Wednesday, July 29, 2015

स्वास्थ्य समिति: काम कम, दौरे ज्यादा


छह हजार से अधिक कर्मचारियों की फौज और व्यवस्था के निजीकरण के बाद भी प्लॉटों में फैला कचरा
स्वास्थ्य
नगर निगक की कार्यपद्धति दस विभागीय हिस्सो में बंटी है। इन विभागों के अपने दायित्व और जिम्मेदारियां हैं। हर विभाग की एक समिति होती है। अध्यक्ष एमआईसी सदस्य होता है। अन्य ९ सदस्यों में तीन विपक्ष और छह सत्तापक्ष के पार्षद रहते हैं। ऐसे में शहर की जनता उन लोगोंके कामकाज का लेखाजोखा जानना चाहती है जिन्हें चुनकर उन्होंने समिति का पदाधिकारी बनाया था। पाठकों की मांग पर 'पत्रिकाÓ हर दिन प्रस्तुत करेगा समितियों की मार्कशीट। पहली किश्त स्वास्थ्य विभाग..।
इंदौर, विनोद शर्मा ।
कचरा प्रबंधन के नाम कभी हैदराबाद-अहमदाबाद तो कभी आधुनिक स्लॉटर हाउस के लिए अलीगढ़। पांच बरस में ऐसे प'चीसों अंतरप्रांतीय दौरे और तकरीबन ६,००० सफाईकर्मियों के लंबे-चौड़े लबाजमें के बाद भी नतीजा सिफर। यह है नगर निगम मैनेजमेंट की सबसे मजबूत कड़ी कहलाने वाले स्वास्थ्य विभाग का पंचवर्षीय सफरनामा। पहले एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी), डिपार्टमेंट फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (डीएफआईडी) और बाद में जेएनएनयूआरएम से तकरीबन  ७० करोड़ की मदद मिलने के बाद भी विभाग शहर को मुक्कमल सफाई नहीं दे पाया। विभागीय पदाधिकारी जो भी बयानबाजी करें लेकिन सड़क-प्लॉट और मैदानों में फैली गंदगी की कड़वी सगााई को नकार नहीं सकते।
    इंदौर, किसी की औद्योगिक राजधानी तो किसी के लिए मुंबई का छोटा ख्याली रूप। २००४ की निर्वाचित निगम परिषद ने आवाम से पांच वर्षों में शहर की फिजा बदलकर स्व'छ और स्वस्थ्य इंदौर का वादा किया था। कुछ मौर्चों पर सफलता मिली तो कई मामलों में नाकामी ही हाथ लगी। फिर वह कचरा प्रबंधन की आधुनिक व्यवस्था हो या बूचडख़ानों का अत्याधुनिकीकरण। २००५ में स्वास्थ्य विभाग का बजट वेतन छोड़कर दो से तीन करोड़ रहता था जबकि आज जेएनएनयूआरएम-एडीबी और डीएफआईडी से विभाग ७० करोड़ से अधिक की योजनाओं पर काम कर रहा है। बजट में ३५ गुना इजाफे के मुकाबले व्यवस्था अपेक्षाकृत नहीं बदली। पांच साल बाद भी कॉलोनियों में कचरे के धुएं का गुबार लोगों का सांस लेना दुभर करता नजर आता है।
अध्यक्ष- राजेंद्र राठौर,
सदस्य- राजेंद्र जायसवाल, सुमनलता यादव, राजकपूर सुनहरे, पराग लोढ़े, हरिशंकर पटेल, प्रेम खड़ायता, मूलचंद यादव, दुर्गा कौल। २४ बैठकें हुई। आधे पार्षद गायब रहे।
प्रमुख काम
शहर में सफाई व्यवस्था को पुख्ता करना। सड़क, मोहल्ले और घरों से कचरा इक_ा करना। म'छरों के साथ बीमारियों की रोकथाम। जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र और विवाह पंजीयन प्रमाण-पत्र देना। दुषित खाद्य सामग्री की बिक्री पर अंकुश लगाना।
प्रमुख काम जो किए
- जुलाई २००५ की बाढ़ के बाद नालों की सफाई करके बाढ़ के प्रभाव को कम किया।
- एडीबी, डीएफआईडी के सहयोग से संसाधन बढ़ाए।
- २००६ में बर्ड फ्लू, २००७ में चिकनगुनिया और २००९ में स्वाइन फ्लू की रोकथाम के लिए अभियान चलाए।
- जोरों पर दुषित खाद्य सामग्री की धरपकड़।
