Wednesday, July 29, 2015

कचरे से रोशन होगा इंदौर

- मप्रऊविनि और नगर निगम संयुक्त रुप से अंजाम देंगे योजना को
डेढ़ सौ करोड़ की लागत से लगेगा 10 मेगावॉट का प्लांट
इंदौर, सिटी रिपोर्टर ।

शहर की फिजा बिगाडऩे के साथ शहरवासियों की सेहत के लिए जहर साबित हो रहा कचरा जल्द ही इंदौर को रोशन करता नजर आएगा। मप्र ऊर्जा विकास निगम और इंदौर नगर निगम ने इसके लिए इंदौर में मप्र का पहला कचरे से बिजली बनाने का प्लांट डालने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। तकरीबन डेढ़ सौ करोड़ की इस योजना के तहत 10 मेगावॉट का सयंत्र लगाया जाएगा। सयंत्र में शहरभर से एकत्रित कचरे का वैज्ञानिक पद्धति से उपचार करके बिजली बनाई जाएगी। बहरहाल एमपीयूवीएन की सैद्धांतिक सहमति के बाद योजना दस्तावेजी खाका खींचने की तैयारी हो चुकी है।
    कचरा प्रबंधन योजना के तहत सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट (एसडब्ल्यूटीपी) स्थापित करने में नाकाम रहे इंदौर नगर निगम ने एक कोशिश और की। कोशिश है कचरे से बिजली बनाने की। निगम की इस कोशिश एमपीयूवीएन सैद्धांतिक सहमति का सहारा दे चुका है। बतौर निगमायुक्त और एमपीएकेवीएन एमडी रहते इंदौर के कचरे की दिक्कत से वाकीफ एमपीयूवीएन के एमडी नीरज मंडलोई ने विशेष रुचि लेते हुए प्रोजेक्ट को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। अधिकारियों मानें तो योजना के तहत 10 मेगावॉट बिजली का उत्पादन किया जाना प्रस्तावित है। एक  मेगावॉट के लिए 15 करोड़ का निवेश होता है। यानी प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत डेढ़ सौ करोड़ रुपए होगी। पीपीपी बेस्ड इस प्लांट के लिए जमीन नगर निगम उपलब्ध कराएगा। सहुलियत के लिहाज से जमीन ट्रेंचिंग ग्राउंड के आसपास भी हो सकती है।
ए-टू-'ोड ने ली रुचि
परियोजना को अंजाम तक पहुंचाने के लिए गुडग़ांव की ए-टू-'ोड कंपनी ने रुचि ली है। कचरा प्रबंधन योजना के तहत इंदौर में पहले से वेस्ट कलेक्शन कर रही इस कंपनी के साथ जल्द ही एमपीयूवीएन और इंदौर नगर निगम अनुबंध करेंगी।
सौदा फायदे का
---बिजली बनने के बाद कचरे का अंतिम अवशेष गैर नुकसानदेह राख होगी।
--- इस राख से टाईलें, निर्माण सामग्री में इस्तेमाल होने वाले अन्य पदार्थ बनाए जा सकेंगे।
--- राख का इस्तेमाल निचले स्थानों की भराई के लिए भी किया जा सकेगा।
--- परियोजना जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के समझौते के अंतगर्त पंजीबद्ध है।
--- सरकार को सस्ती बिजली मिलेगी।
--- कचरे के साथ बदबू और बीमारियां भी कम होगी।
देर आए दुरुस्त आए
दक्षीण दिल्ली के ओखला इलाके में बीते दिनों वहां की मुख्यमंत्री ने 16 मेगावॉट के प्लांट की मंजूरी दी। तिहाड़ जेल में भी कचरे से रोशनी देने की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। आगरा की तैयारियां भी अंतिम चरण में हैं।
सुधरेगी इंदौर की सेहत
यूनिट न केवल कूड़े से बिजली बनाने की महत्वकांक्षी योजना को पूरा करेगी बल्कि इंदौर को साफ-सुथरा बनाए रखने में भी कारगर साबित होगी। इंदौर रोज 700 से 800 मेट्रिक टन कचरा उगलता है। इतने कचरे का निपटान अकेले निगम के बूते की बात नहीं है। परियोजना इंदौर को अतिरिक्त बिजली देगी वहीं रोज उत्पन्न होने वाले कचरे का 40 फीसदी हिस्सा प्लांट में निपट जाएगा।
नीरज मंडलोई, एमडी
एमपीयूवीएन
नगर निगम पर्यावरण सुधार के लिए प्रयासरत है। इसी क्रम में प्रस्ताव भेजा था। यदि प्रस्ताव मंजूर हो गया है तो कोशिश करेंगे जल्द से जल्द प्रोजेक्ट जमीन पर आए।
सी.बी.सिंह, निगमायुक्त

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