सिंहस्थ में अधिकारियों का सेटेलाइट प्रेम बना सिरदर्द
उज्जैन से विनोद शर्मा।
सर हमारा प्लॉट आवंटित कर दो...। आवंटन-पत्र बताओ..। वो क्या होता है..? तहसीलदार ने दिया होगा न ...। नहीं, वो तो यही बोले कि साहब के पास चले जाओ, प्लॉट मिल जाएगा...। हम प्लॉट तभी देंगे जब वहां से आवंटन पत्र आएगा...। साहब, हमें क्यों यहां से वहां दौड़ा रहे हो, पहले ही बहुत परेशान हो चुके हैं...। माफ करना महाराज, हम कुछ नहीं कर सकते...। जमीन को लेकर मारामारी की यह कहानी किसी कॉलोनी की नहीं बल्कि उज्जैन के मेला क्षेत्र की है जहां अफसरों की लेतलाली के कारण साधुओं को जमीन के लिए परेशान होना पड़ रहा है। हालात यह है कि अफसरों ने नालों की जमीन पर प्लॉट काट दिए।
उज्जैन में मेला क्षेत्र को छह हिस्सों में बांटा गया है। कालभैरव, मंगलनाथ, दत्त अखाड़ा, महाकाल, त्रिवेणी और चामुंडा क्षेत्र। इसमें दत्त अखाड़े में सबसे ज्यादा 2352, मंगलनाथ क्षेत्र में 1500 और कालभैरव क्षेत्र में 800 प्लॉट निकाले गए हैं। महाकाल, चामुंडा और त्रिवेणी में प्लॉट नहीं है। प्लॉट को लेकर यूं तो तीनों प्रमुख जोन में कुछ न कुछ दिक्कतें आ रही है लेकिन सबसे ज्यादा हालत खराब है मंगलनाथ क्षेत्र में। यहां आए दिन साधुओं और अधिकारियों के बीच विवाद के किस्से सामने आ रहे हैं। अपर कलेक्टर ने बताया अब तक 1200 से अधिक प्लॉट आवंटित किए जा चुके हैं। अभी आवंटन जारी है।
जहां नाला, वहीं काट दिया प्लॉट
गुगल अर्थ और विकीमेपिया की सेटेलाइट इमेज पर स्कैल से जमीन नापकर अधिकारियों ने न सिर्फ मेला क्षेत्र डिजाइन किया बल्कि प्लॉटों की नंबरिंग भी कर दी। मैदान में जाकर मौका देखने तक की जहमत नहीं की। अब जब साधु आवंटन पत्र के साथ कब्जा लेने जा रहे हैं तो पता चल रहा है कि जहां प्लॉट बताया है वहां तो नाला बह रहा है। गड्ढा है या बगीचा बना है। गुरुवार को भी एक साधु को जहां प्लॉट का कब्जा दिया गया वहां जल जमाव था। बाद में साधु के विरोध के बाद अधिकारियों ने जमीन पर मिट्टी से भराव कर दिया। हालांकि बदबू अब भी बरकरार है।
साधुओं में हो रहा है झगड़ा..
सांदीपनि आश्रम के पास रामानंदी निर्मोही अखाड़े की जमीन और मंदिर है। यह जमीन मेला कार्यालय से भी आवंटित हुई है। शुक्रवार दापेहर 1 बजे निर्मोही अणि अखाड़ा के श्रीमहंत राजेंद्रदास, रामजीदास, परमात्मादास, , महेशदास सहित अन्य साधुओं ने जमीन पर पहुंचकर उनका सामान फेंक दिया। वाहनों में तोड़फोड़ की। रामेशवरदास, रामसहाय दास और नरसिंहदास के साथ मारपीट भी की। बंदुकें निकलने के बाद जीवाजीगंज पुलिस ने राजेंद्रदास, रामजीदास और उनके साथियों के खिलाफ धारा 427, 451 ,32, 506 और 34 के तहत केस दर्ज किया। बंदूकें कब्जे में ली।
एक का प्लॉट दूसरे को...
