Wednesday, July 29, 2015

खदानों के खेल में 'राजपुत्रÓ खिलाड़ी


-- इंदौर में मंत्रीपुत्र ने खोदी जमीन तो धार में सांसद के भतीजे और उसके दोस्तों ने सरकारी जमीन पर किया कब्जा
 इंदौर, सिटी रिपोर्टर ।

रसूखदारों की रं"दारी और खिदमतगार अफसरों के संरक्षण ने खदानों के नाम पर जमीनी सेंधमारी के अवैध कारोबार को आसमानी बुलंदी दे दी। सत्ता में बैठे राजनीतिक रंगदारों और उनके परिजनों ने अपने रौब का पूरा फायदा उठाया। इंदौर के हातोद में विवादित मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बेटे ने मंजूरी से 'यादा खुदाई की। वहीं धार के धांकदार भाजपाई प्रशांत वर्मा और उनके साथियों ने महापुरा की विवादित जमीन को खदान बना डाला। प्रशांत धार के सांसद विक्रम वर्मा का भतीजा है।
आकाश की कंपनी ने खोदी सरकारी जमीन
हातोद की जिस जमीन पर सरकारी दफ्तर और कॉलेज बनना था उसे अधिकारियों की मिलीभगत से जमीन के जालसाजो ने खदान बना डाला। खदान सूर्या इन्फ्रावेंचर प्रा.लि. की है जिसके कर्ताधर्ता आकाश विजयवर्गीय हैं। आकाश सौ करोड़ के सुगनीदेवी जमीन लीज घोटाले में आरोपों से घिरे उद्योगमंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बेटे हैं। सूर्या सब कॉन्ट्रेक्टर के रूप में दिलीप बिल्डकॉन से ठेका लेकर इंदौर-देपालपुर रोड बना रहा है। इसीलिए उसे गिट्टी-मुरम की जरूरत पूरी करने के लिए खदान खोदी।
    किस्सा हातोद स्थित सर्वे नं. 538 का है। दस हेक्टेयर में फैली इस जमीन के दो हेक्टयेर (9 एकड़) हिस्से में मार्च-अपै्रल 2010 को यहां खुदाई की मंजूरी दी गई। इस जमीन पर सरकारी दफ्तर और कॉलेज बनना था। मंत्री की मंशा और उनके रूदबे से वाकीफ पूर्व कलेक्टर और खनिज अधिकारी संजय लूणावत ने नियमों को तांक पर रखकर मनमाने ढंग से यह मंजूरी दी। मंजूरी दिलीप बिल्डकॉन को दी गई। क्षेत्रीय पार्षद, पटवारी, तहसीलदार और जिला पंचायत अध्यक्ष सहित कई लोगों की आपत्तियों के बावजूद आला अधिकारियों ने मामला रफादफा कर दिया। पिता के दबदबे और अफसरों के संरक्षण का आकाश ने भरपूर फायदा उठाया। उनकी कंपनी ने जितनी अनुमति ली, उससे 'यादा खुदाई की। हालात यह है कि 27 रुपए प्रति घनमीटर के हिसाब से मंजूरी मुरम के लिए दी गई थी लेकिन बगैर किसी अनुमति के कंपनी अगस्त तक गिट्टी की खुदाई करती रही। जबकि गिट्टी की रॉयल्टी 44 रुपए प्रति घनमीटर है। अंतर सीधे 17 रुपए घनमीटर का। दादागिरी इतनी कि भूले-बिसरे यदि कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा तो भी उसे डरा-धमकाकर भगा दिया गया।
आपत्तियों की अनदेखी
राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट ने पहले ही दौर में खदान की खुदाई खारिज कर दी थी। उनका कहना था कि जमीन चरनोई की है। यहां मिट्टी 'यादा है। मुरम या गिट्टी के लिए खुदाई 'यादा करना पड़ेगी। इससे यहां दफ्तर और कॉलेज बनाने की योजना प्रभावित होगी। जवाब में कलेक्टर श्रीवास्तव ने यह कहकर आपत्ति खारिज कर दी थी कि ऐसे आपत्ति लेते रहे तो रोड कैसे बनेगी।
मंजूरी से कम में किया काम
हातोद में आपत्तियों के बावजूद खदान दी गई?
कोई आपत्ति नहीं थी। तहसीलदार की अनुसंशा के बाद दी मंजूरी।
खदान में मंजूरी से 'यादा की गई खुदाई?
शिकायतें मिली थी लेकिन जांच कराई तो ऐसा कुछ नहीं निकला।
क्या कहती है आपकी जांच रिपोर्ट?
रिपोर्ट के अनुसार मंजूरी से कम में किया काम।
संजय लुणावत, खनिज अधिकारी
अनुसंशा नहीं, हमने आपत्ति ली थी
क्या आपने अनुसंशा की थी?
नहीं, उलटा हमने तो आपत्ति ली थी।
क्या थी आपत्ति?
जमीन पर तहसील कार्यालय बनना है। जमीन चरनोई की है। इसीलिए खदान की मंजूरी न दी जाए।
बावजूद इसके मंजूरी दी?
पूर्व अधिकारियों का कहना था कि मंजूरी नहीं देंगे तो रोड कैसे बनेगा।
क्या कंपनी ने जरूरत से 'यादा खुदाई की?
इसकी जानकारी नहीं। हां, कंपनी ने काम बंद कर रखा है।
विजय खरे, तहसीलदार हातोद



