Thursday, August 4, 2016

गिरवी रखी जमीन को सरकारी घोषित कर दिया प्रशासन ने

न्यायालय दे चुका वसूली और बजावरी आदेश
चार साल पहले कर्जदाता संस्था ले चुकी है कब्जा
इंदौर. विनोद शर्मा ।
जिला प्रशासन ने जिन दो बहनों की जमीन को वारिसों के अभाव में सरकारी घोषित कर दिया है उनके खिलाफ द रीयल नायक सहकारी साख संस्था आठ साल से साढ़े तीन करोड़ की रिकवरी निकालकर बैठी है। अलग-अलग न्यायालय द्वारा 2010 और 2012 में जारी वसूली आदेश के आधार पर संस्था 2012 में ही दोनों बहनों की अचल संपत्ति का भौतिक कब्जा ले चुकी थी। संस्था का कहना है कि कलेक्टर के आदेश से हमारा कोई लेना-देना नहीं है, हमारा मामला कोर्ट में है जो कुर्की आदेश जारी कर चुकी है।
मामला जेरू मादन व नरगिस मेहता से संबंधित है जो सगी बहने थी और 3/3 न्यू पलासिया में रहती थीं। दोनों ने 2002 में अस्तित्व में आई द रीयल नायक सहकारी साख संस्था मर्यादित, नंदलालपुरा की सदस्यता ली। 2004-05 में इन बहनों ने अपने स्व सहायता समूह की महिलाओं के नाम से सवा करोड़ की एफडी कराई। आरबीआई की गाइडलाइन (बचत से चार गुना) के अनुसार समूह को संस्था ने इसी साल 4 करोड़ का लोन दे दिया। इसी बीच संस्था के अध्यक्ष पद को लेकर दीपक पंवार और रामचंद्र सोलंकी के बीच खींचतान शुरू हुई। तभी वसूली का मामला (0715/2005) 1999 एक्ट में गठित मध्यस्थम परिषद न्यायालय पहुंचा। जहां संस्था के वसूली नोटिसों का जवाब देते हुए दोनों बहनों ने कहा था कि पहले अध्यक्ष तय हो जाए, फिर पैसा जमा कर देंगे। अभी पैसा किसे जमा कराएं।
अध्यक्षता का मामला मप्र राज्य सहकारी अधिकरण, भोपाल पहुंचा जहां 6 नवंबर 2006 में फैसला दीपक पंवार के पक्ष में हुआ। फैसले के बाद संस्था ने  फिर वसूली का तकादा लगाया। दोनों बहनों ने अपनी बीमारी, संस्था में जमा एफडी और गिरवी रखी अपनी चल-अचल संपत्ति का हवाला देते हुए कहा कि ऋृण अदा कर देंगे। कुछ वक्त चाहिए। बावजूद इसके ऋृण नहीं चुकाया गया। 30 दिसंबर 2010 और 2 जून 2012 में मध्यस्थम परिषद न्यायालय ने चल-अचल संपत्ति जब्ती-कुर्की के आदेश पारित कर दिए।
संस्था ने बजावरी लगाई, उधर रजिस्ट्री हो गई
दोनों आदेश का हवाला देते हुए संस्था ने 8 सितंबर 2015 को जज वी.एस.रघुवंशी की 42 नंबर कोर्ट में बजावरी प्रकरण लगाया। इसी बीच दोनों बहनों के तथाकथित वारिस के रूप में सामने आए जहांगीर पिता दाराशाह मेहता, हिल्लू पिता दाराशाह मेहता, रोशन उर्फ रशीदा पिता गुजोर टेंगरा, केटी सुरेंद्र मेहता पिता रतन शाह, मीनू पिता दर्शन मेहता ने बिल्डर अशोक जैन के नाम 3/3 न्यू पलासिया स्थित 11600 वर्गफीट जमीन की रजिस्ट्री कर दी। संपत्ति पर संस्था के बोर्ड लगे होने के बाद भी जैन ने कब्जे का प्रयास किया। संस्था ने विरोध किया और इसकी शिकायत 9 फरवरी 2016 को तुकोगंज थाने पर की। कोई कार्रवाई  नहीं हुई। रजिस्ट्री निरस्त करने के नोटिस जारी हो चुके हैं।
कोर्ट ने दर्ज किया जैन के खिलाफ मामला
अंतत: संस्था के परिवाद पर न्यायालय ने 10 मार्च 2016 को अशोक  जैन और नवाब के खिलाफ संस्था संचालकों को धमकाने के मामले में धारा 506/504 में प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया। 294, 457, 427, 120 बी/34 जैसी अन्य धाराओं के तहत जज बी.के.द्विवेदी की 43 नंबर कोर्ट ने जहांगीर, अशोक और नवाब को नोटिस जारी कर दिए जो अब तक  तामिल नहीं हुए।
मामला विचाराधीन, बना दिया फर्जी आदेश
संस्था को जमीन से दूर करने के लिए जहांगीर और अशोक ने सहकारिता ट्रिब्यूनल में अगस्त 2015 को रिविजन प्रस्तुत की जबकि आदेश के विरुद्ध अपील करना थी। संस्था के पक्ष में 2012 में जारी बजावरी आदेश की फोटोकॉपी कर नया आदेश बनाया और उसमें इसकी तारीखें बदलकर जुलाई 2015 कर दी। ताकि वसूली के प्रकरण को चुनौती देने के लिए जमा की जाने वाली 25 प्रतिशत राशि से बचा जा सके। 45 दिन के बाद अपील नहीं होती। इसीलिए जुलाई का आदेश बनाया और अगस्त में अपील कर दी।
420 का मुकदमा ठोका संस्था ने
फर्जीवाड़े की जानकारी मिलते ही संस्था ने जहांगीर और अशोक के खिलाफ 25 जनवरी 2016 को धोखाधड़ी का केस लगाया। 25 मार्च 2016 को जज अमित रंजन समाधिया की कोर्ट ने ट्रिब्यूनल से आदेश की ओरिजनल कॉपी मांगी है। नहीं मिलने पर धोखाधड़ी का केस पंजीबद्ध होगा। 

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