता।
- अनक्लेम्ड टीडीएस की के्रडिट ली जा सकेगी। बेनामी संपत्ति खरीदते वक्त जो टीडीसी किसी अन्य नाम से चुकाया गया है उसे भी क्लैम किया जा सकता है।
- स्कीम के तहत 25 प्रतिशत की पहली किस्त का भुगतान नवंबर, 2016 तक करना है। 25 प्रतिशत की अगली किश्त 31 मार्च 2017 तक  चुकाना है। बाकी रकम 30 सितंबर 2017 तक चुकाना है। पहले समयसीमा सिर्फ 30 नवंबर थी।
तो बैंग्लुरू में फाइल कर दें डिक्लेरेशन
यदि किसी करदाता को लगता है कि उसके द्वारा स्कीम में घोषित की गई जानकारियां स्थानीय अधिकारी लीक कर सकते हैं या उसे दूसरे विभागों से साझा कर सकते हैं, सार्वजनिक कर सकते हैं। ऐसे करदाता सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (सीपीसी) बैंग्लुरू के कमिश्नर इनकम टैक्स के समक्ष अपना डिक्लेरेशन फाइल कर सकते हैं।

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