धार : भाजपाई रसूखदारों की धांक
इंदौर की तरह अपने रौब-रुदबे को भुनाकर सरकारी जमीनों पर अपने मालिकाना हक की तख्ती टांगने वाले धार जिले में भी कम नहीं है। महापुरा में नर्मदा किनारे की उस जमीन को रसूखदारो ने रेत की खदान बना डाली जो जिला प्रशासन द्वारा मप्र खनिज निगम को हस्तांतरित की जाना थी। खुदाई खलघाट निवासी अनिल मालवीय के नेतृत्व में हो रह है। भाजपा के सांसद विक्रम वर्मा के भतीजे प्रशांत वर्मा और विधायक रंजना बघेल के नजदीकी जयदीप भैया अनिल के पार्टनर हैं।
    मामला नर्मदा से लगे धार के महापुरा गांव का है। धमरपुरी से लगा यह गांव गोगावां पंचायत का हिस्सा है। यहां सर्वे नं. 127 (रकबा 9.067 एकड़) राजस्व रेकॉर्ड में सरकारी जमीन है। जमीन पर अनिल और प्रशांत की फर्म बालू रेती का खनन कर रही है। बगैर किसी सक्षम स्वीकृति के। सिर्फ पंचायत के अनापत्ति प्रमाण-पत्र के आधार पर। एनओसी 4 सितंबर 2010 की है जबकि खुदाई करते दो महीनें हो चुके हैं। लोगों की शिकायत पर 'पत्रिकाÓ ने मौके का जायजा लिया तो वहां अनिल के साथ प्रशांत भी मौके पर था। 'पत्रिकाÓ के पास इसकी वीडियो फूटेज भी मौजूद है। क्षेत्रवासियों ने बताया शिकायत धार कलेक्टर बी.एम.शर्मा और खनिज अधिकारी एम.एस. खतेडिय़ा को हुई लेकिन भाजपाई रसूखदारों के आगे इनके सूर बदले नजर आए। खतेडिय़ा ने तो अपना पल्ला झाड़ते हुए यहां तक कह दिया कि जमीन खनिज निगम को सौंप दी है और ये निगम के ही ठेकेदार हैं। उधर, क्षेत्रीय पटवारी डी.एम.शर्मा कहते हैं कि सर्वे 125 और 127 की अनुमति मांगी थी। अनुमति मिल जाती तो आवंटन पत्र मुझे भी मिल जाता जो नहीं मिला।
अफसरों की अनदेखी ले चुकी है जान
नर्मदा किनारे अवैध रेत खदानों का खेल नया नहीं, पूराना है। 18 मई 2009 को रेत खदान धंसने से चार मजदूर दब गए थे। हादसा जलकोटी से करीब दो किमी दूर उस वक्त हुआ जब खदान में 30 मजदूर थे। अचानक खदान धंसने से भूरीबाई पिता बालू भील (16), रणजीत पिता नानका भील (16) निवासी जहांगीरपुर, गुजरीबाई पति रमेश भील (30) निवासी खुटामोड़ एवं कविताबाई पति गणेश (22) बावड़ीपुरा की मौत हो गई। उस वक्त भी खनिज अधिकारी एम.एस.खेतडिय़ा ने पल्ला झाड़ लिया था। मृतकों के परिजनों का आरोप है कि खतेडिय़ा की खदानों पर बंधी बंदी है। इसीलिए उन्हें खदाने नजर नहीं आती।
क्यों ली ग्रामीणों ने आपत्ति
खदान नर्मदा के किनारे है। खदान तक पहुंचने के लिए पूरा महापुरा गांव पार करना पड़ता है। तकरीबन 20 हजार से 'यादा की आबादी वाले इस गांव में सड़कें पहले ही बदहाल हैं। खदान शुरू हुई तो दिनभर ट्रक-डम्परों की अंधाधूंध दौड़ मची रहेगी जो गांव के बगाों के लिए जानलेवा साबित होगी।
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निगम को सौंपी जमीन, खदान मालिक निगम के ठेकेदार
अनिल और प्रशांत के खिलाफ शिकायत मिली थी। जांच कराने पर पता चला जमीन खनिज निगम को हस्तांरित कर दी है। कागजी कवायदें तकरीबन पूरी हो चुकी हैं। थोड़ी-बहुत औपचारिकता रही हैं। जो लोग खुदाई कर रहे हैं वे निगम के ही ठेकेदार हैं।
एम.एस.खतेडिय़ा, जिला खनिज अधिकारी
माइनिंग की मंजूरी दी ही नहीं जा सकती
महापुरा की जिस जमीन की आप बात कर रहे हैं वह निगम को हस्तांरित नहीं हुई है। जमीन जिला प्रशासन के पास है। जिला प्रशासन ने साल-दो साल पहले यहां माइनिंग की मंजूरी दे दी थी जिसके खिलाफ स्थानीय लोग हाईकोर्ट गए। हाईकोर्ट ने स्टे दे दिया। मामला विचाराधीन है। इसीलिए यहां माइनिंग की मंजूरी दी भी नहीं जा सकती।
राजीव सक्सेना, मप्र खनिज निगम



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