Tuesday, March 8, 2016

‘पर्यावरण’ के बिना तनी 15 मंजिला मेपल वुड

- एमपीएसईआईएए ने वॉयलेशन की सूची में डालकर दिल्ली भेजी फाइल
- 4 ब्लॉक में 300 फ्लैट तैयार
इंदौर. विनोद शर्मा । 
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती और मप्र स्टेट इन्वायरमेंट इम्पेक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (एमपीएसईआईएए) की तगड़ी निगरानी के बावजूद सिद्धिविनायम डेवलपर्स और चूघ रियलिटी ने मिलकर पीपल्याकुमार में बिना पर्यावरणीय अनुमति के हाईराइज ‘मेपल वुड’ तान दी। एमपीएसईआईएए ने एक तरफ इसे जहां वायलेशन करने वाले प्रोजेक्ट की सूची में डालकर अगली कार्रवाई के लिए दिल्ली भेज दिया है वहीं जिला प्रशासन और नगर निगम की अनदेखी के कारण न सिर्फ टाउनशीप मों निर्माण जारी है बल्कि लोगों को 3000 रुपए वर्गफीट की दर से फ्लैट बेचे भी जा रहे हैं। एमपीएसईआईएए का कहना है कि बिना अनुमति निर्माण के कारण प्रोजेक्ट वॉयलेटशन की श्रेणी में है लेकिन काम रूकवाने की जिम्मेंदारी हमारी नही, जिला प्रशासन की है।
पीपल्याकुमार में आई टाउनशीप की बाढ़ और फ्लैट्स की डिमांड को देखते हुए चूघ रियलिटी प्रा.लि. और चूघ इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. की तकरीबन 15.64 एकड़ जमीन पर रेशो डील के साथ श्री सिद्धिविनायक डेवलपर्स प्रा.लि. ने ‘मेपल वूड’ प्लान की। यहां 682539 वर्गफीट (15.66 एकड़) जमीन पर 204761 वर्गफीट के ग्राउंड कवरेज के साथ 1583681 वर्गफीट टोटल बिल्टअप एरिया स्वीकृत किया गया। यहां 45 मीटर ऊंचे (जी+15) 18 टॉवर में कुल 1340 फ्लैट (2, 3 और 4 बीएचके) बनना है। 2012 से 2016 के बीच चार वर्षों में बिल्डरों ने 4 ब्लॉक बना भी दिए हैं जिनमें तकरीबन 300 फ्लैट (2, 3 और 4 बीएचके)  हैं। वह भी उस स्थिति में जब 23 दिसंबर 2015 को हुई एमपीएसईआईएए की 274वीं बैठक तक प्रोजेक्ट को पर्यावरणीय अनुमति ही नहीं मिल पाई।
मौके पर ऐसे आगे बढ़ा प्रोजेक्ट
जनवरी से मार्च 2012 : साइट आॅफिस बना। जमीन की बाउंड्रीवाल हुई। प्रोजेक्ट के लिए खुदाई शुरू हुई।
जून 2012 : बेसमेंट तैयार हुआ।
नवंबर से दिसंबर 2012 : पहली-दूसरी मंजिल की छत चढ़ी।
नवंबर 2013 : 10 मंजिल से अधिक बना। क्लब का काम भी शुरू।
फरवरी 2014 : 15 मंजिल पूरी। मार्च 2014 में सामने के दो ब्लॉक में फिनिशिंग शुरू हुई जबकि पीछे के दो ब्लॉक में सीविल वर्क चलता रहा।
नवंबर 2014 : चारों ब्लॉक की फिनिशिंग पूरी। क्लब भी आधा बना।
मार्च 2015 : फ्लैट का पजेसन दे दिया।
अक्टूबर 2015 : गेट-सड़क तैयार। क्लब की बिल्डिंग भी पूरी।
वहां कागजों में झूलता रहा प्रोजेक्ट
23 मई 2013 : आवेदन किया (प्र.क्र. 1684/2013)
12 जून 2013 : एसईएसी को सौंपा
19 सितंबर 2013 : ईआईए उल्लंघन की रिपोर्ट एसईएसी को भेजी।
30 जुलाई 2014 : मामला कार्रवाई के लिए एसईएसी को लौटाया।
