पार्क की जमीन पर तान दिया होस्टल
इंदौर. विनोद शर्मा ।
पंचायत की कथित अनुमति का हवाला देकर बिना नगर निगम की स्वीकृति के एक बाद एक बिल्डिंग तान रहे ट्रूबा कॉलेज ने बगीचे की आरक्षित जमीन पर ही होस्टल की चार मंजिला इमारत तान दी। इतना ही नहीं होस्टल के सामने भी तकरीबन 10 हजार वर्गफीट जमीन पर एक बिल्डिंग का काम और शुरू कर दिया। बहरहाल, नगर निगम की आपत्ति के बाद निर्माण रूका हुआ है।
कैलोद करताल की 452476.2 वर्गफीट जमीन पर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने कॉलेज का जो नक्शा मंजूर किया था उसमें दक्षीण की ओर 43851 वर्गफीट जमीन पार्क के लिए आरक्षित छोड़ी गई थी। सागर इंस्टिट्यूट आॅफ रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी ने ट्रूबा कॉलेज खरीदने के बाद एक तरफ जी+2 बनी पुरानी बिल्डिंग को विस्तार दिया तो दूसरी तरफ पार्क के लिए आरक्षित इस जमीन पर जी+4 होस्टल तान दिया। होस्टल तकरीबन 30 हजार वर्गफीट पर बना हुआ है। इस होस्टल के सामने 10 हजार वर्गफीट जमीन पर एक भवन का निर्माण और बीते दिनों शुरू हुआ है।
ओपन स्पेस को कवर नहीं कर सकते
टीएंडसीपी के अधिकारियों ने बताया कि 2005 में जिस वक्त कॉलेज का नक्शा मंजूर हुआ था उस वक्त गांव और गांव की जमीन प्लानिंग एरिया से बाहर थी। मास्टर प्लान 2021 जनवरी 2008 में मंजूर हुआ जिसमें गांव प्लानिंग एरिया में आया। चूंकि कॉलेज के नक्शे की डेडलाइन जनवरी 2008 तक थी इसीलिए 2008-09 में रिवाइज प्लान प्रस्तुत किया था लेकिन उसमें खूले क्षेत्र को बिल्डिंग से कवर करने की अनुमति नहीं दी गई। न ही दी जा सकती है।
एमओएस भी हजम किया है
कॉलेज प्रबंधन ने एमओएस भी कवर किया है। कॉलेज की बिल्डिंग के पास किसी डिपार्टमेंट की बिल्डिंग बनाई जा रही है और उसके सटाकर आॅडिटोरियम बन रहा है। आॅडिटोरियम से सटा हुआ केंटिन भी है।
पटवारी की विधायक के नाम पर धाक
ट्रूबा कॉलेज में भी विधायक जीतू पटवारी का बोलबाला है। उनके नाम को ऊंचाई देने और कॉलेज को सरकारी बलाओं से बचाने की जिम्मेदारी कॉलेज प्रबंधन ने अनिल पटवारी को दे रखी है जो कि रिश्ते में जीतू का रिश्तेदार है। कॉलेज को जमीन दिलाने से लेकर बाद में कॉलेज की नौकरी करते रहे अनिल पटवारी को केंटिन दिलाने तक में जीतू की भूमिका अहम रही। कैलोद करताल पंचायत ‘जो निगम सीमा में विलय हो चुकी है’ से लेकर नगर निगम के अधिकारी तक का कहना है कि पटवारी विधायक का नाम लेकर बार-बार कार्रवाई में अडंगे लगा रहा है। अनिल स्वयं को कॉलेज का एस्टेट इन चीफ और लाइजनर बताता है।
इंदौर. विनोद शर्मा ।
पंचायत की कथित अनुमति का हवाला देकर बिना नगर निगम की स्वीकृति के एक बाद एक बिल्डिंग तान रहे ट्रूबा कॉलेज ने बगीचे की आरक्षित जमीन पर ही होस्टल की चार मंजिला इमारत तान दी। इतना ही नहीं होस्टल के सामने भी तकरीबन 10 हजार वर्गफीट जमीन पर एक बिल्डिंग का काम और शुरू कर दिया। बहरहाल, नगर निगम की आपत्ति के बाद निर्माण रूका हुआ है।
कैलोद करताल की 452476.2 वर्गफीट जमीन पर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने कॉलेज का जो नक्शा मंजूर किया था उसमें दक्षीण की ओर 43851 वर्गफीट जमीन पार्क के लिए आरक्षित छोड़ी गई थी। सागर इंस्टिट्यूट आॅफ रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी ने ट्रूबा कॉलेज खरीदने के बाद एक तरफ जी+2 बनी पुरानी बिल्डिंग को विस्तार दिया तो दूसरी तरफ पार्क के लिए आरक्षित इस जमीन पर जी+4 होस्टल तान दिया। होस्टल तकरीबन 30 हजार वर्गफीट पर बना हुआ है। इस होस्टल के सामने 10 हजार वर्गफीट जमीन पर एक भवन का निर्माण और बीते दिनों शुरू हुआ है।
ओपन स्पेस को कवर नहीं कर सकते
टीएंडसीपी के अधिकारियों ने बताया कि 2005 में जिस वक्त कॉलेज का नक्शा मंजूर हुआ था उस वक्त गांव और गांव की जमीन प्लानिंग एरिया से बाहर थी। मास्टर प्लान 2021 जनवरी 2008 में मंजूर हुआ जिसमें गांव प्लानिंग एरिया में आया। चूंकि कॉलेज के नक्शे की डेडलाइन जनवरी 2008 तक थी इसीलिए 2008-09 में रिवाइज प्लान प्रस्तुत किया था लेकिन उसमें खूले क्षेत्र को बिल्डिंग से कवर करने की अनुमति नहीं दी गई। न ही दी जा सकती है।
एमओएस भी हजम किया है
कॉलेज प्रबंधन ने एमओएस भी कवर किया है। कॉलेज की बिल्डिंग के पास किसी डिपार्टमेंट की बिल्डिंग बनाई जा रही है और उसके सटाकर आॅडिटोरियम बन रहा है। आॅडिटोरियम से सटा हुआ केंटिन भी है।
पटवारी की विधायक के नाम पर धाक
ट्रूबा कॉलेज में भी विधायक जीतू पटवारी का बोलबाला है। उनके नाम को ऊंचाई देने और कॉलेज को सरकारी बलाओं से बचाने की जिम्मेदारी कॉलेज प्रबंधन ने अनिल पटवारी को दे रखी है जो कि रिश्ते में जीतू का रिश्तेदार है। कॉलेज को जमीन दिलाने से लेकर बाद में कॉलेज की नौकरी करते रहे अनिल पटवारी को केंटिन दिलाने तक में जीतू की भूमिका अहम रही। कैलोद करताल पंचायत ‘जो निगम सीमा में विलय हो चुकी है’ से लेकर नगर निगम के अधिकारी तक का कहना है कि पटवारी विधायक का नाम लेकर बार-बार कार्रवाई में अडंगे लगा रहा है। अनिल स्वयं को कॉलेज का एस्टेट इन चीफ और लाइजनर बताता है।
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