द सियागंज होलसेल किराना मर्चेंट एसोसिएशन की वर्कशॉप में वाणिज्यिक कर अपर आयुक्त व उपायुक्त ने दूर किए भ्रम
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
नई व्यवस्था के साथ आशा और आशंका रहती हैं लेकिन आशंकाओं के कारण नई व्यवस्था को नहीं रोका जा सकता। प्रजातांत्रिक व्यवस्था में कर या कर नीति को लेकर न राज्य मनमानी कर सकते हैं। न केंद्र। जीएसटी को लेकर केंद्र आश्वस्त है राज्यों को नुकसान नहीं होगा। इसीलिए पांच साल तक नुकसान की भरपाई की गारंटी भी दी जा रही है। रविवार को द सियागंज होलसेल किराना मर्चेंट एसोसिएशन द्वारा जीएसटी को लेकर आयोजित कार्यशाला पर बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए यह जानकारी वाणिज्यिक कर अपर आयुक्त राजेश बहुगुणा ने दी।
होटल रेडिसन ब्लू में आयोजित वर्कशॉप में श्री बहुगुणा ने कहा कि आज देश में एक ही चीज पर अलग-अलग तरह के शुल्क और कर लगते हैं। जैसे- किसी चीज के निर्माण पर लगने वाला एक्साइज ड्यूटी या उत्पादन कर, वस्तु के आयात पर कस्टम ड्यूटी। किसी चीज की बिक्री पर वैट टैक्स और उपभोक्ता द्वारा खपत पर सर्विस टैक्स। गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) या वस्तु व सेवा कर के अंतर्गत इन सभी टैक्सों को हटाकर एक ही टैक्स कर दिया जाएगा। जीएसटी को लेकर केंद्र द्वारा बनाई गई एम्पावर्ड कमेटी ‘जिसकी आखिरी बैठक 26 जुलाई को हुई’, के सदस्य व वाणिज्यिक कर उपायुक्त सुदीप गुप्ता ने कहा कि टैक्स भुगतान है, दान नहीं। टैक्स सरकार तय करती है, देना सबको है। गलत पैसा न केंद्र ले सकता है, न राज्य। नियम तुगलकी नहीं है। 5000 सुझाव आए थे कमेटी के पास। कई को शामिल किया गया। अब भी फाइनल नहीं है ड्राफ्ट। आप राय दे सकते हैं। वरिष्ठ कर सलाहकार अमित दवे ने भी जानकारी दी।
उपायुक्त सुदीप गुप्ता से सीधे सवाल-जवाब
जीएसटी में कौनसे टैक्स खत्म होंगे?
राज्य द्वारा लिए जाने वाला लीट, इंट्री टैक्स, सीएसटी, वेट, टैक्स आॅन गुड्स जैसे टैक्स खत्म होंगे। केंद्र के सभी टैक्स खत्म होंगे।
कौनसे टैक्स रहेंगे?
राज्य में प्रोफेशनल टैक्स और केंद्र में कस्टम ड्यूटी ।
सीएसटी खत्म होगा तो आईजीएसटी आ जाएगा?
उसका प्रभाव सिर्फ पेट्रोलिम और अल्कोहॉलिक प्रोडक्ट्स पर ही होगा।
कस्टम ड्यूटी 36 प्रतिशत है, आईजीएसटी ज्यादा रही तो आयात महंगा नहीं होगा?
एसजीएसटी और सीजीएसटी की कुल दर के बराबर होगा आईजीएसटी।
अभी दर तय नहीं।
इनके तेवर थे तीखे...
