सायाजी की सीनाजोरी
- अखबार और अखबार मालिकों पर भी साधा निशाना
इंदौर. विनोद शर्मा ।
कौड़ियों के दाम पर करोड़ों की जमीन लीज पर लेकर जमीन की मनमानी बंदरबांट करने वाला सायाजी होटल्स प्रा.लि. ठोस जवाब देने के बजाय अब सीनाजोरी पर उतर आया है। बुधवार को हुई बोर्ड बैठक से ठीक पहले सायाजी के प्रतिनिधि व वकील ने करारा पत्र लिखकर प्राधिकरण पदाधिकारियों पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई का आरोप तक मढ़ दिया। प्रबंधन का कहना है सायाजी को लेकर बोर्ड पदाधिकारी शत्रुता का भाव रखते हैं। इसीलिए लीज निरस्ती का निर्णय हो चुका है, बोर्ड बैठक में चर्चा सिर्फ औचारिकता है।
बुधवार को बोर्ड बैठक का मुख्य विषय सायाजी की लीज ही थी लेकिन लीज निरस्त करने को लेकर ठोस निर्णय फिर टल गया। इसी बीच सायाजी के वकील ने इंदौर के प्रमुख समाचार पत्र में अब तक सायाजी के खिलाफ छपती आ रही खबरों की कॉपियों के साथ एक पत्र सीईओ को थमा दिया। पत्र में प्रबंधन ने कहा कि प्रेस कॉम्पलेक्स में अखबरों को दिए गए प्लॉटों पर प्राधिकरण मेहरबान है। इसीलिए यहां समझौतावादी नीतियां अपनाई जाती है जबकि सायाजी के खिलाफ एकजूट होकर सब यही कोशिश में जूट चÞुके हैं कि लीज निरस्त हो। यदि इनके लिए समझौता नीति है तो हमारे लिए भी हो अन्यथा इनकी भी लीज निरस्त हो।
निर्णय हो चुका, बहस औपचारिकता
प्रबंधन का कहना है कि सभी बोर्ड मेम्बर सायाजी के प्रति द्वेष रखते हैं। हमें पता है कि हम कुछ भी सफाई रखें लेकिन लीज निरस्त होगी ही। क्योंकि लीज निरस्ती का फैसला तो यह पहले ही ले चुके हैं, बैठक में चर्चा करना तो सिर्फ औपचारिकता है ताकि इन पर एकपक्षीय कार्रवाई का आरोप न लगे।
सायाजी के कारनामे
- होटल प्रबंधन ने प्लॉट के एक हिस्से (7000 हजार वर्गफीट) में सयाजी प्लॉजा के नाम से कॉम्पलेक्स बना दिया। जांच रिपोर्ट के अनुसार अंडर ग्राउंड(यूजी) पर 10 दुकानें, ग्राउंड फ्लोर पर 10 दुकानें और प्रथम तल पर 2 दुकानें बनाई गई।
- लीज शर्तों के अनुसार प्लॉट अविभाजित था लेकिन होटल प्रबंधन ने कॉम्पलेक्स की दुकानें बेच दी। सभी की रजिस्ट्री हो चुकी है। इन दुकानों का खरीदार अपने हिसाब से उपयोग कर रहे हैं।
- रिपोर्ट के अनुसार आवंटी लीज शर्त क्र. 4 का उल्लंघन करके होटल के लिए आवंटित प्लॉट पर बनी दुकानों का कमर्शियल इस्तेमाल कर रहे हैं।
- दुकानें अलग-अलग लोगों को बेचकर व्ययन नियम की शर्त- 29 का उल्लंघन है।
- नाकोड़ा डेवलपर्स, आरती जितेंद्र चुघ, कल्पवृक्ष आनंदमोहन श्रीवास्तव, अमित नामदेव बालानी, देवीप्रसाद मोहनलाल शर्मा, अर्पित गुप्ता, सुधीर सोन्थलिया, महेंद्र दाबानी, निहालसिंहं पिता सुखदेव सिंह, चंदू कुरील, राजकुमार कुरील, सुचित्रा धनानी, एल्पिक फाइनेंस लि., मुरलीधर भाटिया के नाम 28 रजिस्ट्री कर दी।
- निर्माण भी मनमाना किया। जिसे लेकर पहले ही लोकायुक्त की जांच और हाईकोर्ट में केस चल रहा है।
अखबार और होटल में बड़ा अंतर है
सायाजी
- जमीन होटल के लिए ली और बड़ा हिस्सा दुकानें बनाकर बेच दिया।
- होटल का विशुद्ध उपयोग व्यावसायिक है।
- जांच हुई, रिपोर्ट के बाद लीज निरस्त हुई।
- एमओएस की जमीन बेची है।
- हाईकोर्ट में कोई मामला पेंडिंग नहीं।
- प्राधिकरण के पत्रों के जवाब तक नहीं दिए।
प्रेस कॉम्पलेक्स
- जितनी प्रेस को जमीन दी उनमें से किसी ने नहीं बेची।
- किराया पर दी है जो कभी भी खाली कराया जा सकता है।
- लीज निरस्त 2005 में हो गई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर 2008 में आईडीए में तत्समय की गाइडलाइन से पैसा जमा कराया है।
- अखबार को व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं कहा जा सकता।
- जांच हुई, रिपोर्ट के बाद मामला कोर्ट में है।
- सुप्रीमकोर्ट ने इंडियन एक्सप्रेस के मामले में व्यवस्था देते हुए कहा था कि समाचार पत्र घाटे का सौदा है इसीलिए अखबार अपनी बिल्डिंग का हिस्सा किराए पर दे सकते हैं।