25 अगस्त 2014 : डेवलपर्स(पीपी) को इसकी जानकारी दी।
28 फरवरी 2015 : एसईआईएए की 174वीं बैठक में तय हुआ कि संबंधित प्राधिकारी द्वारा पीपी को स्पष्ट अनुमति/एनओसी के लिए आवश्यक निर्देश देने हेतु कलेक्टर को लेटर भेजें।
17 अपै्रल 2015 : 188वीं बैठक के निर्णयानुसार पीपी को लेटर लिखकर 30 जून 2015 से पहले जानकारी मांगी।
4 जुलाई 2015 : 211वीं बैठक में मामले चर्चा हुई। पीपी को 14 अगस्त से पहले अतिरिक्त जानकारी देने के लिए कहा। मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) और एमएस,एसईएसी को एक पत्र भेजा। इन्वायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट (ईपीए) की धारा 15 के अंतरर्गत मामला दर्ज करने से पहले किए गए स्थल निरीक्षण की रिपोर्ट/निष्कर्षों 15 जुलाई 2015 से पहले उपलब्ध  कराने को कहा।
4 जुलाई 2015 : तकनीकी फाइल के साथ एमएस, एसईएसी को साइट विजिट और 14 अगस्त 2015 तक रिपोर्ट जमा करने के लिए पत्र लिखा।
14 अगस्त 2015 : 219वीं बैठक में स्थगित मामले पर 227वीं बैठक में बात हुई। 23 दिसंबर 2015 को होने वाली 274वीं बैठक से पहले जांच रिपोर्ट एमएस, एसईएसी को रिमांइडर भेजने को कहा।
23 दिसंबर 2015 : 274वीं बैठक में मामले को स्थगित रखने का निर्णय हुआ।
क्या है एमपीएसईआईएए
केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर एन्वायर्नमेंट क्लीयरेंस देने को राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव निर्धारण प्राधिकरण (एसईआईएए) बनाने का कानून बनाया है। यह अथॉरिटी नई इंडस्ट्री, खनन, इंफ्रास्ट्रक्चर और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स आदि में पर्यावरण के प्रभाव का आकलन कर उन्हें पर्यावरण मंजूरी देती है। मप्र में वर्ष 2008 में इस अथॉरिटी का गठन कर तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था।
अनुमति जरूरी
1.50 लाख वर्ग मीटर या इससे ज्यादा बिल्टअप एरिया और 50 हेक्टेयर से अधिक जमीन का विकास करने वाले रियल एस्टेट प्रोजेक्ट पर पर्यावरण अनुमति जरूरी होती है। इसके अलावा 20,000 वर्ग मीटर से अधिक बिल्टअप एरिया फॉर्म 1 और फॉर्म 1ए में जानकारी देना होगा और उसी के आधार पर पर्यावरण अनुमति मिलती है। एमपीएसईआईएए की अनुमति निरस्त होने के कारण एनजीटी ने करूणासागर के निर्माण पर रोक लगा दिया था।
300 फ्लैट तैयार..
कुल ब्लॉक बने : 4
कुल फ्लैट   : 300
2 बीएचके : 60
3बीएचके : 120
4 बीएचके : 120
वर्जन मेपल वुड..
कुछ मामले में एसईएसी की इन्वेस्टिगेशन में है जबकि कुछ मामले में वॉयलेशन देखते हुए उन्हें दिल्ली भेजा गया है। ताकि वहां तय हो सके कि इनका करन क्या है। बिना मंजूरी के प्रोजेक्ट पर काम होता है तो उसे रूकवाने की जिम्मेदारी स्थानीय निकाय की है।
डॉ. संजीव सचदेव, सीएसओ
एमपीएसईएआईआई

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