विभाग से ले दाम, करें निजी काम
इंदौर. विनोद शर्मा ।
पेयजल आपूर्ति के लिए बने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग में वर्षों से जमा मैदानी अमला लोगों को मिलने वाले पानी से पैसा बना रहा है। किसी ने अपना कामकाज छोड़कर भाई के नाम से कंपनी खोली और अपने ही विभाग में ठेकेदारी शुरू कर दी। कुछ ठेकेदारों के भागीदार बन बैठे तो कुछ ने ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने को ही धंधा बना लिया। इसका खुलासा बीते दिनों पीएचई मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री तक पहुंची एक शिकायत में हुआ है।
पीएचई उन विभागों में से एक है जो इंदौर जैसे शहर में सुर्खियों से कोसों दूर हैं। इसीलिए अधिकारियों ने अपना जैबी विभाग बना दिया है। हालात, यह है कि मैदानी अमला विभाग से तनख्वाह तो ले रहा है लेकिन काम कर रहा है निजी। 7 अगस्त 2016 को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, पीएचई मंत्री कुसुम महदेले और प्रभारी मंत्री जयंत मलैया तक पहुंची इंदौर जिला पेयजल समीक्षा समिति के सदस्य सज्जन भिलवारे की शिकायत भी इसकी पुष्टि करती है। शिकायत में दो उपयंत्री सहित पांच अधिकारियों और कर्मचारियों के नामों का जिक्र है जिन्हें एक जगह काम करते-करते 19 साल तक हो चुके हैं।
एसडीएम के छापे में गायब मिले थे 25 लोग
मनमानी की बानगी जून महीने में भी देखने को मिली जब कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम ने अनायास दौरा किया और 35 के स्टाफ वाले आॅफिस में कार्यपालन यंत्री सहित 25 गायब मिले।
बालाजी बोरवेल पर मेहरबान
शिकायत के अनुसार मैदानी अमला बालाजी बोरवेल नाम की कंपनी पर मेहरबान है। कंपनी सांवेर का काम देखती है जहां कार्यपालन यंत्री के खासमखास नाइक 2003 से उपयंत्री है। इसके अलावा वेदांत इंटरप्राइजेस और एन.बी. ब्रदर्स को भी लूट की छूट प्राप्त है।
ऐसे बनाया काम को कमाई का साधन
-- हेंडपंप ठेके पर। ठेकेदारों को मनमानी की छूट।
-- गोदाम से सामान ठेकेदारों को दे देते हैं। सामान चोरी की शिकायत भी हो चुकी है।
-- आॅफिस में ही बन जाते हैं पंचायतों के पंचनामे।
-- सुधरता एक हेंडपंप है, पंचायत से साइन करवा लेते हैं पांच-सात हेंडपंप पर।
-- वर्षों से खराब हेंडपंप को भी मेंटेनेंस बिल लगा देते हैं।
किसकी क्या शिकायत
एम.के.नाईक, उपयंत्री : सांवेर में मई 2003 से पदस्थ, काम मुख्यालय में ही। बालाजी बोरवेल कंपनी के साथ भागीदारी। अधूरे कामों को देते हैं पूर्णता प्रमाण। परीक्षण के बिना काम का भुगतान। इंदौर की पॉश कॉलोनियों में बंगले। फ्लैट्स।
सुभाषचंद्र गवंडे, उपयंत्री तकनीकी : जुलाई 2012 से। टीएस का काम करते हुए ठेकेदारों से 10 प्रतिशत की हिस्सेदारी। लेब इंचार्ज हैं, ग्रामीण क्षेत्रों से सेंपल नहीं मंगवाते। संजना पार्क में बंगला। नीर नगर में प्लॉट। अग्रवाल पब्लिक स्कूल के पास दो मंजिला डुप्लेक्स, एक होस्टल, मधुमिलन के पास एक मकान।
पुरणसिंह बेस, हेंडपंप टेक्नीशियन: सितंबर 2009 से पदस्थ। यूं काम हेंडपंप रिपेयरिंग का है जो करने के बजाय भाई राजेंद्रसिंह और बालाजी बोरवेल के नाम से सांवेर में ठेके ले रखे हैं। 10 कारें, देवास के टिनोनिया में पत्नी और पिता के नाम से 50 बीघा जमीन कुछ समय पहले खरीदी। जमीन पर सेमल्याचाऊ स्थित इलाहाबाद बैंक से लोन भी ले रखा है। इंदौर में एक बंगला, दो मकान। एक ढाबा भी।
राजेंद्र वर्मा, अनुरेखक : जून 1992 से इंदौर में पदस्थ। अनुरेखक का पद वर्षों से खत्म। विभाग के संसाधनों से बालाजी बोरवेल का हेंडपंप संधारण विभाग देखते हैं। इंदौर में अच्छी खासी संपत्ति।
ओ.पी.सोनवने, अकाउंट : अगस्त 2012 से पदस्थ। 10 प्रतिशत कमीशन के साथ बोरवेल कंपनियों के बिल पास करवाते हैं।
पूरा ढर्रा बिगड़ा हुआ है विभाग का
समिति में एक साल हो चुका है। शुरू से अधिकारियों का रवैया मनमाना ही नजर आया। वर्षों से जमा मैदानी अमला ठेकेदारी कर रहा है। गोदाम से सामान गायब करके ठेकेदारों को थमा देते हैं। करोड़ों का घपला हुआ है बीते वर्षों में जिसे दबाया जाता रहा है। उम्मीद है शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई होगी।
सज्जनसिंह भिलवारे, सदस्य
इंदौर जिला पेयजल समीक्षा समिति
इंदौर. विनोद शर्मा ।