काम से जल्दी मुक्त होने के लिए पिछले सिंहस्थ की सूची को आधार बना कर उन साधु संतों को वहीं जमीन आवंटित कर दी है, जहां पिछले सिंहस्थ में जमीन दी गई थी। नंबरिंग उट पटांग है। महंत सुखरामदास महाराज ने बताया कि जो प्लॉट आवंटित किया था वहां पहले किसी संत का आश्रम बन रहा था। बीते सिंहस्थ हमें जिस नंबर की जमीन दी थी वह भी बदल गया जबकि बाकी का वही नंबर है।
बुनियादी सुविधा का भी संकट
मंगलनाथ में जमीन पाने के बाद भी कई संत सुविधाओं के लिए खड़े नजर आ रहे हैं। कहीं जमीन आवंटन के बावजूद जमीन बराबर नहीं है। कहीं न नल के पते हैं, न ही बिजली के। न सुविधाघर के। महंत रामस्वरू ने बताया कि जमीन मिल गई है लेकिन पानी-बिजली नहीं है। पड़ौस में खेत है और किसान भला आदमी है जो पानी दे रहा है।
उज्जैन से विनोद शर्मा।
सर हमारा प्लॉट आवंटित कर दो...। आवंटन-पत्र बताओ..। वो क्या होता है..? तहसीलदार ने दिया होगा न ...। नहीं, वो तो यही बोले कि साहब के पास चले जाओ, प्लॉट मिल जाएगा...। हम प्लॉट तभी देंगे जब वहां से आवंटन पत्र आएगा...। साहब, हमें क्यों यहां से वहां दौड़ा रहे हो, पहले ही बहुत परेशान हो चुके हैं...। माफ करना महाराज, हम कुछ नहीं कर सकते...। जमीन को लेकर मारामारी की यह कहानी किसी कॉलोनी की नहीं बल्कि उज्जैन के मेला क्षेत्र की है जहां अफसरों की लेतलाली के कारण साधुओं को जमीन के लिए परेशान होना पड़ रहा है। हालात यह है कि अफसरों ने नालों की जमीन पर प्लॉट काट दिए।
उज्जैन में मेला क्षेत्र को छह हिस्सों में बांटा गया है। कालभैरव, मंगलनाथ, दत्त अखाड़ा, महाकाल, त्रिवेणी और चामुंडा क्षेत्र। इसमें दत्त अखाड़े में सबसे ज्यादा 2352, मंगलनाथ क्षेत्र में 1500 और कालभैरव क्षेत्र में 800 प्लॉट निकाले गए हैं। महाकाल, चामुंडा और त्रिवेणी में प्लॉट नहीं है। प्लॉट को लेकर यूं तो तीनों प्रमुख जोन में कुछ न कुछ दिक्कतें आ रही है लेकिन सबसे ज्यादा हालत खराब है मंगलनाथ क्षेत्र में। यहां आए दिन साधुओं और अधिकारियों के बीच विवाद के किस्से सामने आ रहे हैं। अपर कलेक्टर ने बताया अब तक 1200 से अधिक प्लॉट आवंटित किए जा चुके हैं। अभी आवंटन जारी है।
जहां नाला, वहीं काट दिया प्लॉट
गुगल अर्थ और विकीमेपिया की सेटेलाइट इमेज पर स्कैल से जमीन नापकर अधिकारियों ने न सिर्फ मेला क्षेत्र डिजाइन किया बल्कि प्लॉटों की नंबरिंग भी कर दी। मैदान में जाकर मौका देखने तक की जहमत नहीं की। अब जब साधु आवंटन पत्र के साथ कब्जा लेने जा रहे हैं तो पता चल रहा है कि जहां प्लॉट बताया है वहां तो नाला बह रहा है। गड्ढा है या बगीचा बना है। गुरुवार को भी एक साधु को जहां प्लॉट का कब्जा दिया गया वहां जल जमाव था। बाद में साधु के विरोध के बाद अधिकारियों ने जमीन पर मिट्टी से भराव कर दिया। हालांकि बदबू अब भी बरकरार है।
साधुओं में हो रहा है झगड़ा..
सांदीपनि आश्रम के पास रामानंदी निर्मोही अखाड़े की जमीन और मंदिर है। यह जमीन मेला कार्यालय से भी आवंटित हुई है। शुक्रवार दापेहर 1 बजे निर्मोही अणि अखाड़ा के श्रीमहंत राजेंद्रदास, रामजीदास, परमात्मादास, , महेशदास सहित अन्य साधुओं ने जमीन पर पहुंचकर उनका सामान फेंक दिया। वाहनों में तोड़फोड़ की। रामेशवरदास, रामसहाय दास और नरसिंहदास के साथ मारपीट भी की। बंदुकें निकलने के बाद जीवाजीगंज पुलिस ने राजेंद्रदास, रामजीदास और उनके साथियों के खिलाफ धारा 427, 451 ,32, 506 और 34 के तहत केस दर्ज किया। बंदूकें कब्जे में ली।
एक का प्लॉट दूसरे को...
काम से जल्दी मुक्त होने के लिए पिछले सिंहस्थ की सूची को आधार बना कर उन साधु संतों को वहीं जमीन आवंटित कर दी है, जहां पिछले सिंहस्थ में जमीन दी गई थी। नंबरिंग उट पटांग है। महंत सुखरामदास महाराज ने बताया कि जो प्लॉट आवंटित किया था वहां पहले किसी संत का आश्रम बन रहा था। बीते सिंहस्थ हमें जिस नंबर की जमीन दी थी वह भी बदल गया जबकि बाकी का वही नंबर है।
बुनियादी सुविधा का भी संकट
मंगलनाथ में जमीन पाने के बाद भी कई संत सुविधाओं के लिए खड़े नजर आ रहे हैं। कहीं जमीन आवंटन के बावजूद जमीन बराबर नहीं है। कहीं न नल के पते हैं, न ही बिजली के। न सुविधाघर के। महंत रामस्वरू ने बताया कि जमीन मिल गई है लेकिन पानी-बिजली नहीं है। पड़ौस में खेत है और किसान भला आदमी है जो पानी दे रहा है।
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