-- 140 करोड़ का सुपरकॉरिडो-एमआर-10 रोड बनाने वाले प्राधिकरण के पास नहीं थे ब्रिज के 14 करोड़?
-- बाण"ं"ा ब्रिज में देरी, कारण या एमआर-10 टोल को फायदा पहुंचाने का बहाना
इंदौर, विनोद शर्मा ।
स्थानीय निकायों द्वारा ल"ाए जाने वाले चूं"ी कर को खत्म करके केंद्र सरकार ने शहर प्रवेश की जो आजादी दी थी उसे एमआर-10 पर बीओटी ब्रिज बनाकर इंदौर विकास प्राधिकरण ने छीन लिया। लो" शिकवा-शिकायतों में व्यस्त थे। प्राधिकरण के पदाधिकारी टोल वसूली की हिमायम में। एक सिरे में 90 करोड़ का सुपर कॉरिडोर और दूसरे सिरे में बायपास तक 50 करोड़ का एमआर-10 रोड बनाने वाले प्राधिकरण के खजाने में क्या ब्रिज के लिए 14 करोड़ रुपए नहीं थे? इस मुद्दे को समझने में न शहर के जानकारों ने रुचि दिखाई और न ही समझाने में प्राधिकरण के पदाधिकारियों ने। प्राधिकरण के प्रश्रय पर ठेकेदार मनमानी वसूली करता रहा और लो" खामौशी से पैसा देकर अपनी जरूरत निकालते रहे।
पूल के पार बेल"ाम बढ़ती कॉलोनियों को देख न"र नि"म 2007-08 से कुम्हेड़ी और भौरासला को नि"मसीमा में शामिल किए जाने की मां" कर रहा है। वहीं 25 मई 2007 को जिस दिन ब्रिज का लोकार्पण हुआ था उसी दिन पार्षद हरीशंकर पटेल के प्रयासोंं से पूल के पार सड़क का शिलान्यास करके क्षेत्र को नि"म की जद में बता चुके हैं। खैर, इन तथ्यात्मक तर्कों से न ठेकेदार को फर्क पड़ता है और न ही उसू लूट की छूट देने वाले प्राधिकरण के पदाधिकारियों को। इंदौर की सूरत संवारने का दावा करने वाले राजनीतिक रसूखदार भी ठेकेदार को संरक्षण दिए बैठे हैं। मिलीजूली कुश्ती का आलम यह है कि ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए पहले मनमाने ढं" से खातीपुरा-"ौरीन"र-सुखलिया "्राम रोड पर बेरियर ल"ा दिया। लो"ों ने विरोध ने जैसे-तैसे बैरियर की बाधा हटाई तो जिम्मेदार भी बाण"ं"ा ब्रिज में देरी का फ"ार फसाकर बैठ "ए। उन्हें मालूम है कि ब्रिज में जितना देर से बने"ा उतना ही ठेकेदार और उनका फायदा हो"ा।
तकनीकी रूप से बात करें तो एमआर-10 के मुकाबले लोक निर्माण विभा" ने जरूरत नकारते हुए बाण"ं"ा ब्रिज की चौड़ाई आधी कर दी। वह भी उस वक्त जब सर्वे-टेंडर से लेकर काम शुरू होने तक लोक निर्माण मंत्री इंदौर के वे वजनदार मंत्री रहे हैं जिन्हें पाथ इंडिया लि. का बड़ा समर्थक कहा जाता है। बीओटी के तहत 2007-08 में इंदौर-उ'जैन रोड को फोरलेन करने की मंजूरी देने वाले मंत्री को शायद उस वक्त रोड के मुकाबले बाण"ं"ा ब्रिज पर वाहनों की संख्या कम नजर आई हो।
ठेका देने के साथ पाथ को जाने-अनजाने सहुलियतों की सौ"ात देने में भी प्राधिकरण पीछे नहीं रहा। फिर मामला टोल बूथ पर बने ऑफिस-ब्रिज से ल"े स्टॉफ रूम के कब्जे से जूड़ा हो। या एरोड्रम रोड तक सुपर कॉरिडोर और बायपास तक एमआर-10 रोड बनाकर बायपास-रिं" रोड-एबी रोड-उ'जैन रोड-देपालपुर रोड को जोडऩे वाली इंदौर की एकमात्र सड़क का। बात यहीं खत्म नहीं हुई एरोड्रम रोड से इस सड़क को धार रोड से जोडऩे की जद्दोजहद भी प्राधिकरण ने शुरू कर दी। बनी बात है कि जब इस मल्टीकनेक्टिविटी रोड के बनते ही ठेकेदार का मुनाफा दो-तीन "ुना तक बढ़ जाए"ा। बावजूद इसके टोल वसूली कब तक? के सवाल पर सड़क से "ुजरने वाले वाहनों की वास्तविक संख्या से अनजान प्राधिकरण के पदाधिकारी कहते हैं जो हो रहा है अनुबंध के हिसाब से हो रहा है।
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