- डिपार्टमेंट के हाथ लगा दस्तावेजों का जखिरा
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
कस्टम, सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट ने आईबीडी समूह पर शुक्रवार को जो छापेमार कार्रवाई की थी उसमें सर्विस टैक्स चोरी से संबधित बड़ी मात्रा में दस्तावेज बरामद हुए हैं। कंपनी ने कीमत बाजार मुल्य पर ली और रजिस्ट्री गाइडलाइन दरों पर कराकर सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट से लेकर इनकम टैक्स तक को चपत लगाई है। कंपनी इन्वेस्टर्स समिट में करोड़ों के निवेश और सैकड़ों नौकरियों का सब्जबाग दिखाकर ‘शिव’ सरकार को ठेंगा दिखा चुकी है।
कार्रवाई के दौरान जो दस्तावेज हाथ लगे हैं उन्होंने अधिकारियों को चौका दिया है। बिल्डर ने ऐसा कोई तरीका नहीं छोड़ा जिससे सर्विस टैक्स या इनकम टैक्स जैसे डिपार्टमेंट की आंख में धूल झौंकी जा सके। टैक्स बचाया जा सके। अब अधिकारियों का आंकलन है कि समूह द्वारा चुराये गए सर्विस टैक्स का आंकड़ा एक करोड़ तक जा सकता है।
कम लागत, ज्यादा मुनाफा : संकट में खरीदार
सरकारी मेहरबानी के तो क्या कहने जिसके चलते कंपनी ने भोपाल में सरकारी जमीन पर कब्जा करके बहुमंजिला इमारतें तान दी। वहीं कम लागत और ज्यादा मुनाफे के चक्कर में इंदौर में इंडस सेटेलाइट जैसी टाउनशीप विकसित की जहां छह बजे के बाद जाना खतरे से खाली नहीं रहता। यही स्थिति केलिफोर्निया सिटी में बने आईबीडी के 200 बंगलों की है। यह टाउनशीप भी बायपास से आठ किलोमीटर दूर है।
2012 में आयकर ने भी मारा था छापा
29 नवंबर 2012 को इनकम टैक्स की इन्वेस्टिगेशन विंग ने सोम्या ग्रुप, अमृत होम्स, फॉर्च्यून ग्रुप के साथ आईबीडी पर सर्च की थी। इसमें बड़ा कारोबार सामने आया था। इस छापे ने कंपनी की कमर तोड़ दी। कंपनी को बेलमोंट पार्क का प्रोजेक्ट छोड़ना पड़ा।
इंडस बिल्डर्स एंड डव्लपर्स : मालिक विनय भदौरिया
साम्राज्य : इंडस हॉलीडे एंड टूर ट्रेवल्स प्राइवेट लिमिटेड, इंडस इंफोकॉम, प्राइवेट लिमिटेड, इंडस सेवन, एसईएएस एक्पोर्टस प्राइवेट मिमिटेड, मेडिकल ट्रांसक्रपशन (बीपीओ ) समेत अन्य क्षेत्र में करोड़ों का कारोबार।
प्रोजेक्ट : भोपाल, होशंगाबाद, इंदौर, जबलपुर, रायपुर और उप्र के आगरा में प्रोजेक्ट जारी। इंडस टॉउन, आईबीडी हॉलमॉर्क सिटी कोलार, किंग्स पार्क सलैया, रॉयलस पार्क रायसेन रोड़, आयोध्या बायपास पर डुप्लेक्स की श्रृंखला।
पांच में से दो कंपनियां ही पंजीबद्ध
सर्विस टैक्स ने जिस आईबीडी ग्रुप पर कार्रवाई की उसने 2012 की इन्वेस्टर्स समिट में 780 करोड़ रुपए के एमओयू साइन किए थे। इसमें भी बड़ा फर्जीवाड़ा किया था। आईबीडी की जिन पांच अलग-अलग फर्मों ने इंदौर में नवेश प्रस्ताव दिए हैं उनसे से दो ही कंपनियां ऐसी है जो पंजीबद्ध है। इनमें आईबीडी स्पेस इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि और आईबीडी यूनिवर्सल प्रा.लि. शामिल है। वहीं आईबीडी निरुपम बिल्डर्स एंड डेवलपर्स, आईबीडी रियलिटी डेवलपर्स और आईबीडी शिल्पी डेवलपर्स ऐसी कंपनियां हैं जिनका पंजीयन नहीं हुआ। न कंपनियों का कंपनी आईडेंटिफिकेशन नंबर (सिन)जारी हुआ। न ही संचालकों का डायरेक्टर आईडेंटिफिकेशन नंबर(डिन)।
कंपनी प्रोजेक्ट एमओयू रोजगार
कंपनी लागत रोजगार
आईबीडी निरुपम बिल्डर्स एंड डेवलपर्स इंटीग्रेटेड टाउनशिप 150 295
आईबीडी रियलिटी डेवलपर्स मिडराइस अपार्टमेंट 180 295
आईबीडी शिल्पी डेवलपर्स मिडराइस अपार्टमेँट 93 145
आईबीडी स्पेस इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. प्रिमियम-मिडराइस 192 227
आईबीडी यूनिवर्सल प्रा.लि. इंटीग्रेटेड टाउनशिप 165 255
