बचने के लिए कहते हैं आरटीओ के कारण हटाए लोगों को बसा रहे हैं
इंदौर. विनोद शर्मा ।
शासन और प्रशासन की तमाम सख्त कार्रवाइयों के बावजूद इंदौर में भू-माफियाओं की मनमानी जारी है। रालामंडल अभ्यारण्य के ठीक पीछे ढ़ाई एकड़ जमीन पर आकार ले रही सोनकर बंधुओं की कॉलोनी इसका बड़ा उदाहरण है। तकरीबन डेढ़ सौ प्लॉट की इस कॉलोनी में तीन से साढ़े तीन लाख रुपए में 600-600 वर्गफीट के प्लॉट थमाए गए हैं। सरपंच की शिकायत और कार्रवाई को लेकर कलेक्टर द्वारा दिए आश्वासन के बावजूद कॉलोनी में 90 फीसदी प्लॉट बिक चुके हैं।
मामला बिहाड़िया के सर्वे नं. 230/1 की 1.080 हेक्टेयर (करीब ढ़ाई एकड़) जमीन का है। राजस्व रिकार्ड में राजकुमार पिता देवनारायण कुमावत के नाम से चढ़ी इस जमीन पर दो महीने से कॉलोनी कट रही है। मुरम की सड़क बिछाकर 15 बाय 40 (600 वर्गफीट) के कुल 168 प्लॉट निकाले गए थे जिसमें से 130 प्लॉट बेचे जा चुके हैं। कुमावत की मानें तो वह जमीन कमल सोनकर और विकास सोनकर को बेच चुका है। अभी आधी जमीन की रजिस्ट्री हुई है, आधी की होना है इसीलिए राजस्व रिकार्ड पर उनका नाम चढ़ा हुआ है। कॉलोनी कमल सोनकर, विकास सोनकर और सुंदरलाल मालवीय काट रहे हैं जो मुलत: पालदा के रहने वाले हैं।
न बिजली के खम्बे, न पानी
जिस जमीन पर कॉलोनी काटकर 3 से 3.5 लाख रुपए में 130 से ज्यादा प्लॉट बेचे जा चुके हैं वहां मुरम की कच्ची सड़क के अलावा कोई जनसुविधा नहीं है। फिर बात बिजली की हो या पानी की। डेÑनेज, बगीचे और ट्रांसफार्मर की बात तो दूर है। दबंग स्टींग के दौरान कॉलोनाइजर ने कहा था कि सुविधा देते तो तीन लाख में प्लॉट कैसे देते। हम सिर्फ कॉलोनी काट रहे हैं, सुविधा पंचायत देगी। सरपंच जगदीश यादव से बात हो चुकी है।
जनहित की आड़ में खेल
कॉलोनाइजर कॉलोनी को जनहित से जोड़कर बताता है उनकी मानें तो तीन लाख में प्लॉट बेचकर लोगों की सेवा ही कर रहे हैं, इसमें मिलता क्या है। वहीं जब मौके पर अनुमति की बात करें तो कॉन्फिडेंस के साथ कॉलोनाइजर कहता है पालदा आॅफिस आ जाओ, सभी अनुमतियां है।
कोई अनुमति नहीं ली है
2015 से मैं सरपंच हूं अब तक कॉलोनी को लेकर कोई व्यक्ति अनुमति लेने नहीं आया है। कुछ प्लॉट होल्डर जरूर आए थे, तब मैंने कलेक्टर को शिकायत की थी। दो महीने हो चुके हैं। अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जगदीश यादव, सरपंच
कॉलोनी से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। न हमने अनुमति दी थी। सब झूठ बोल रहे हैं।
किरण अनुराग, पूर्व सरपंच
कॉलोनी से लेना-देना नहीं है मेरा। मैं प्रॉपर्टी ब्रोकर हूं और राजू कुमावत से सोनकर बंधुओं को जमीन दिलाने का ही काम किया है। नायता मुंडला में आरटीओ बनने के दौरान जो लोग हटाए गए थे उन्हें पूर्व सरपंच किरण अनुराग विस्थापित कर रही थी।
संदीप यादव
कमल और विकास सोनकर को है। ढ़ाई एकड़ है। सेलडीड है। पेमेंट पूरा नहीं है। हमने तो जमीन बेच दी। फंसे तो सोनकर फंसे। सवा एकड़ की रजिस्ट्री हुई है।
राजकुमार कुमावत, जमीन मालिक
कॉलोनी नहीं, जनहित है
बिहाड़िया में आप अवैध कॉलोनी काट रहे हैं?
नहीं, अनुमति है। पंचायत से।
सरपंच/पूर्व सरंपच कहते हैं अनुमति नहीं है?
आपको क्या आपत्ति है।
मतलब आप कॉलोनी काट रहे हैं?
कॉलोनी नहीं है। कांकड़ से हटाए लोगों को डेढ़-दो लाख रुपए में प्लॉट देकर विस्थापित किया है।
यह काम आपका तो नहीं है?
पर कर दिया, जनहित में।
साढ़े तीन लाख में 600 वर्गफीट, रोड से 4 किलोमीटर अंदर, कैसा जनहित?
