Wednesday, January 18, 2017

पाठक को बचाने के लिए जांच ईडी के पाले में

पुलिस पर शंका के चलते केस को सस्टेनेबल नहीं मानता डिपार्टमेंट
इंदौर. विनोद शर्मा ।
कटनी हवाला कारोबार में मंत्री संजय पाठक का नाम आने के बाद प्रदेश सरकार और भाजपा दोनों घिर रही थी। इसीलिए एक तरफ जांच करने वाले एसपी गौरव तिवारी का तबादला किया गया तो दूसरी तरफ सरकार ने जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भरौसे छोड़ दी। वहीं आर्थिक मामले छोड़ ईडी पुलिस की जगह धोखाधड़ी का मामला तो जांच नहीं सकती। पुलिस की जांच जरूरी है जिसे स्वयं सरकार और उसके द्वारा नियुक्त किए गए कटनी के नवागत एसपी ही नकार रहे हैं।
देशव्यापी बदनाम हो चुकी एक्सिस बैंक के अधिकारियों की मिलीभगत से एसके मिनरल्स, महावीर ट्रेडिंग कंपनी और अमर ट्रेडिंग कंपनी के नाम से फर्जीवाड़ा 2008 से चल रहा है। इनकम टैक्स द्वारा थमाए गए नोटिस के बाद 5 जुलाई से दिसंबर के बीच धारा 420, 467, 471 भादवि के तहत चार एफआईआर (अपराध क्रमांक 738/16, 739/16, 741/16 व 1367/16 ) दर्ज हुई। एसके मिनरल्स का डायरेक्टर बनाए जाने के खिलाफ लाइनमेन रजनीश तिवारी, आॅटोमोबाइल दुकान संचालक विनय जैन  द्वारा महादेव ट्रेडिंग और उमादत्त होलकर द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर शामिल हैं। मामला बंद होने और री-ओपन होने तक सब सामान्य था। सरकार की नींद उड़ी मंत्री संजय पाठक का नाम सामने आने के बाद।
एसपी का ट्रांसफर, जांच ईडी को
मार्च से जुलाई तक तीन शिकायतों पर एफआईआर नहीं हुई थी लेकिन एसपी बनते ही गौरव तिवारी ने 5 जुलाई को तीन केस दर्ज किए थे। पुलिस की जांच परिणाम तक पहुंचती उससे पहले ही एसपी का ट्रांसफर कर दिया। नए एसपी शशिकांत शुक्ला ने करीब-करीब फाइनल हो चुकी तिवारी की जांच रिपोर्ट एक तरफ करते हुए नए सिरे से जांच शुरू कर दी। उन्होंने फर्जी कंपनियों के नेटवर्क से फोकस हटाकर इस बात पर लगा दिया कि फर्जी खाते खोले किसने? इसीलिए पाठक का नाम आते ही मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा ईडी से जांच कराए जाने का आश्वासन दिए जाने के बाद शुक्ला ने एफआईआर की कॉपी ईडी इंदौर को सौंप दी।
सिर्फ एफआईआर का क्या करें?
ईडी ने औपचारिकता निभाते हुए एफआईआर के आधार पर इन्फोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) के लिए अहमदाबाद आॅफिस से अनुमति मांगी है। हालांकि ईडी का साफ कहना है कि चूंकि मामला क्रिमिनिल अफेंस से जुड़ा है इसीलिए जांच सीबीआई को सौंपी जाती तो ज्यादा बेहतर थी। ईडी की सारी जांच पुलिस की जांच पर टिकेगी। हम ईसीआईआर दर्ज कर भी लें लेकिन पुलिस चार्जशीट फाइल नहीं करती तो हमारा भी सारा किया धरा पानी में जाएगा। क्योंकि एफआईआर पर ईसीआईआर दर्ज हो सकती है लेकिन प्रॉपर्टी अटैचमेंट के लिए पुलिस की चार्जशीट होना जरूरी है। फिलहाल जो परिस्थितियां कटनी में नजर आ रही है उसके चलते तो पुलिस की भूमिका अब शंकास्पद है। इसीलिए केस सस्टेनेबल नहीं है।
ईडी को क्यों नहीं..
मामले को पुलिस हवाले से जोड़कर देख रही है जबकि स्थानीय या अंतर राज्यीय हवाला ईडी की जांच के दायरे में नहीं आता। ईडी सिर्फ अंतरराष्ट्रीय हवाले के मामले में फेमा का केस दर्ज कर सकती है।
पीएमएलए के लिए धोखाधड़ी की धाराओं में क्रिमिनिल अफेंस या प्रिवेंशन आॅफ करपंशन एक्ट जरूरी है। क्रिमिनल अफेंस पर जांच करना  पुलिस/सीआईडी या सीबीआई का काम है वहीं पीसीए में ईओडब्ल्यू, लोकायुक्त या सीबीआई का।

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