-- प्राधिकरण ने दिया लूट का लाइसेंस
इंदौर, विनोद शर्मा ।
बीओटी के नाम पर ठेकेदारों को मुनाफा पहुंचाने की दौड़ में इंदौर विकास प्राधिकरण ने मप्र के पीडब्ल्यूडी से लेकर दि"ी के एनएचएआई तक को भी पीछे छोड़ दिया। स्कीमों के नाम पर "ैरआबादी इलाकों में पानी की तरह पैसा बहाने वाले प्राधिकरण के पदाधिकारियों ने सोची-समझी रणनीति के तहत बीओटी से एमआर-10 ब्रिज बनवाया। बाद में ठेकेदार को ला"त से पांच "ुना 'यादा राशि वसूलने का लाइसेंस दे डाला। प्राधिकरण की इस मेहरबानी का खामियाजा इंदौरवासियों को एक-दो नहीं बल्कि 17 साल तक चुकाना हो"ा।
आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो 800 मीटर लंबे इस ब्रिज की ला"त 14.26 करोड़ रु. आंकी "ई थी। 10 जुलाई 2005 को प्राधिकरण ने प्रकाश एस्फाल्टिं" एंड टोल हाईवे (पाथ) इंडिया लि. को वर्कऑर्डर जारी किया। इसमें निर्माण की समयसीमा 455 दिन (15 महीने) तय हुई जबकि टोल वसूलने की 6,101 दिन यानी 17 साल। इतनी लंबी समयसीमा में आखिर कंपनी ला"त से कितना रूपया 'यादा वसूले"ी? इसकी चिंता किसी ने नहीं की। सब राजनीतिक रं"दारों की सं"त में ठेकेदार के कंधे पर हाथ रखकर शहरवासियों को लूटने का तमाशा देखते रहे। लोकर्पण के दूसरे दिन 26 मई 2007 से कंपनी भी सहानुभूति को साइड में रखकर वसूली में जूट "ई।
वसूली को लेकर प्राधिकरण और कंपनी जो भी आंकड़े बताए लेकिन ये आंकड़े हकीकत से कोसो दूर हैं। वाहनवार 24 घंटे की वसूली निकाली जाए तो आंकड़ा 10 लाख रुपए से 'यादा ही आए"ा। यानी तीन करोड़ रुपए महीना और 36 करोड़ रुपए साल जबकि ब्रिज पर खर्च हुए थे बमुश्किल 15 करोड़ रुपए। यानी स्थापना खर्च को छोड़ सालभर में ही ला"त से दो"ुना 'यादा निकाल रही है कंपनी। कंपनी द्वारा दिए आंकड़ों की भी मानें तो कंपनी 5.40 करोड़ रुपए साल वसूल रही है। इसी औसत से 17 साल में यह आंकड़ा 75.60 करोड़ के पार जाता है। उधर, उ'जैन रोड को एक तरफ एरोड्रम से जोडऩे वाले सुपर कॉरिडोर और दूसरी तरफ बायपास से जोडऩे वाली एमआर-10 के आसपास बढ़ रही बसाहट के कारण ब्रिज से "ुजरने वाले वाहनों की संख्या दिनदूनी-रात चौ"ुनी बढ़ोत्तरी होना अभी बाकी है। 17 में से अभी तीन साल निकले हैं। 14 साल अभी बाकी है। यानी 14.50 करोड़ के ब्रिज के लिए सौ करोड़ से 'यादा की वसूली करे"ी कंपनी।
बाण"ं"ा ब्रिज : टेंशन उतनी की उतनी
उधर, निर्माणाधीन बाण"ं"ा ब्रिज की डिजाइन को लेकर तकनीकी जानकार पहले ही प्रश्न'िाह्न ल"ा चुके हैं। इंजीनियर अतुल सेठ की मानें तो 2025 के यातायात की कल्पना को लेकर एमआर-10 को चार लेन बनाया "या वहीं एमआर-10 के मुकाबले पांच "ुना 'यादा मौजूदा ट्रेफिक की अनदेखी करके लोक निर्माण विभा" ने दो-लेन ब्रिज बनने के बाद भी एमआर-10 से "ुजरने की संभावनाओं को जिंदा रखा है।
"लती आरटीओ की, खामियाजा जनता का
एमआर-10 ब्रिज से होते हुए उ'जैन रोड पर कितने वाहन "ुजरते हैं इस संबंध में परिवहन कार्यालय से पूछा तो जवाब मिला आंकड़े टोल वाले ही दे सकते हैं। हमारा कोई बेरियर नहीं है इसीलिए हमें जानकारी नहीं है। परिवहन विभा" की इसी कमी का फायदा टोल संचालक उठाते हैं।
ये सुविधाएं भी..
