बीओटी अनुबंधों के बावजूद नहीं दिखती टोलवार क्रेन-एम्बुलेंस
न पीने की पानी की व्यवस्था, न सुविधाघर
इंदौर, विनोद शर्मा।
बीओटी के तहत ला"त से 15 "ुना अधिक वसूली करने वाले ठेकेदार अनुबंधों के हिसाब से मुसाफिरों को सहुलियतें नहीं देते। फिर वह एमआर-10 पर टोल वसूली करने वाली पाथ इंडिया लि. हो या डेढ़ सौ करोड़ के खंडवा रोड के लिए तीन हजार करोड़ की वसूली का एस्टीमेट बनाकर बैठी अशोका बिल्डकॉन-विवा हाई-वे। सालाना करोड़ों की कमाई करने वाले इन ठेकेदारों के पास न दुर्घटना"्रस्त वाहनों को हटाकर सड़क को जाम मुक्त रखने के लिए के्रन खरीदने का पैसा है। न घायलों के उपचार लिए एम्बुलेंस या किसी तरह की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा। मप्र रोड डवलपमेंट कॉर्पोरेशन या इंदौर विकास प्राधिकरण ने अनुबंध में सहुलियतों का जिक्र किए जाने के बाद भी राजनीतिक रं"दारों का वरदहस्त प्राप्त ये ठेकेदार जनता की जरूरतों को नकारते नजर आते हैं।
बीओटी के तहत सड़क या ब्रिज का ठेका देते वक्त एनएचएआई-एमपीआरडीसी-आईडीए जैसी एजेंसियां कंपनी के साथ अनुबंध करती है। अनुबंध के अनुसार कंपनी को सड़क के साथ सिर्फ टोल वसूली का अधिकार नहीं दिया जाता बल्कि मुसाफिरों के लिए सहुलियत जुटाने की जिम्मेदारी भी दी जाती है। फेहरिस्त में टोल प्लाजावार "्रीनबेल्ट, एम्बुलेंस-के्रन, टोल, पेयजल-सुविधाघर, ट्रक पार्किं" के लिए ले-बाई जैसी सहुलियतें शामिल हैं। कानूनन सहुलियतें जुटाने के बाद ही टोल वसूली की जाना चाहिए लेकिन एमआर-10 ब्रिज और खंडवा रोड पर टोल वसूली होते वर्षों हो "ए लेकिन न यहां किसी टोल प्लाजा पर क्रेन नजर आती है। न एम्बुलेंस। अनुबंध में यह भी उल्लैख है कि शर्तों का पालन न किए जाने की दशा में अनुबंध निरस्त भी किया जा सकता है लेकिन आज तक किसी भी कंपनी का अनुबंध निरस्त नहीं हुआ।
इंदौर-एदलाबाद
सहुलियतों से परहेज
165 करोड़ में 203 किलोमीटर लंबा इंदौर-एदलाबाद रोड बनाने वाली अशोका बिल्डकॉन-विवा हाई-वे दस्तावेजों में ही 60 करोड़ रुपए साल की वसूली का आंकड़ा दर्ज करा चुकी है। बावजूद इसके 2002 से टोल वसूली कर रही यह कंपनी अब टोल प्लाजावार पीने के पानी और सुविधाघर तक की व्यवस्था नहीं कर पाई। ट्रांसपोर्ट ऐसोसिएशन द्वारा बनाए "ए दबाव के बाद 2008-09 में जैसे-तैसे एक-दो क्रेन-एम्बुलेंस की व्यवस्था की थी जो आज भी रोड से "ायब ही नजर आती हैं। इसके साथ कंपनी ने बीस-चालीस किलोमीटर ले-बाई भी नहीं बनाए। नियमित रूप से सड़क पर चलने वाले ट्रक ड्राइवरों और टैक्सी ड्राइवरों की मानें तो कंपनी ने पुल-पुलियाओं की मरम्मत के ब"ैर ही टोल वसूली शुरू कर दी थी। चौखी ढाणी के पास कनाड़ पुलिया और बुरहानपुर के पास एक अन्य पुलिया पर काम चलता नजर आ जाता है।
क्या कहते हैं लो"
ट्रक ड्राइवर विजय परमार ने बताया इंदौर-बुरहानपुर लाइन पर चलते हुए मुझे 12 साल हो चुके हैं। नियमित आता-जाता हूं। आज तक कंपनी की क्रेन-एम्बुलेंस नहीं दिखी। ना"पुर से लौट रहे विजयन"र निवासी राजकुमार राव ने बताया महीने-डेढ़ महीने में एक टूर ल"ता ही है। टोल प्लाजा को छोड़ कोई व्यवस्था नजर नहीं आती। अमरावति-इंदौर बस के ड्राइवर कमल सुरवड़े ने बताया महाराष्ट्र के टोल प्लाजा सहुलियत में मप्र के टोल से आ"े है। वहां पानी-सुविधाघर से लेकर एम्बुलेंस तक की व्यवस्था है।
एमआर-10
बर्बाद हो रही सहुलियतों की सल्तनत
तकरीबन 15 करोड़ का एमआर-10 ब्रिज बनाने वाली पाथ इंडिया भी क्रेन-एम्बुलेंस और पेयजल-सुविधाघर जैसी सहुलियतें जुटाने में नाकाम रही। यहां लापरवाही का आलम यह है कि कंपनी ने पुल बनाते वक्त पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था के लिए दोनों ओर 64 स्ट्रीट लाइट के खंबे ल"ाए थे। इसके लिए 30 सेंट्रल लाइट के खंबे। 17 साल के लिए ब्रिज की देखरेख का जिम्मा लेने वाली कंपनी के ऑफिस और दिनभर टोलप्लाजा पर कर्मचारियों की मौजूद"ी के बावजूद 25 प्रतिशत से 'यादा खंबे जर्जर हो चुके हैं। सेंट्रल लाइट के कुछ खंबे तो उखड़ भी चुके।
क्या कहते हैं लो"
पंथ पिपलई निवासी राजेेंद्र सिंह ने बताया टोल पर कोई सहुलियत नहीं है। हां, थोड़ी-बहुत हरियाली जरूर नजर आती है। ट्रक ड्राइवर मदनलाल ठाकुर ने बताया यहीं क्यों मैंने तो कहीं भी टोल की टेंशन छोड़ कोई दूसरी सहुलियत नहीं देखी। एमआर-10 टोल प्लाजा पर तो विशालकाय होर्डिं" टां" दिए। तेज हवा में डर ल"ता है नीचे न "िर जाए।
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अनुबंध में कुछ नहीं
हमारे ए"्रीमेंट में के्रन-पानी-एम्बुलेंस-सुविधाघर या किसी अन्य सहुलियत का कोई जिक्र ही नहीं। ब्रिज वाले हिस्से की लाइटें भी व्यवस्थित है।
पुनीत अ"्रवाल, पाथ इंडिया
(अशोका बिल्डकॉन-विवा हाई-वे के कर्ताधर्ताओं से संपर्क नहीं हो पाया।)
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