- जेएनएनयूआरएम की सहमति के बाद ४३ करोड़ के संसाधन उपलब्ध कराए।
- शहर से पहले २०० से २५० मेट्रिक टन कचरा उठता था। आज ६०० टन से अधिक कचरा शहर से बाहर जा रहा है।
- विवाह पंजीयन की व्यवस्था नगर निगम में।
-जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र बगैर आवेदन के अस्पताल में भेजे गए।
काम जो नहीं कर पाए
- सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नोटिसों के बाद भी ट्रेंचिंग ग्राउंड में जलता है कचरा। पांच साल में पचासों दौरों के बाद भी कचरे से खाद बनाने का प्लांट कागजों में।
- तमाम संसाधनों की उपलब्धता के बाद भी म'छरों से मुक्त नहीं हुआ इंदौर।
- सफाई में ढिलाई के कारण २००७ में चिकनगुनिया और २००९ में डेंगू और डायरिया जैसी बीमारियों ने शहर में जगह बनाई।
- सफाईकर्मियों की बाढ़ के बाद भी सफाई असरकारक नहीं।
- कचरा पेटी के लिए ९०० में से २०० स्टैंड बने। बाकी पार्षदों की आपत्तियों की भेंट चढ़ गया।
- सुप्रीमकोर्ट के सख्त आदेशों के बाद भी स्लॉटर हाउस कागजों पर। दौरों के नाम पर लाखों रुपए खर्च हुए।
- शहर की पैथालॉज लेब्स का पंजीयन नहीं हुआ।
- दूध और खाद्य के जो नमूने पहले सुबह लिए जाते थे उनमें आई कमी ने मिलावटखोरों के मनोबल को बढ़ाया।
लिक से हटकर
- प्रभारी ने वैचारिक मतभेद के कारण सीएचओ डॉ. ए.के.पुराणिक को हटाकर डॉ. डी.सी.गर्ग को सीएचओ बनाया।
- विवाह पंजीयन कार्यालय को सुविधाजनक स्थान से हटाकर पहली मंजिल पर प्रभारी कार्यालय के पास लाया गया।
- कचरा प्रबंधन और संसाधनों की उपलब्धता को लेकर एमआईसी में रहा मतभेद। कई बार ठनी। 
- सफाई कर्मचारी संघ के एक नेता ने दी घासलेट डालकर महापौर का घर  जलाने की धमकी।
-गरीब तबके के लिए महत्वपूर्ण दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठजन स्वास्थ्य बीमा योजना एमआईसी की मनमानियों की भेंट चड़कर रह गई।
वोटर का मिजाज: विकास पर जोर, सफाई कमजोर
मनोरमागंज निवासी श्यामबाबू अग्रवाल ने बताया पांच साल पहले मैंने भाजपा को वोट दिया था। सोचा था शहर शहर साफ होगा। निगम परिषद ने पांव वर्षों में सड़क और सीवरेज सहित दूसरे ढांचागत विकासकार्यों पर जोर दिया हालांकि सफाई व्यवस्था कमजोर रही।
(सिटी फोटो में श्यामबाबू अग्रवाल का फोटो डला है। देख लेना।)
एक्सपर्ट कमेंट- बजट बढ़ाया, सफाई प्रबंधन नहीं
स्वास्थ्य विभाग को १० में से ३ नंबर ही दुंगा। इससे 'यादा का वह हकदार नहीं। वित्तीय सहयोग से नगर निगम ने स्वास्थ्य विभाग का बजट बढ़ाया। हालांकि शहर की बढ़ती सरहदों के साथ सफाई प्रबंधन पर जोर नहीं दिया। यही वजह है कि पांच साल बाद भी सफाई व्यवस्था वहीं की वहीं हैं। निगम मस्टरकर्मियों से सफाई कराता है जो मन लगाकर काम करने को तैयार ही नहीं। कचरा इक_ा करके पेटी में डालने के बजाय ये लोग आग लगाकर पाप टालने में विश्वास रखते हैं। इससे प्रदूषण फैल रहा है। लोग बीमार हो रहे हैं। साकेतनगर जैसे शहर के सबसे पॉश इलाके के प्लॉटों में औंधी पड़ी पेटियां और फैला कचरा सफाई सुधार के खोखले दावों को मुंह चिढ़ाता है।
महेंद्र महाजन, सीईपीआरडी



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