फ्रांस में 1954 से जीएसटी लागू हैं। ऐसे में यदि यहां लागू हुआ तो हिंदुस्तान सर्वोच्च शक्ति कैसे बन जाएगा जबकि हम फ्रांस सहित कई देशों से 60 साल पीछे हैं। व्यापारियों को प्रयोगशाला समझ रखा है सरकार ने। जब देखो नए कर या कर प्रणाली के नाम पर प्रयोग होते रहते हैं। जैसे आज जीएसटी की मार्केटिंग हो रही है वैसे ही कल वेट की मार्केटिंग हुई थी। क्या हुआ, हर राज्य की अपनी दरें हैं। व्यापार शिफ्ट हो रहा है। जीएसटी लागू होने के बाद किसी राज्य को नुकसान हुआ तो भरपाई केंद्र 5 साल तक करेगा। 5 साल बाद क्या होगा? फिर राज्य अपनी दरें तय करके बैठ जाएंगे। अभी तिमाही रिटर्न दाखिल करते हैं, जीएसटी में मासिक रिटर्न सहित सालभर में 37 रिटर्न दाखिल करना होंगे। मतलब सरकार ने हमें बिना तनख्वाह का कारकून बना दिया है। हम आवाज भी नहीं उठा सकते।
रमेश खंडेलवाल, अध्यक्ष मालवा चेम्बर आॅफ कॉमर्स
जीएसटी के तीन प्रकार
सेंट्रल जीएसटी (सीजीएसटी): यह केंद्र सरकार द्वारा लगाया और वसूला जाएगा।
स्टेट जीएसटी (एसजीएसटी): यह राज्य सरकार द्वारा लगाया और वसूला जाएगा।
इंटरस्टेट जीएसटी (आईजीएसटी): जब माल एक राज्य से दूसरे में जाएगा, तब यह टैक्स लगाया जाएगा।
कहां होगा ज्यादा पैसा खर्च
सर्विस सेक्टर होगा महंगा। लग्जरी कार खरीदने में खर्च करना होगा ज्यादा पैसा। शुरू के 2 सालों में उपभोक्ता रहेंगे घाटे में। शहरी उपभोक्ता ज्यादा घाटे में, क्योंकि ये ज्यादा सर्विस का उपयोग करते हैं। हवाई किराया भी हो जाएगा महंगा।
किसे होगा ज्यादा फायदा
टेक्सटाइल इंडस्ट्री में आएगा बूम। आॅटो इंडस्ट्री में आएगा उछाल। फार्मा इंडस्ट्री के ऊपर जाने की संभावना। एफएमसीजी इंडस्ट्री में भी होगा जबरदस्त उछाल। देश के आयकर दाताओं का दायरा बढ़ने से सरकार को होगा फायदा। व्यापारियों को भी मिलेगा एकीकृत टैक्स सिस्टम का लाभ। कम कर दरों का मिलेगा फायदा।
कहां बचेगा पैसा
घूमना फिरना होगा सस्ता।
कम कीमत की कारें होंगी और सस्ती।
दवाइयों के दाम भी गिरेंगे।
दैनिक उपभोग की वस्तुएं जैसे साबुन, सोडा भी होंगी सस्ती।
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
नई व्यवस्था के साथ आशा और आशंका रहती हैं लेकिन आशंकाओं के कारण नई व्यवस्था को नहीं रोका जा सकता। प्रजातांत्रिक व्यवस्था में कर या कर नीति को लेकर न राज्य मनमानी कर सकते हैं। न केंद्र। जीएसटी को लेकर केंद्र आश्वस्त है राज्यों को नुकसान नहीं होगा। इसीलिए पांच साल तक नुकसान की भरपाई की गारंटी भी दी जा रही है। रविवार को द सियागंज होलसेल किराना मर्चेंट एसोसिएशन द्वारा जीएसटी को लेकर आयोजित कार्यशाला पर बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए यह जानकारी वाणिज्यिक कर अपर आयुक्त राजेश बहुगुणा ने दी।
होटल रेडिसन ब्लू में आयोजित वर्कशॉप में श्री बहुगुणा ने कहा कि आज देश में एक ही चीज पर अलग-अलग तरह के शुल्क और कर लगते हैं। जैसे- किसी चीज के निर्माण पर लगने वाला एक्साइज ड्यूटी या उत्पादन कर, वस्तु के आयात पर कस्टम ड्यूटी। किसी चीज की बिक्री पर वैट टैक्स और उपभोक्ता द्वारा खपत पर सर्विस टैक्स। गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) या वस्तु व सेवा कर के अंतर्गत इन सभी टैक्सों को हटाकर एक ही टैक्स कर दिया जाएगा। जीएसटी को लेकर केंद्र द्वारा बनाई गई एम्पावर्ड कमेटी ‘जिसकी आखिरी बैठक 26 जुलाई को हुई’, के सदस्य व वाणिज्यिक कर उपायुक्त सुदीप गुप्ता ने कहा कि टैक्स भुगतान है, दान नहीं। टैक्स सरकार तय करती है, देना सबको है। गलत पैसा न केंद्र ले सकता है, न राज्य। नियम तुगलकी नहीं है। 5000 सुझाव आए थे कमेटी के पास। कई को शामिल किया गया। अब भी फाइनल नहीं है ड्राफ्ट। आप राय दे सकते हैं। वरिष्ठ कर सलाहकार अमित दवे ने भी जानकारी दी।
उपायुक्त सुदीप गुप्ता से सीधे सवाल-जवाब
जीएसटी में कौनसे टैक्स खत्म होंगे?
