Monday, August 22, 2016

राऊ फ्लाइओवर नहीं बनाएगी आईडीटीएल!

छह साल के इंतजार के बाद टूटा कंपनी का धैर्य
इंदौर-देवास प्रोजेक्ट जल्द पूरा, एक फ्लाइओवर का कितना करें इंतजार
इंदौर. विनोद शर्मा ।
सवा पांच सौ करोड़ का इंदौर-देवास सिक्सलेन बनाती आ रही इंदौर गायत्री टोलवेज लिमिटेड (आईडीटीएल) प्रस्तावित राऊ फ्लाइओवर नहीं बनाएगी। खंडवा रोड पर निर्माणाधीन फ्लाइओवर को पूरा और सर्विस रोड को मरम्मत करके कंपनी प्रोजेक्ट के हाथ जोड़ लेगी। इसकी वजह, राऊ जंक्शन की नर्मदा लाइन शिफ्टिंग को लेकर छह साल से चले आ रहे गतिरोध को बताया जा रहा है जिसे एनएचएआई और नगर निगम भी मिलकर दूर नहीं कर पाए।
इंदौर-देवास सिक्सलेन के 45.5 किलोमीटर लंबे हिस्से में चार फ्लाइओवर और 15 अंडर पासेस बनना थे। अंडर पासेस बन चुके हैं। नेमावर रोड और मांगलिया फ्लाइओवर बन चुके हैं। खंडवा रोड फ्लाइओवर पर काम जारी है। बचा सबसे महत्वपूर्ण राऊ फ्लाइओवर जो जिस जमीन पर बनना है वहां से नर्मदा की लाइन गुजर रही है। 2010 से जून 2016 तक एनएचएआई लाइन शिफ्टिंग को लेकर ठोस निर्णय नहीं ले पाया। 14 जून में नगर निगम के नर्मदा परियोजना विभाग ने टेंडर जारी किए थे। आठ कंपनियों ने रुचि ली  लेकिन अब तक बिड खोलकर वर्कआॅर्डर जारी नहीं हुआ। जनवरी 2017 तक लाइन क्लीयर होती दिख भी नहीं रही। इसीलिए कंपनी ने काम छोड़ने को मन बना लिया है।
इंतजार करें भी तो कब तक
कंपनी का कहना है कि हमने 2010 में प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया था। साइट क्लीयर मिलती तो फ्लाइओवर बने को चार साल हो चुके होते। अब जबकि प्रोजेक्ट करीब-करीब पूरा हो चुका है तो पूरा लाव लश्कर लेकर साइट क्लीयर होने का इंतजार करें भी तो कब तक? इस खर्च को हम क्यों वहन करें। कंपनी की गलती भी नहीं है।
बनने में लगेंगे डेढ़ साल
चूंकि राऊ जंक्शन है और यहां कई अहम रास्ते मिलते हैं इसीलिए एबी रोड को निर्बाध करने के मकसद से यह फ्लाइओवर सबसे जरूरी है। फ्लाईओवर करीब 800 मीटर लंबा होगा। खाली जमीन पर बने बाकी फ्लाइओवर के मुकाबले इसे बनाना लाइन शिफ्टिंग के बावजूद निर्माण एजेंसी के लिए मुश्किल होगा। बनाने में डेढ़ साल लगेंगे।
निर्माण की लागत भी बढ़ गई
2010 में जब काम शुरू करना था तब सीमेंट, सरिया, रेत और लेबर की कॉस्ट अलग थी और 2016 में अलग। दोनों में दोगुना का अंतर है। अभी और छह महीने काम शुरू होता नहीं दिख रहा। ऐसे में लागत का और बढ़ना तय है।
5.72 करोड़ टेंडर : बुलाए लेकिन खोले नहीं
दो तरह की लाइन है फ्लाइओवर की बाधा है। 1500 और 1748 एमएम डाया। कुल 300 मीटर लंबी लाइन शिफ्ट होगी। नर्मदा परियोजना ने इसकी अनुमानित लागत 5.72 करोड़ आंकी है और इसी लागत से 14 जून को टेंडर निकाला है। 17 जून को सबमिशन जरूरी था। इसी दिन टेक्नीकल प्रपोजल खोले जाना था। 21 जून को फाइनेंशियल बिड खुलना थी। 16 अगस्त हो चुकी है अब तक बिड नहीं खोली गई। इस संबंध में नर्मदा परियोजना के कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि एक-दो दिन में फाइनेंशियल बिड खोल देंगे। श्रीवास्तव दबंग दुनिया से बातचीत के दौरान यही बात 24 जुलाई, 2 अगस्त, 5 अगस्त और 9 अगस्त को भी कह चुके हैं।

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