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
कस्टम, सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट ने आईबीडी समूह पर शुक्रवार को जो छापेमार कार्रवाई की थी उसमें सर्विस टैक्स चोरी से संबधित बड़ी मात्रा में दस्तावेज बरामद हुए हैं। कंपनी ने कीमत बाजार मुल्य पर ली और रजिस्ट्री गाइडलाइन दरों पर कराकर सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट से लेकर इनकम टैक्स तक को चपत लगाई है। कंपनी इन्वेस्टर्स समिट में करोड़ों के निवेश और सैकड़ों नौकरियों का सब्जबाग दिखाकर ‘शिव’ सरकार को ठेंगा दिखा चुकी है।
कार्रवाई के दौरान जो दस्तावेज हाथ लगे हैं उन्होंने अधिकारियों को चौका दिया है। बिल्डर ने ऐसा कोई तरीका नहीं छोड़ा जिससे सर्विस टैक्स या इनकम टैक्स जैसे डिपार्टमेंट की आंख में धूल झौंकी जा सके। टैक्स बचाया जा सके। अब अधिकारियों का आंकलन है कि समूह द्वारा चुराये गए सर्विस टैक्स का आंकड़ा एक करोड़ तक जा सकता है।
कम लागत, ज्यादा मुनाफा : संकट में खरीदार
सरकारी मेहरबानी के तो क्या कहने जिसके चलते कंपनी ने भोपाल में सरकारी जमीन पर कब्जा करके बहुमंजिला इमारतें तान दी। वहीं कम लागत और ज्यादा मुनाफे के चक्कर में इंदौर में इंडस सेटेलाइट जैसी टाउनशीप विकसित की जहां छह बजे के बाद जाना खतरे से खाली नहीं रहता। यही स्थिति केलिफोर्निया सिटी में बने आईबीडी के 200 बंगलों की है। यह टाउनशीप भी बायपास से आठ किलोमीटर दूर है।
2012 में आयकर ने भी मारा था छापा
29 नवंबर 2012 को इनकम टैक्स की इन्वेस्टिगेशन विंग ने सोम्या ग्रुप, अमृत होम्स, फॉर्च्यून ग्रुप के साथ आईबीडी पर सर्च की थी। इसमें बड़ा कारोबार सामने आया था। इस छापे ने कंपनी की कमर तोड़ दी। कंपनी को बेलमोंट पार्क का प्रोजेक्ट छोड़ना पड़ा।
इंडस बिल्डर्स एंड डव्लपर्स : मालिक विनय भदौरिया
साम्राज्य : इंडस हॉलीडे एंड टूर ट्रेवल्स प्राइवेट लिमिटेड, इंडस इंफोकॉम, प्राइवेट लिमिटेड, इंडस सेवन, एसईएएस एक्पोर्टस प्राइवेट मिमिटेड, मेडिकल ट्रांसक्रपशन (बीपीओ ) समेत अन्य क्षेत्र में करोड़ों का कारोबार।
प्रोजेक्ट : भोपाल, होशंगाबाद, इंदौर, जबलपुर, रायपुर और उप्र के आगरा में प्रोजेक्ट जारी। इंडस टॉउन, आईबीडी हॉलमॉर्क सिटी कोलार, किंग्स पार्क सलैया, रॉयलस पार्क रायसेन रोड़, आयोध्या बायपास पर डुप्लेक्स की श्रृंखला।
पांच में से दो कंपनियां ही पंजीबद्ध
सर्विस टैक्स ने जिस आईबीडी ग्रुप पर कार्रवाई की उसने 2012 की इन्वेस्टर्स समिट में 780 करोड़ रुपए के एमओयू साइन किए थे। इसमें भी बड़ा फर्जीवाड़ा किया था। आईबीडी की जिन पांच अलग-अलग फर्मों ने इंदौर में नवेश प्रस्ताव दिए हैं उनसे से दो ही कंपनियां ऐसी है जो पंजीबद्ध है। इनमें आईबीडी स्पेस इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि और आईबीडी यूनिवर्सल प्रा.लि. शामिल है। वहीं आईबीडी निरुपम बिल्डर्स एंड डेवलपर्स, आईबीडी रियलिटी डेवलपर्स और आईबीडी शिल्पी डेवलपर्स ऐसी कंपनियां हैं जिनका पंजीयन नहीं हुआ। न कंपनियों का कंपनी आईडेंटिफिकेशन नंबर (सिन)जारी हुआ। न ही संचालकों का डायरेक्टर आईडेंटिफिकेशन नंबर(डिन)।
कंपनी प्रोजेक्ट एमओयू रोजगार
कंपनी लागत रोजगार
आईबीडी निरुपम बिल्डर्स एंड डेवलपर्स इंटीग्रेटेड टाउनशिप 150 295
आईबीडी रियलिटी डेवलपर्स मिडराइस अपार्टमेंट 180 295
आईबीडी शिल्पी डेवलपर्स मिडराइस अपार्टमेँट 93 145
आईबीडी स्पेस इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. प्रिमियम-मिडराइस 192 227
आईबीडी यूनिवर्सल प्रा.लि. इंटीग्रेटेड टाउनशिप 165 255
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