--- शिप्रा टोल टैक्स पर एनएचएआई ने वसूली पांच वसूली बूथ और साइड में 1500 वर्"फीट का ऑफिस बनाने की मंजूरी दी थी जिसमें पुलिस चौकी भी थी। इधर, पाथ ने बूथ बनाकर उसके ऊपर 4,500 वर्"फीट से 'यादा का निर्माण अल" कर दिया जिसमें कंपनी का ऑफिस चल रहा है। इतने बड़े ऑफिस का मासिक किराया ही इंदौर में एक लाख रु. से 'यादा है और 17 साल का 2.04 करोड़ रुपए।
--- ब्रिज की ब"ल में कंपनी ने 4,000 वर्"फीट में स्टॉफ रूम बना रखे हैं वहीं तकरीबन दो एकड़ जमीन बतौर "ौदाम इस्तेमाल की जा रही है। इसका किराया भी कमोबेश 2.04 करोड़ से ऊपर ही हो"ा।
--- कंपनी ने टोल प्लाजा के दोनों ओर 1,000 वर्"फीट के दो होर्डिं" ल"ा रखे हैं। बहरहाल, एड को आमंत्रण दे रहे इन होर्डिं"ों का सालाना किराया भी कंपनी एक लाख से 'यादा वसूलती है।
--- ब्रिज के दोनों ओर ल"े बिजली के 64 खंभों पर भी बोर्ड ल"ाकर कंपनी विज्ञापन के अधिकार बेच रही है।
-- प्राधिकरण की अनूमति से कंपनी ने "ौरीन"र से सुखलिया "्राम होते हुए बाण"ं"ा थाने को जोडऩे वाली सड़क पर भी बेरियर ठोक रखा है जिसका काफी विरोध भी हुआ।
अभी तो इनसे भी बढ़े"ा लोड
--- प्राधिकरण ने 90 करोड़ रुपए में 9 किलोमीटर लंबा सुपर कॉरिडोर बना दिया जो एमआर-10 को एरोड्रम रोड से जोड़ता है। यहां आ"ामी दस वर्षों के लिए बड़ी संख्या में होटलें, मॉल, स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स और मेडिकल हब बनना है।
-- सुपर कॉरिडेार की तैयारियों के साथ करोलबा", कालिंदी "ोल्ड, प्रीमियम पार्क जैसी दर्जनभर से 'यादा कॉलोनियां काट रही है उ'जैन रोड पर। बन रहा है एचबीएन का मॉल भी।
-- बायपास को रिं" रोड, एबी रोड और उ'जैन रोड से जोडऩे वाली अभी तक एक ही सड़क। इसीलिए ट्रकों की लं"ी रहती है लाइन।
ब्रिज से "ुजरने वाले वाहन/घंटा
वाहन औसत/घंटा 24 घंटों में
कार-जीप 300 7200
खाली ट्रक 300 7200
बस 180 4320
भरे ट्रक 300 7200
टेम्पो-मेटाडोर 350 8400
मल्टी एक्सल ट्रक 120 2880
किससे कितना टोल
वाहन टोल (रुपए) वसूली 24 घंटों में
कार-जीप 18 1.29 लाख (7200)
टेम्पो-मेटाडोर 40 3.36 लाख (8400)
खाली ट्रक-बस 60 6.91 लाख (11,520)
ट्रक 75 5.40 लाख (7200)
मल्टी एक्सल ट्रक 90 2.59 लाख (2880)
(ये आंकड़े औसत वाहनों की संख्या और टोल शुल्क के आधार पर जुटाए "ए हैं।)
15 लाख रोज से 'यादा की है वसूली
कंपनी और सरकार कभी स"ो आंकड़े पेश नहीं करती। बात एमआर-10 की करें तो रोज यहां 15 लाख से 'यादा की टोल वसूली होती है। सरकारी आंकड़े कहते हैं वाहनों की संख्या सालाना 7 प्रतिशत बढ़ रही है फिर टोल क्यों नहीं बढ़ता। वास्तविक वसूली का आंकलन करने के लिए निजी संस्थाओं से सर्वे कराया जाए।
राजेंद्र त्रेहान, अध्यक्ष
इंदौर ट्रक ऑपरेटर एंड ट्रांसपोर्ट ऐसोसिएशन
अनुबंध के आधार पर वसूली
एमआर-10 ब्रिज पर चौबीस घंटे में डेढ़ लाख रुपए की टोल वसूली होती है। इसके बाद जो आंकड़े बताए जाते हैं वे तथ्यात्मक नहीं हैं। प्राधिकरण से जो अनुबंध हुआ है उसी के आधार पर वसूली कर रहे हैं।
पुनीत अ"्रवाल, पाथ इंडिया
अनुबंध में क्या लिखा है जानकारी नहीं है। टर्म एंड कंडिशन देखकर ही कुछ कह सकता हूं।
चंद्रमौली शुक्ला, सीईओ
आईडीए
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