आप तो आ जाओ, बैठकर बात कर लेंगे।
विकास सोनकर, कॉलोनाइजर
इंदौर. विनोद शर्मा ।
शासन और प्रशासन की तमाम सख्त कार्रवाइयों के बावजूद इंदौर में भू-माफियाओं की मनमानी जारी है। रालामंडल अभ्यारण्य के ठीक पीछे ढ़ाई एकड़ जमीन पर आकार ले रही सोनकर बंधुओं की कॉलोनी इसका बड़ा उदाहरण है। तकरीबन डेढ़ सौ प्लॉट की इस कॉलोनी में तीन से साढ़े तीन लाख रुपए में 600-600 वर्गफीट के प्लॉट थमाए गए हैं। सरपंच की शिकायत और कार्रवाई को लेकर कलेक्टर द्वारा दिए आश्वासन के बावजूद कॉलोनी में 90 फीसदी प्लॉट बिक चुके हैं।
मामला बिहाड़िया के सर्वे नं. 230/1 की 1.080 हेक्टेयर (करीब ढ़ाई एकड़) जमीन का है। राजस्व रिकार्ड में राजकुमार पिता देवनारायण कुमावत के नाम से चढ़ी इस जमीन पर दो महीने से कॉलोनी कट रही है। मुरम की सड़क बिछाकर 15 बाय 40 (600 वर्गफीट) के कुल 168 प्लॉट निकाले गए थे जिसमें से 130 प्लॉट बेचे जा चुके हैं। कुमावत की मानें तो वह जमीन कमल सोनकर और विकास सोनकर को बेच चुका है। अभी आधी जमीन की रजिस्ट्री हुई है, आधी की होना है इसीलिए राजस्व रिकार्ड पर उनका नाम चढ़ा हुआ है। कॉलोनी कमल सोनकर, विकास सोनकर और सुंदरलाल मालवीय काट रहे हैं जो मुलत: पालदा के रहने वाले हैं।
न बिजली के खम्बे, न पानी
जिस जमीन पर कॉलोनी काटकर 3 से 3.5 लाख रुपए में 130 से ज्यादा प्लॉट बेचे जा चुके हैं वहां मुरम की कच्ची सड़क के अलावा कोई जनसुविधा नहीं है। फिर बात बिजली की हो या पानी की। डेÑनेज, बगीचे और ट्रांसफार्मर की बात तो दूर है। दबंग स्टींग के दौरान कॉलोनाइजर ने कहा था कि सुविधा देते तो तीन लाख में प्लॉट कैसे देते। हम सिर्फ कॉलोनी काट रहे हैं, सुविधा पंचायत देगी। सरपंच जगदीश यादव से बात हो चुकी है।
जनहित की आड़ में खेल
कॉलोनाइजर कॉलोनी को जनहित से जोड़कर बताता है उनकी मानें तो तीन लाख में प्लॉट बेचकर लोगों की सेवा ही कर रहे हैं, इसमें मिलता क्या है। वहीं जब मौके पर अनुमति की बात करें तो कॉन्फिडेंस के साथ कॉलोनाइजर कहता है पालदा आॅफिस आ जाओ, सभी अनुमतियां है।
कोई अनुमति नहीं ली है
2015 से मैं सरपंच हूं अब तक कॉलोनी को लेकर कोई व्यक्ति अनुमति लेने नहीं आया है। कुछ प्लॉट होल्डर जरूर आए थे, तब मैंने कलेक्टर को शिकायत की थी। दो महीने हो चुके हैं। अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जगदीश यादव, सरपंच
कॉलोनी से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। न हमने अनुमति दी थी। सब झूठ बोल रहे हैं।
किरण अनुराग, पूर्व सरपंच
कॉलोनी से लेना-देना नहीं है मेरा। मैं प्रॉपर्टी ब्रोकर हूं और राजू कुमावत से सोनकर बंधुओं को जमीन दिलाने का ही काम किया है। नायता मुंडला में आरटीओ बनने के दौरान जो लोग हटाए गए थे उन्हें पूर्व सरपंच किरण अनुराग विस्थापित कर रही थी।
संदीप यादव
कमल और विकास सोनकर को है। ढ़ाई एकड़ है। सेलडीड है। पेमेंट पूरा नहीं है। हमने तो जमीन बेच दी। फंसे तो सोनकर फंसे। सवा एकड़ की रजिस्ट्री हुई है।
राजकुमार कुमावत, जमीन मालिक
कॉलोनी नहीं, जनहित है
बिहाड़िया में आप अवैध कॉलोनी काट रहे हैं?
नहीं, अनुमति है। पंचायत से।
सरपंच/पूर्व सरंपच कहते हैं अनुमति नहीं है?
आपको क्या आपत्ति है।
मतलब आप कॉलोनी काट रहे हैं?
कॉलोनी नहीं है। कांकड़ से हटाए लोगों को डेढ़-दो लाख रुपए में प्लॉट देकर विस्थापित किया है।
यह काम आपका तो नहीं है?
पर कर दिया, जनहित में।
साढ़े तीन लाख में 600 वर्गफीट, रोड से 4 किलोमीटर अंदर, कैसा जनहित?
आप तो आ जाओ, बैठकर बात कर लेंगे।
विकास सोनकर, कॉलोनाइजर
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