Tuesday, March 8, 2016

नीलेश को तीन साल की सजा सुना चुकी है दुबई कोर्ट

- दो रेड कॉर्नर नोटिस हुए थे जारी, दूसरे केस में ट्रायल जारी 
- पटियाला कोर्ट में पेश करने के बाद यूएई को सौंपा जाएगा ठगौरा 
इंदौर. विनोद शर्मा । 
टाउनशिप के नाम पर अरबों रुपए की धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार हुए नीलेश अजमेरा के खिलाफ दुबई में दो प्रकरण दर्ज है। चेक बाउंस के मामले में दुबई कोर्ट 2010 में जहां नीलेश को तीन साल की सजा सुना चुकी है वहीं जमीनी धोखाधड़ी के दूसरे मामले में ट्रायल होना बाकी है। सूत्रों की मानें तो पटियाला कोर्ट में पेश करने के बाद नीलेश को युनाइटेड अरब एमिरेट्स (यूएई) पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा। जहां उसे तीन साल की सजा काटना है।
चेक बाउंस के मामले में सुनील साहनी नाम के व्यक्ति ने दुबई में नीलेश के खिलाफ क्रिमिनिल डिस्प्यूट (डीपी) का केस दायर किया था। दुबई कोर्ट में केस चला। चूंकि नीलेश फरार था। इसीलिए वह कोर्ट में पेश नहीं हो पाया। तमाम नोटिसों के बावजूद अनुपस्थिति को देखते हुए दुबई कोर्ट ने 2010 में एकपक्षीय फैसला सुनाते हुए नीलेश को तीन साल की सजा सुना दी। फरारी की स्थिति में मिनिस्ट्री आॅफ इंटीरियर, यूएई ने पहले रेड कॉर्नर नोटिस दिया। बाद में 2 अगस्त 2010 को भारत के विदेश मामलों के सचिव और सीबीआई को पत्र (एनेक्शर पी/2) लिखा और कहा कि नीलेश को तलाशे, गिरफ्तार करे और हमारे हवाले कर दें। यूएई के पत्र को गंभीरता से लेते हुए विदेश मामलों के सचिव और सीबीआई ने मप्र के एडीशनल डायरेक्टर जनरल (क्राइम) को 4 अगस्त 2010 को पत्र लिखकर नीलेश को तलाशने की जिम्मेदारी सौंपी।
नहीं चल पाई नीलेश की
सीबीआई ने मप्र के एडीशनल डायरेक्टर जनरल (क्राइम) के बीच 9 अगस्त 2010 को भी कम्यूनिकेशन हुआ जिसे नीलेश ने लंबी फरारी के बाद मई 2011 में मप्र हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में चुनौती दी। उसने पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विदेश मामले के सचिव, सीबीआई और एडीजी, एमपी को पार्टी बनाया। इस मामले में इंटरविनर बने सुनील साहनी। केस अगस्त 2015 में कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद से नीलेश की तलाश और गिरफ्तारी की तैयारियां एक बार फिर तेज हो गई।
पूल और मसाज में दिन काटते रही पुलिस
कोर्ट में मप्र सरकार की पेरवी करने वाले कानून विशेषज्ञों की मानें तो चेक बाउंस में जैसे भारत में धारा-138 में केस दर्ज होता है वैसे ही युएई में भी यह संगीन अपराध है। वहां केस दर्ज हुआ। रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुए लेकिन विदेश विभाग और सीबीआई के बार-बार लिखने के बावजूद स्थानीय पुलिस अधिकारी नीलेश को गिरफ्तार करने के बजाय उसके साथ पूल खेलते रहे। घोड़ों पर दाव लगाते रहे। मालिश करवाने जाते रहे। अधिकारियों ने 9 अगस्त 2010 से लेकर मई 2011 में हाईकोर्ट में केश दायर होने तक 10 महीनों में नीलेश का वास्तविक पता न सीबीआई को दिया न विदेश मंत्रालय को। हाईकोर्ट भी मान चुकी है कि पुलिस मैनेज थी।
कोर्ट की सख्ती के बाद बताया एड्रेस...
सरकार की पेरवी करने वाले कानून विशेषज्ञों ने बताया कि यूएई के लगातार पत्र और विदेश मंत्रालय की फटकार के बावजूद पुलिस जानकारी नहीं दे रही थी। कोर्ट की सख्ती के बाद मप्र के एडीजी (क्राइम) कार्यालय ने सीबीआई को उन तीन पतों की सूची सौंपी जहां नीलेश रहता था या रहता है। इनमें पत्रकार कॉलोनी, पालिवालनगर (साकेतनगर) और एअरपोर्ट रोड बैंगलुरु का पता शामिल था।
आगे क्या होगा नीलेश का...
- एक केस में तीन साल की सजा हो चुकी है। फैसले के खिलाफ अपील भी नहीं हुई इसीलिए नीलेश का जेल जाना तय है।
- दूसरे मामले में अभी ट्रायल चल रहा है। दुबई जेल में रहते हुए भी नीलेश अब अपना पक्ष कोर्ट में रख सकता है।
- फरारी के दौरान नीलेश ने कई दस्तावेजों में फेरबदल की ताकि उसकी पहचान बदल सके। इसीलिए भारत का विदेश विभाग भी नीलेश के खिलाफ फेक आइडेंटिटी जनरेट करने के साथ धारा 467 और 468 के तहत केस दर्ज कर सकता है।
- ऐसा हुआ तो पहले यहां ट्रायल होगा। बाद में उसे दुबई पुलिस को सौंपा जाएगा।
- नीलेश ने भारत में 1996 में पासपोर्ट बनवाया था जिसकी वैधता 2006 तक रही। इसी बीच 2005 में नीलेश ने ब्रिटिश नागरिकता ली लेकिन दुबई से फरारी के बाद वह मप्र में छिपता रहा। इसीलिए यह भी जांच होगी कि ब्रिटिश नागरिकता के साथ वह यहां रहा कैसे? क्योंकि भारत में दोहरी नागरिकता प्रतिबंधित है।

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