सिंधी सहकारी संस्था
- चहेतों को बचाने के लिए उनके नाम से लोन लेकर चुका तक दिया
- सुबह दी सदस्यता और शाम को लोन थमा दिया
इंदौर. विनोद शर्मा ।
लोन न लेने या लोन लेकर न चुकाने वाले 671 सदस्यों को बाहर कर देने वाले सिंधू सहकारी साख संस्था के संचालकों ने अपने चहेतों को संस्था में बनाए रखने के लिए लोन के नाम पर जमकर हेराफेरी की है। नियम कायदों को एक तरफ रखकर सुबह सदस्य बनाएं और शाम को लोन थमा दिया। दबंग दुनिया के पास ऐसे भी उदाहरण हैं जिनके नाम से संचालकों ने ही लोन लिया और उन्हीं ने चुका दिया ताकि सदस्य बैंक आए न आए लेकिन उसकी सदस्यता बरकरार रहे।
संस्था में 2601 सदस्य हैं। 2012 में हुए चुनाव के दौरान तय हुआ था कि कर्ज लेने वाले या न लेने वाले दोनों तरह के सदस्य चुनाव में भाग ले सकते हैं। संचालकों ने इसमें बालेबाले संसोधन कर दिया। सिर्फ कर्ज लेने वाले ही मतदान के पात्र कहते हुए 671 सदस्यों को बेदखल कर दिया। वहीं दीपक छोड़वानी ‘बाबा’ जैसे कुछ नाम ऐसे हैं जिन्हें संचालकों की मर्जी पर सुबह सदस्यता मिली और शाम तक लोन भी मिल गया।
पहले बोर्ड बैठक, फिर ऋृणसमिति की
27 नवंबर को संस्था की बोर्ड बैठक हुई। बैठक में 671 सदस्यों को बाहर करने का फैसला लिया गया। वहीं इसी दिन शाम को ऋृण समिति की बैठक हुई। बैठक में छोटे-बड़े लोन के 67 मामलों को अनुशंसा की। इसमें कई सदस्य ऐसे हैं जिन्हें सदस्यता दी गई और एक-दो दिन बाद ही लोन दे दिया गया। 28 नवंबर को सदस्यता सूची प्रकाशन के लिए सहकारिता विभाग को सौंप दी गई।
क्यों उठी अंगुली : संचालकों को सदस्यता बरकरार रखने के लिए लोन लेना जरूरी है यह सूचना हर सदस्य तक पहुंचाना थी। 27 नवंबर की शाम तक आवेदन लिए जाते, हो सकता है ऋृणसमिति की बैठक में मामलों की संख्या 67 से बढ़कर 350 से 450 तक हो जाती। करना क्या था एक आवेदन ही तो भरना था जो हाथोहाथ भरा जा सकता था।
रेवड़ी की तरह बंटा कर्ज
जिन लोगों को नई सदस्यता के साथ लोन दिए गए उनमें संस्थाध्यक्ष प्रकाश लालवानी के रिश््तेदार, भू-माफिया रणवीरसिंह छाबड़ा उर्फ बॉबी के सर्वानंद संस्था में खासमखास सिपाहसालार गोपाल दरियानी के रिश्तेदार शामिल हैं। कुछ मामले ऐसे हैं जिनमें लालवानी और दरियानी ने लोगों से आवेदन साइन करवाए, खुद ही लोन लिया और दूसरे दिन चुका भी दिया। ताकि उनकी सदस्यता बरकरार रहे। इसमें लालवानी के रिश्तेदार महेश जमुनादास लालवानी से लेकर गोपाल दरियानी के रिश्तेदार महेश ओटवानी तक शामिल हैं।
जिन्हें मिला लोन
हितेश दरियानी 2000
आकाश पठेजा 1500
प्रियंका दरियानी 2000
वर्षा छोड़वानी 1500
एक ही परिवार में बांटा लोन
इंदर पठेजा 2000
कोमल पठेजा 2000
प्रियांशी पठेजा 2000
धीरज कुंडल 5000
पूजा कुंडल 5000
योगेश कुंडल 5000
उमेश कुंडल 5000
लता कुंडल 5000
(पठेजा परिवार के धीरज को चुनाव में खड़े करने का प्रलोभन भी दिया जा रहा है।)
यह है सदस्यता और लोन प्रक्रिया
सदस्यता : सिंधी समाज का कोई भी व्यक्ति फोटो व आईडी के साथ आवेदन कर सकता है। संस्था की कमेटी आवेदक की छानबीन करती है। हरी झंडी मिलने के बाद सदस्य को 8600 सदस्यता शुल्क जमा करने का पत्र भेजा जाता है। सदस्यता शुल्क जमा होने के बाद सदस्यता नंबर जारी होता है।
लोन : जिसने सदस्यता शुल्क जमा कर दिया है वह भी लोन के लिए पात्र होता है। लोन समिति की बैठक हर मंगलवार को होती है। आवेदक द्वारा किए गए आवेदन पर इसी समिति में अनुसंशा होती है। दबाव-प्रभाव से लोन पहले भी करा लिया जाता है।
