200 से ज्यादा प्लॉटधारक परेशान, की शिकायत
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
स्वीमिंग पुल, क्लब, बगीचे, लैंडस्केपिंग और 24 घंटे सुरक्षा जैसी सहुलियतों के सब्जबाग दिखाकर 20 साल पहले जो मोर्या हिल्स नाम की कॉलोनी काटी गई थी वह आज भी कागजों पर चितरे नक्शों में ही दफन है। पहले भू-उपयोग का बहाना बनाया जाता रहा लेकिन मास्टर प्लान 2021 में भू-उपयोग आवासीय होने के बावजूद कॉलोनी का काम शुरू नहीं हुआ। इसका खुलासा मंगलवार को जनसुनवाई में प्लॉटधारकों द्वारा कलेक्टर को की गई शिकायत में हुआ।
खजराना के सर्वे नं. 1429/1/1, 1429/1/2 और 1429/1/3 की 133.30 एकड़ जमीन पर बी.जे.कंपनी प्रा.लि. (पंजी)ने मोर्या हिल्स नाम की कॉलोनी 1997 में काटी थी। 20 साल हो चुके हैं। अब तक टेकरी ने कॉलोनी का रूप नहीं लिया। ऐसे में जिन 200 से ज्यादा लोगों ने यहां जीवनभर की कमाई लगाकर प्लॉट खरीदे थे वे ठगे महसूस कर रहे हैं। दीपक पिता रामचरण मलिक ने बताया कि 2008 तक तो कॉलोनाइजर भू-उपयोग की आड़ लेता रहा। जनवरी 2008 में स्वीकृत हुए मास्टर प्लान में टेकरी आवासीय हो गई। फिर भी कॉलोनी पर काम नहीं हुआ। कुछ वक्त तक तो कॉलोनाइजर कहते रहे कि कर रहे हैं, कर रहे हैं। अब तो फोन उठाना भी बंद कर दिया है।
रोड की जमीन की रजिस्ट्री कर दी
अहमदाबाद से आए गोपाल पिता सोहनलाल जेथलिया ने बताया कि 1997 से 2008 तक कॉलोनी का इंतजार करते रहे। विकसित नहीं हुई। इसीलिए हमने कहा कि जो जमीन जल्दी विकसित हो जाए, उसमें प्लॉट दे दो। इस पर सर्वे नं. 1429/1/1/5 के बदले सर्वे नं. 1429/1/2/131 की जमीन दे दी, कहा यहां विकास जल्दी होगा। 11 जनवरी 2008 को इसकी रजिस्ट्री हो गई। हैरानी तो तब हुई जब पता चला कि जिस जमीन 14962 वर्गफीट जमीन की रजिस्ट्री की है उसमें से 6997 वर्गफीट जमीन तो मास्टर प्लान की प्रस्तावित सड़क में जा रही है। बचेगी 7965 वर्गफीट जबकि पैसा लिया 14962 वर्गफीट का। यदि आज मौके पर 2500 रुपए वर्गफीट का भी भाव है तो हमारे साथ 1.74 करोड़ की ठगी हुई है। इसीलिए कॉलोनाइजर के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
यह थी कॉलोनी की प्लानिंग
कुल जमीन 133 एकड़
प्लानिंग एरिया 113.02 एकड़
कनाड़िया रोड में जमीन 3.05 एकड़
नेट प्लानिंग एरिया 109.97 एकड़
प्लॉट एरिया 78.47 एकड़
क्लब हाउस 2.48 एकड़
हॉस्पिटल 1.52 एकड़
स्कूल 1.50 एकड़
पार्क/गार्डन/वॉटर 11.39 एकड़
रोड 14.61 एकड़
हमने कॉलोनी बेची ही नहीं, कृषि भूमि बेची थी
बीजी कंपनी के कर्ताधर्ताओं का कहना है कि कंपनी ने सिर्फ साकेत कॉलोनी ही काटी है। इसके अलावा कोई कॉलोनी नहीं काटी। मोर्या हिल्स कॉलोनी नहीं काटी। कृषि भूमि के रूप में जमीन बेची थी। जिसका जिक्र रजिस्ट्री पर भी है। कोई नक्शा वेलिड नहीं है। चूंकि कृषि भूमि थी इसीलिए जेथलिया ने कृषि भूमि के बदले कृषि भूमि ही एक्सचेंज की। यदि रोड यहां से जा रही है तो वहां से भी जा रही होगी। कोई परेशानि थी भी तो शिकायतकर्ताओं को कंपनी में बात करना चाहिए थी।
