अनुबंध के अनुसार आठ साल में कमसकम एक बार तो हो जाना था रिनुअल
कंपनी की मनमानी-सरकारी अनदेखी से बि"डऩे ल"ी सड़क की सूरत
इंदौर, सिटी रिपोर्टर ।
डेढ़ सौ करोड़ की रोड बनाकर तीन हजार करोड़ से 'यादा की टोल वसूली का एस्टीमेट बनाकर बैठी अशोका बिल्डकॉन-विवा हाई-वे अनुबंध के आधार पर इंदौर-एदलाबाद रोड का रिनुवल न करके करोड़ों रुपया बचा "ई। एमपीआरडीसी और कंपनी के बीच हुए अनुबंध के आधार पर पांच बरस में रिनुअल होना था, जो आठ साल बाद भी नहीं हुआ। इसका असर सड़क की सेहत पर नजर भी आने ल"ा है।
अशोका बिल्डकॉन और विवा हाई-वे प्रा.लि. ने 2002-03 में 203 किलोमीटर लंबा इंदौर-एदलाबाद (खंडवा) रोड बनाया था। एमपीआरडीसी के अफसरों की मिलीभ"त से मनमाना टोल वसूलने वाली इन कंपनियों ने अनुबंध के हिसाब से क्रेन, एम्बुलेंस, ले-बाई, पेयजल और सुविधाघर जैसी सहुलियतें उपलब्ध नहीं कराई। कंपनी की मनमानी और अफसरों की अनदेखी का असर सड़क की सेहत पर पड़ा। इंदौर-खंडवा के बीच कई स्थानों के बीच "ड्ढे उभर आए हैं। वहीं कई ज"ह सड़क के कोने कटे हैं। दुर्घटनाओं की वजह से कुछ पुलियाओं की पाल भी उखड़ी नजर आती है। खंडवा से बुरहानपुर के बीच कहीं-कहीं "ड्ढे नजर आते हैं। वहीं बुरहानपुर से इ'छापुर के बीच "ड्ढों की संख्या 'यादा है।
क्या था अनुबंध
सड़क 2002 में बनी। 2010 खत्म हो चुका है। यानी आठ साल हो "ए। भारी वाहनों के बीच सड़क पर चार-पांच साल में रिनुअल किया जाना चाहिए था जैसा कि 2000-01 में इंदौर-देवास फोरलेन बनाने वाली लोक निर्माण विभा" की राष्ट्रीय राजमार्" शाखा ने 2008-09 के बीच किया।
बचाए 50 करोड़ से 'यादा
तकनीकी लिहाज से बात करें तो दो-लेन सड़क के रिनुअल की ला"त 25 लाख रुपए/किलोमीटर आती है। सड़क की लंबाई 203 किलोमीटर है। यानी ला"त आना चाहिए 50.75 करोड़। ये रकम यदि कंपनी रिनुअल करती तो उसे खर्च करना पड़ती। चूंकि रिनुअल नहीं हुआ यानी कंपनी इतनी राशि बचा "ई।
कंपनी : कर चुके हैं एक बार रिनुअल
कंपनी के कर्ताधर्ताओं की मानें तो वे अनुबंध के आधार पर निर्माण के बाद एक बार रिनुअल कर चुके हैं। रिनुअल पांचवे साल में किया था। इसीलिए रोड आज भी टनटनाट है। रोड एक्सीडेंट के कारण कहीं छोटे-मोटे "ड्ढे हुए भी हैं तो उन्हें दुरुस्त कर दें"े।
रहवासी बोले : झूठी है कंपनी, नहीं हुआ रिनुअल
असरावद खुर्द निवासी विष्णु मालवीय की मानें तो रिनुअल की झूठी कहानी सुनाकर कंपनी अधिकारियों के साथ मिलकर जनता की आंखों में धूल झोख रही है। वास्तव में निर्माण के बाद आज तक रिनुअल हुआ ही नहीं। हां, ये बात भी सही है कि थोड़े-बहुत "ड्ढों को छोड़ दें तो रिनुअल न होने के बाद भी ये सड़क दूसरी सड़कों के मुकाबले बेहतर है। बड़वाह निवासी प्रमोद जैन ने कहा जब इंदौर-देवास फोरलेन का रिनुअल आठ साल में हो सकता है तो आठ साल बाद इंदौर-एदलाबाद रोड का क्यों नहीं। रिनुअल के नाम पर झूठ बोलकर कंपनी इधर, करोड़ों रुपया बचा "ई वहीं उधर, हिसाब में जोड़कर सरकारी लाभ ले ले"ी।
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