राज्य द्वारा लिए जाने वाला लीट, इंट्री टैक्स, सीएसटी, वेट, टैक्स आॅन गुड्स जैसे टैक्स खत्म होंगे। केंद्र के सभी टैक्स खत्म होंगे।
कौनसे टैक्स रहेंगे?
राज्य में प्रोफेशनल टैक्स और केंद्र में कस्टम ड्यूटी ।
सीएसटी खत्म होगा तो आईजीएसटी आ जाएगा?
उसका प्रभाव सिर्फ पेट्रोलिम और अल्कोहॉलिक प्रोडक्ट्स पर ही होगा।
कस्टम ड्यूटी 36 प्रतिशत है, आईजीएसटी ज्यादा रही तो आयात महंगा नहीं होगा?
एसजीएसटी और सीजीएसटी की कुल दर के बराबर होगा आईजीएसटी।
अभी दर तय नहीं।
इनके तेवर थे तीखे...
फ्रांस में 1954 से जीएसटी लागू हैं। ऐसे में यदि यहां लागू हुआ तो हिंदुस्तान सर्वोच्च शक्ति कैसे बन जाएगा जबकि हम फ्रांस सहित कई देशों से 60 साल पीछे हैं। व्यापारियों को प्रयोगशाला समझ रखा है सरकार ने। जब देखो नए कर या कर प्रणाली के नाम पर प्रयोग होते रहते हैं। जैसे आज जीएसटी की मार्केटिंग हो रही है वैसे ही कल वेट की मार्केटिंग हुई थी। क्या हुआ, हर राज्य की अपनी दरें हैं। व्यापार शिफ्ट हो रहा है। जीएसटी लागू होने के बाद किसी राज्य को नुकसान हुआ तो भरपाई केंद्र 5 साल तक करेगा। 5 साल बाद क्या होगा? फिर राज्य अपनी दरें तय करके बैठ जाएंगे। अभी तिमाही रिटर्न दाखिल करते हैं, जीएसटी में मासिक रिटर्न सहित सालभर में 37 रिटर्न दाखिल करना होंगे। मतलब सरकार ने हमें बिना तनख्वाह का कारकून बना दिया है। हम आवाज भी नहीं उठा सकते।
रमेश खंडेलवाल, अध्यक्ष मालवा चेम्बर आॅफ कॉमर्स
जीएसटी के तीन प्रकार
सेंट्रल जीएसटी (सीजीएसटी): यह केंद्र सरकार द्वारा लगाया और वसूला जाएगा।
स्टेट जीएसटी (एसजीएसटी): यह राज्य सरकार द्वारा लगाया और वसूला जाएगा।
इंटरस्टेट जीएसटी (आईजीएसटी): जब माल एक राज्य से दूसरे में जाएगा, तब यह टैक्स लगाया जाएगा।
कहां होगा ज्यादा पैसा खर्च
सर्विस सेक्टर होगा महंगा। लग्जरी कार खरीदने में खर्च करना होगा ज्यादा पैसा। शुरू के 2 सालों में उपभोक्ता रहेंगे घाटे में। शहरी उपभोक्ता ज्यादा घाटे में, क्योंकि ये ज्यादा सर्विस का उपयोग करते हैं। हवाई किराया भी हो जाएगा महंगा।
किसे होगा ज्यादा फायदा
टेक्सटाइल इंडस्ट्री में आएगा बूम। आॅटो इंडस्ट्री में आएगा उछाल। फार्मा इंडस्ट्री के ऊपर जाने की संभावना। एफएमसीजी इंडस्ट्री में भी होगा जबरदस्त उछाल। देश के आयकर दाताओं का दायरा बढ़ने से सरकार को होगा फायदा। व्यापारियों को भी मिलेगा एकीकृत टैक्स सिस्टम का लाभ। कम कर दरों का मिलेगा फायदा।
कहां बचेगा पैसा
घूमना फिरना होगा सस्ता।
कम कीमत की कारें होंगी और सस्ती।
दवाइयों के दाम भी गिरेंगे।
दैनिक उपभोग की वस्तुएं जैसे साबुन, सोडा भी होंगी सस्ती।
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