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
स्वीमिंग पुल, क्लब, बगीचे, लैंडस्केपिंग और 24 घंटे सुरक्षा जैसी सहुलियतों के सब्जबाग दिखाकर 20 साल पहले जो मोर्या हिल्स नाम की कॉलोनी काटी गई थी वह आज भी कागजों पर चितरे नक्शों में ही दफन है। पहले भू-उपयोग का बहाना बनाया जाता रहा लेकिन मास्टर प्लान 2021 में भू-उपयोग आवासीय होने के बावजूद कॉलोनी का काम शुरू नहीं हुआ। इसका खुलासा मंगलवार को जनसुनवाई में प्लॉटधारकों द्वारा कलेक्टर को की गई शिकायत में हुआ।
खजराना के सर्वे नं. 1429/1/1, 1429/1/2 और 1429/1/3 की 133.30 एकड़ जमीन पर बी.जे.कंपनी प्रा.लि. (पंजी)ने मोर्या हिल्स नाम की कॉलोनी 1997 में काटी थी। 20 साल हो चुके हैं। अब तक टेकरी ने कॉलोनी का रूप नहीं लिया। ऐसे में जिन 200 से ज्यादा लोगों ने यहां जीवनभर की कमाई लगाकर प्लॉट खरीदे थे वे ठगे महसूस कर रहे हैं। दीपक पिता रामचरण मलिक ने बताया कि 2008 तक तो कॉलोनाइजर भू-उपयोग की आड़ लेता रहा। जनवरी 2008 में स्वीकृत हुए मास्टर प्लान में टेकरी आवासीय हो गई। फिर भी कॉलोनी पर काम नहीं हुआ। कुछ वक्त तक तो कॉलोनाइजर कहते रहे कि कर रहे हैं, कर रहे हैं। अब तो फोन उठाना भी बंद कर दिया है।
रोड की जमीन की रजिस्ट्री कर दी
अहमदाबाद से आए गोपाल पिता सोहनलाल जेथलिया ने बताया कि 1997 से 2008 तक कॉलोनी का इंतजार करते रहे। विकसित नहीं हुई। इसीलिए हमने कहा कि जो जमीन जल्दी विकसित हो जाए, उसमें प्लॉट दे दो। इस पर सर्वे नं. 1429/1/1/5 के बदले सर्वे नं. 1429/1/2/131 की जमीन दे दी, कहा यहां विकास जल्दी होगा। 11 जनवरी 2008 को इसकी रजिस्ट्री हो गई। हैरानी तो तब हुई जब पता चला कि जिस जमीन 14962 वर्गफीट जमीन की रजिस्ट्री की है उसमें से 6997 वर्गफीट जमीन तो मास्टर प्लान की प्रस्तावित सड़क में जा रही है। बचेगी 7965 वर्गफीट जबकि पैसा लिया 14962 वर्गफीट का। यदि आज मौके पर 2500 रुपए वर्गफीट का भी भाव है तो हमारे साथ 1.74 करोड़ की ठगी हुई है। इसीलिए कॉलोनाइजर के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
यह थी कॉलोनी की प्लानिंग
कुल जमीन 133 एकड़
प्लानिंग एरिया 113.02 एकड़
कनाड़िया रोड में जमीन 3.05 एकड़
नेट प्लानिंग एरिया 109.97 एकड़
प्लॉट एरिया 78.47 एकड़
क्लब हाउस 2.48 एकड़
हॉस्पिटल 1.52 एकड़
स्कूल 1.50 एकड़
पार्क/गार्डन/वॉटर 11.39 एकड़
रोड 14.61 एकड़
हमने कॉलोनी बेची ही नहीं, कृषि भूमि बेची थी
बीजी कंपनी के कर्ताधर्ताओं का कहना है कि कंपनी ने सिर्फ साकेत कॉलोनी ही काटी है। इसके अलावा कोई कॉलोनी नहीं काटी। मोर्या हिल्स कॉलोनी नहीं काटी। कृषि भूमि के रूप में जमीन बेची थी। जिसका जिक्र रजिस्ट्री पर भी है। कोई नक्शा वेलिड नहीं है। चूंकि कृषि भूमि थी इसीलिए जेथलिया ने कृषि भूमि के बदले कृषि भूमि ही एक्सचेंज की। यदि रोड यहां से जा रही है तो वहां से भी जा रही होगी। कोई परेशानि थी भी तो शिकायतकर्ताओं को कंपनी में बात करना चाहिए थी।
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