Monday, August 22, 2016

सिंहस्थ से बचे फिर भी मिल गया सम्मान

ड्यूटी निरस्त करा चुकाकर आराम फरमाते रहे 45 दिन
इंदौर. विनोद शर्मा ।
सिंहस्थ 2016 को सफल बनाने में जिन पांच हजार अधिकारियों और कर्मचारियों ने रात-दिन एक कर दिए थे उन्हें प्रदेश सरकार सम्मानित कर रही है। सम्मान पाने वालों में कई ऐसे चेहरे भी शामिल हैं जो सिंहस्थ से जी चुराते रहे। कोई ड्यूटी केंसल कराकर बैठा था तो कोई लगातार शिकायत के बाद मुंह दिखाई करने पहुंचा था। सम्मान की बंदरबांट में शामिल ऐसे चेहरों की संख्या 450 से ज्यादा बताई जा रही है। हालांकि संभागीय अधिकारी इसे त्रुटी बता रहे हैं लेकिन त्रुटी कैसे हुई और क्या सम्मानितों से सम्मान दोबारा लिया जाएगा? इसका जिम्मेदारों के पास कोई जवाब नहीं।
सिंहस्थ -2016 में लगातार 45 दिनों तक सेवा देने वालों को विभागस्तर पर उत्कृष्ठ सेवा सम्मान मेडल और प्रमाण पत्र बांटे जा रहे हैं। इसमें इंदौर संभाग में ही 401 चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों को सिंहस्थ में स्वास्थ्य सेवाओं का दायित्व सौंपा था। अब तक सभी को मेडल और प्रमाण पत्र मिल चुके हैं। अब पांच हजार रुपए का नकद मानदेय मिलना बाकी है। लिहाजा अब शिकायतों का दौर भी शुरू हो चुका है। शिकायतकर्ताओं की मानें तो सम्मान पाने वालों में ऐसे चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं जो बहाने बनाकर दबाव-प्रभाव से सिंहस्थ ड्यूटी निरस्त करवा चुके थे।
सिर्फ इंदौर में ही 110 का सम्मान
संभाग से भेजे गए 401 में से 110 चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी सिर्फ इंदौर जिले के हैं जिनके सम्मान हुए हैं। इनमें एमवाय और जिला अस्पताल के डॉक्टर भी शामिल है। एमवाय के डॉक्टरों की जगह एमजीएम के असिसटेंट प्रोफेसर भेजे गए। जब उन्होंने एडवांस टीएडीए मांगा था तो उन्हें फटकार मिली थी।
कैसे हुआ सम्मान
सिंहस्थ के दौरान शासन ने 19 मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी जो बाद में डीन ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डेमोस्टेÑटर (असिसटेंट प्रोफेसर) से रिप्लेस कर दी गई। किसी जगह ऐसा नहीं हुआ, सिर्फ इंदौर में हुआ। जबकि हम स्वास्थ्य विभाग के नहीं, चिकित्सा शिक्षा विभाग के  लोग हैं। बावजूद इसके बीते दिनों हुए सम्मान समारोह में उन लोगों के भी सम्मान हुए जिनके रिप्लेसमेंट भेजे गए थे।
डॉ. महेंद्र शर्मा, एमजीएम
क्या सम्मान वापस होंगे
मामला खुलने के बाद जिम्मेदार बगले झांक रहे हैं लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अब जबकि ऐसे लोग सम्मानित हो चुके हैं उन्हें मेडल और प्रशसति पत्र मिल चुके हैं। जल्द ही मानदेय की राशि मिलना है। उनसे सम्मान वापस लिया जाएगा?
पीएचई में भी सम्मान
स्वास्थ्य विभाग की तरह ही लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के मैदानी अमले की ड्यूटी भी सिंहस्थ में लगाई गई थी जिसमें कई लोग शासन के सख्त आदेश के बावजूद अपने आकाओं की मेबरहानी से बचे रहे। अलग-अलग अखबारों में भी इसका खुलासा हुआ था। इनमें से कई भी सम्मानित हुए हैं। इनकी शिकायत पीएचई सदस्य सज्जनसिंह भिलवारे भी कर चुके हैं।
बड़ी त्रुटी, जांच करवाएंगे
जिन लोगों की ड्यूटी निरस्त हो चुकी थी उनका सम्मान सूची में नाम शामिल किया जाना बड़ी त्रुटी है इस संबंध में जांच करवा रहे हैं।
डॉ. शरद पंडित, संभागीय संयुक्त संचालक

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