- चहेतों को बचाने के लिए उनके नाम से लोन लेकर चुका तक दिया
- सुबह दी सदस्यता और शाम को लोन थमा दिया
इंदौर. विनोद शर्मा ।
लोन न लेने या लोन लेकर न चुकाने वाले 671 सदस्यों को बाहर कर देने वाले सिंधू सहकारी साख संस्था के संचालकों ने अपने चहेतों को संस्था में बनाए रखने के लिए लोन के नाम पर जमकर हेराफेरी की है। नियम कायदों को एक तरफ रखकर सुबह सदस्य बनाएं और शाम को लोन थमा दिया। दबंग दुनिया के पास ऐसे भी उदाहरण हैं जिनके नाम से संचालकों ने ही लोन लिया और उन्हीं ने चुका दिया ताकि सदस्य बैंक आए न आए लेकिन उसकी सदस्यता बरकरार रहे।
संस्था में 2601 सदस्य हैं। 2012 में हुए चुनाव के दौरान तय हुआ था कि कर्ज लेने वाले या न लेने वाले दोनों तरह के सदस्य चुनाव में भाग ले सकते हैं। संचालकों ने इसमें बालेबाले संसोधन कर दिया। सिर्फ कर्ज लेने वाले ही मतदान के पात्र कहते हुए 671 सदस्यों को बेदखल कर दिया। वहीं दीपक छोड़वानी ‘बाबा’ जैसे कुछ नाम ऐसे हैं जिन्हें संचालकों की मर्जी पर सुबह सदस्यता मिली और शाम तक लोन भी मिल गया।
पहले बोर्ड बैठक, फिर ऋृणसमिति की
27 नवंबर को संस्था की बोर्ड बैठक हुई। बैठक में 671 सदस्यों को बाहर करने का फैसला लिया गया। वहीं इसी दिन शाम को ऋृण समिति की बैठक हुई। बैठक में छोटे-बड़े लोन के 67 मामलों को अनुशंसा की। इसमें कई सदस्य ऐसे हैं जिन्हें सदस्यता दी गई और एक-दो दिन बाद ही लोन दे दिया गया। 28 नवंबर को सदस्यता सूची प्रकाशन के लिए सहकारिता विभाग को सौंप दी गई।
क्यों उठी अंगुली : संचालकों को सदस्यता बरकरार रखने के लिए लोन लेना जरूरी है यह सूचना हर सदस्य तक पहुंचाना थी। 27 नवंबर की शाम तक आवेदन लिए जाते, हो सकता है ऋृणसमिति की बैठक में मामलों की संख्या 67 से बढ़कर 350 से 450 तक हो जाती। करना क्या था एक आवेदन ही तो भरना था जो हाथोहाथ भरा जा सकता था।
रेवड़ी की तरह बंटा कर्ज
जिन लोगों को नई सदस्यता के साथ लोन दिए गए उनमें संस्थाध्यक्ष प्रकाश लालवानी के रिश््तेदार, भू-माफिया रणवीरसिंह छाबड़ा उर्फ बॉबी के सर्वानंद संस्था में खासमखास सिपाहसालार गोपाल दरियानी के रिश्तेदार शामिल हैं। कुछ मामले ऐसे हैं जिनमें लालवानी और दरियानी ने लोगों से आवेदन साइन करवाए, खुद ही लोन लिया और दूसरे दिन चुका भी दिया। ताकि उनकी सदस्यता बरकरार रहे। इसमें लालवानी के रिश्तेदार महेश जमुनादास लालवानी से लेकर गोपाल दरियानी के रिश्तेदार महेश ओटवानी तक शामिल हैं।
जिन्हें मिला लोन
हितेश दरियानी 2000
आकाश पठेजा 1500
प्रियंका दरियानी 2000
वर्षा छोड़वानी 1500
एक ही परिवार में बांटा लोन
इंदर पठेजा 2000
कोमल पठेजा 2000
प्रियांशी पठेजा 2000
धीरज कुंडल 5000
पूजा कुंडल 5000
योगेश कुंडल 5000
उमेश कुंडल 5000
लता कुंडल 5000
(पठेजा परिवार के धीरज को चुनाव में खड़े करने का प्रलोभन भी दिया जा रहा है।)
यह है सदस्यता और लोन प्रक्रिया
सदस्यता : सिंधी समाज का कोई भी व्यक्ति फोटो व आईडी के साथ आवेदन कर सकता है। संस्था की कमेटी आवेदक की छानबीन करती है। हरी झंडी मिलने के बाद सदस्य को 8600 सदस्यता शुल्क जमा करने का पत्र भेजा जाता है। सदस्यता शुल्क जमा होने के बाद सदस्यता नंबर जारी होता है।
लोन : जिसने सदस्यता शुल्क जमा कर दिया है वह भी लोन के लिए पात्र होता है। लोन समिति की बैठक हर मंगलवार को होती है। आवेदक द्वारा किए गए आवेदन पर इसी समिति में अनुसंशा होती है। दबाव-प्रभाव से लोन पहले भी करा लिया जाता है।
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