पेयजल आपूर्ति के लिए बने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग में वर्षों से जमा मैदानी अमला लोगों को मिलने वाले पानी से पैसा बना रहा है। किसी ने अपना कामकाज छोड़कर भाई के नाम से कंपनी खोली और अपने ही विभाग में ठेकेदारी शुरू कर दी। कुछ ठेकेदारों के भागीदार बन बैठे तो कुछ ने ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने को ही धंधा बना लिया। इसका खुलासा बीते दिनों पीएचई मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री तक पहुंची एक शिकायत में हुआ है।
पीएचई उन विभागों में से एक है जो इंदौर जैसे शहर में सुर्खियों से कोसों दूर हैं। इसीलिए अधिकारियों ने अपना जैबी विभाग बना दिया है। हालात, यह है कि मैदानी अमला विभाग से तनख्वाह तो ले रहा है लेकिन काम कर रहा है निजी। 7 अगस्त 2016 को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, पीएचई मंत्री कुसुम महदेले और प्रभारी मंत्री जयंत मलैया तक पहुंची इंदौर जिला पेयजल समीक्षा समिति के सदस्य सज्जन भिलवारे की शिकायत भी इसकी पुष्टि करती है। शिकायत में दो उपयंत्री सहित पांच अधिकारियों और कर्मचारियों के नामों का जिक्र है जिन्हें एक जगह काम करते-करते 19 साल तक हो चुके हैं।
एसडीएम के छापे में गायब मिले थे 25 लोग
मनमानी की बानगी जून महीने में भी देखने को मिली जब कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम ने अनायास दौरा किया और 35 के स्टाफ वाले आॅफिस में कार्यपालन यंत्री सहित 25 गायब मिले।
बालाजी बोरवेल पर मेहरबान
शिकायत के अनुसार मैदानी अमला बालाजी बोरवेल नाम की कंपनी पर मेहरबान है। कंपनी सांवेर का काम देखती है जहां कार्यपालन यंत्री के खासमखास नाइक 2003 से उपयंत्री है। इसके अलावा वेदांत इंटरप्राइजेस और एन.बी. ब्रदर्स को भी लूट की छूट प्राप्त है।
ऐसे बनाया काम को कमाई का साधन
-- हेंडपंप ठेके पर। ठेकेदारों को मनमानी की छूट।
-- गोदाम से सामान ठेकेदारों को दे देते हैं। सामान चोरी की शिकायत भी हो चुकी है।
-- आॅफिस में ही बन जाते हैं पंचायतों के पंचनामे।
-- सुधरता एक हेंडपंप है, पंचायत से साइन करवा लेते हैं पांच-सात हेंडपंप पर।
-- वर्षों से खराब हेंडपंप को भी मेंटेनेंस बिल लगा देते हैं।
किसकी क्या शिकायत
एम.के.नाईक, उपयंत्री : सांवेर में मई 2003 से पदस्थ, काम मुख्यालय में ही। बालाजी बोरवेल कंपनी के साथ भागीदारी। अधूरे कामों को देते हैं पूर्णता प्रमाण। परीक्षण के बिना काम का भुगतान। इंदौर की पॉश कॉलोनियों में बंगले। फ्लैट्स।
सुभाषचंद्र गवंडे, उपयंत्री तकनीकी : जुलाई 2012 से। टीएस का काम करते हुए ठेकेदारों से 10 प्रतिशत की हिस्सेदारी। लेब इंचार्ज हैं, ग्रामीण क्षेत्रों से सेंपल नहीं मंगवाते। संजना पार्क में बंगला। नीर नगर में प्लॉट। अग्रवाल पब्लिक स्कूल के पास दो मंजिला डुप्लेक्स, एक होस्टल, मधुमिलन के पास एक मकान।
पुरणसिंह बेस, हेंडपंप टेक्नीशियन: सितंबर 2009 से पदस्थ। यूं काम हेंडपंप रिपेयरिंग का है जो करने के बजाय भाई राजेंद्रसिंह और बालाजी बोरवेल के नाम से सांवेर में ठेके ले रखे हैं। 10 कारें, देवास के टिनोनिया में पत्नी और पिता के नाम से 50 बीघा जमीन कुछ समय पहले खरीदी। जमीन पर सेमल्याचाऊ स्थित इलाहाबाद बैंक से लोन भी ले रखा है। इंदौर में एक बंगला, दो मकान। एक ढाबा भी।
राजेंद्र वर्मा, अनुरेखक : जून 1992 से इंदौर में पदस्थ। अनुरेखक का पद वर्षों से खत्म। विभाग के संसाधनों से बालाजी बोरवेल का हेंडपंप संधारण विभाग देखते हैं। इंदौर में अच्छी खासी संपत्ति।
ओ.पी.सोनवने, अकाउंट : अगस्त 2012 से पदस्थ। 10 प्रतिशत कमीशन के साथ बोरवेल कंपनियों के बिल पास करवाते हैं।
पूरा ढर्रा बिगड़ा हुआ है विभाग का
समिति में एक साल हो चुका है। शुरू से अधिकारियों का रवैया मनमाना ही नजर आया। वर्षों से जमा मैदानी अमला ठेकेदारी कर रहा है। गोदाम से सामान गायब करके ठेकेदारों को थमा देते हैं। करोड़ों का घपला हुआ है बीते वर्षों में जिसे दबाया जाता रहा है। उम्मीद है शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई होगी।
सज्जनसिंह भिलवारे, सदस्य
इंदौर जिला पेयजल समीक्षा समिति
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