- अखबार और अखबार मालिकों पर भी साधा निशाना
इंदौर. विनोद शर्मा ।
कौड़ियों के दाम पर करोड़ों की जमीन लीज पर लेकर जमीन की मनमानी बंदरबांट करने वाला सायाजी होटल्स प्रा.लि. ठोस जवाब देने के बजाय अब सीनाजोरी पर उतर आया है। बुधवार को हुई बोर्ड बैठक से ठीक पहले सायाजी के प्रतिनिधि व वकील ने करारा पत्र लिखकर प्राधिकरण पदाधिकारियों पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई का आरोप तक मढ़ दिया। प्रबंधन का कहना है सायाजी को लेकर बोर्ड पदाधिकारी शत्रुता का भाव रखते हैं। इसीलिए लीज निरस्ती का निर्णय हो चुका है, बोर्ड बैठक में चर्चा सिर्फ औचारिकता है।
बुधवार को बोर्ड बैठक का मुख्य विषय सायाजी की लीज ही थी लेकिन लीज निरस्त करने को लेकर ठोस निर्णय फिर टल गया। इसी बीच सायाजी के वकील ने इंदौर के प्रमुख समाचार पत्र में अब तक सायाजी के खिलाफ छपती आ रही खबरों की कॉपियों के साथ एक पत्र सीईओ को थमा दिया। पत्र में प्रबंधन ने कहा कि प्रेस कॉम्पलेक्स में अखबरों को दिए गए प्लॉटों पर प्राधिकरण मेहरबान है। इसीलिए यहां समझौतावादी नीतियां अपनाई जाती है जबकि सायाजी के खिलाफ एकजूट होकर सब यही कोशिश में जूट चÞुके हैं कि लीज निरस्त हो। यदि इनके लिए समझौता नीति है तो हमारे लिए भी हो अन्यथा इनकी भी लीज निरस्त हो।
निर्णय हो चुका, बहस औपचारिकता
प्रबंधन का कहना है कि सभी बोर्ड मेम्बर सायाजी के प्रति द्वेष रखते हैं। हमें पता है कि हम कुछ भी सफाई रखें लेकिन लीज निरस्त होगी ही। क्योंकि लीज निरस्ती का फैसला तो यह पहले ही ले चुके हैं, बैठक में चर्चा करना तो सिर्फ औपचारिकता है ताकि इन पर एकपक्षीय कार्रवाई का आरोप न लगे।
सायाजी के कारनामे
- होटल प्रबंधन ने प्लॉट के एक हिस्से (7000 हजार वर्गफीट) में सयाजी प्लॉजा के नाम से कॉम्पलेक्स बना दिया। जांच रिपोर्ट के अनुसार अंडर ग्राउंड(यूजी) पर 10 दुकानें, ग्राउंड फ्लोर पर 10 दुकानें और प्रथम तल पर 2 दुकानें बनाई गई।
- लीज शर्तों के अनुसार प्लॉट अविभाजित था लेकिन होटल प्रबंधन ने कॉम्पलेक्स की दुकानें बेच दी। सभी की रजिस्ट्री हो चुकी है। इन दुकानों का खरीदार अपने हिसाब से उपयोग कर रहे हैं।
- रिपोर्ट के अनुसार आवंटी लीज शर्त क्र. 4 का उल्लंघन करके होटल के लिए आवंटित प्लॉट पर बनी दुकानों का कमर्शियल इस्तेमाल कर रहे हैं।
- दुकानें अलग-अलग लोगों को बेचकर व्ययन नियम की शर्त- 29 का उल्लंघन है।
- नाकोड़ा डेवलपर्स, आरती जितेंद्र चुघ, कल्पवृक्ष आनंदमोहन श्रीवास्तव, अमित नामदेव बालानी, देवीप्रसाद मोहनलाल शर्मा, अर्पित गुप्ता, सुधीर सोन्थलिया, महेंद्र दाबानी, निहालसिंहं पिता सुखदेव सिंह, चंदू कुरील, राजकुमार कुरील, सुचित्रा धनानी, एल्पिक फाइनेंस लि., मुरलीधर भाटिया के नाम 28 रजिस्ट्री कर दी।
- निर्माण भी मनमाना किया। जिसे लेकर पहले ही लोकायुक्त की जांच और हाईकोर्ट में केस चल रहा है।
अखबार और होटल में बड़ा अंतर है
सायाजी
- जमीन होटल के लिए ली और बड़ा हिस्सा दुकानें बनाकर बेच दिया।
- होटल का विशुद्ध उपयोग व्यावसायिक है।
- जांच हुई, रिपोर्ट के बाद लीज निरस्त हुई।
- एमओएस की जमीन बेची है।
- हाईकोर्ट में कोई मामला पेंडिंग नहीं।
- प्राधिकरण के पत्रों के जवाब तक नहीं दिए।
प्रेस कॉम्पलेक्स
- जितनी प्रेस को जमीन दी उनमें से किसी ने नहीं बेची।
- किराया पर दी है जो कभी भी खाली कराया जा सकता है।
- लीज निरस्त 2005 में हो गई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर 2008 में आईडीए में तत्समय की गाइडलाइन से पैसा जमा कराया है।
- अखबार को व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं कहा जा सकता।
- जांच हुई, रिपोर्ट के बाद मामला कोर्ट में है।
- सुप्रीमकोर्ट ने इंडियन एक्सप्रेस के मामले में व्यवस्था देते हुए कहा था कि समाचार पत्र घाटे का सौदा है इसीलिए अखबार अपनी बिल्डिंग का हिस्सा किराए पर दे सकते हैं।
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