परिवार-शोरूम और कैफे के साथ संभाली फिक्की लेडिस आॅर्गनाइजेशन की कमान
इंदौर. विनोद शर्मा ।
ईश्वर के शुक्रगुजार हैं जो उसने हमें सक्षम बनाया इसीलिए जो कमजोर हैं उनकी मदद करना हमारा दायित्व है। जिस सोसायटी में रह रहे हैं वहां कुछ ऐसा करें कि लोग याद रखें। अकेले नहीं कर सकते तो किसी आर्गनाइजेशन के साथ जुड़कर करें। मगर करें। यह कहना है खुद्दारी के साथ कुछ गर गुजरने की चाह रखने वाली आरती सांघी का। इंदौर और भोपाल में आॅफिस संभालने और कैफे संचालित करने के साथ आरती फेडरेशन आॅफ इंडियन चेम्बर आॅफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) द्वारा 2014 में इंदौर में स्थापित किए गए फिक्की लेडिस आॅर्गनाइजेशन (फ्लो) की कमान भी संभाल रही है।
कोलकाता के मॉर्डन हाइस्कूल फॉर गर्ल्स में पढ़ाई करते-करते ही आरती ने खुद्दार व स्वावलम्बी जीवन की शपथ ले ली थी। राजीव सांघी से 2002 में शादी हुई और वे इंदौर आ गई। दो-तीन साल बाद ही उन्होंने घर की दहलीज लांघकर नई पहचान बनाने की ठानी और गीताभवन चौराहे पर ब्लू के नाम से शोरूम खोल दिया। चार साल पहले इसकी भोपाल में ब्रांच खोली। दो साल पहले इंदौर में कैफे@ब्लू भी खोला। अब दूसरे कैफे की तैयारी है। काम के प्रति उनकी लगन और समर्पण को फिक्की ने भी स्वीकारा। शायद यही वजह थी कि जब 10 दिसंबर 2014 को फ्लो के इंदौर चेप्टर की शुरूआत हुई तो आरती को उसका फाउंडर चेयरपर्सन बनाया गया।
फ्लो को भी दी पहचान
31 मार्च 2016 को बतौर चेयरपर्सन आरती का कार्यकाल खत्म हो रहा है। करीब 16 महीनों में उन्होंने 112 महिलाओं को संस्था से जोड़ा। महिला सशक्तिकरण की दिशा में काफी काम किया। प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को सपोर्ट करते हुए वे अपनी सहभागियों संग झाड़ू लेकर लोगों को क्लीन इंदौर के लिए प्रेरित करती दिखीं। बीत कुछ दिनों से वे निम्न आयवर्गीय महिलाओं के लिए ‘सेनेटरी नेपकिन फॉर आॅल’ कैंपेन चला रही हैं। मिथकों को तोड़कर मासिक धर्म में महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के मकसद से चलाए जा रहे इस कैम्पेन को फिक्की की गवर्निग बॉडी ने सराहा है, जल्द ही बाकी 14 चेप्टर में भी शुरू होगा। आरती मानती है कि स्वच्छता प्रबंधन, कचरा प्रबंधन और साफ-सफाई के बड़े-बड़े दावों के बीच शर्म की बात यह है महिलाओं और लड़कियां मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता सामग्रियों से महरूम हैं। इसीलिए कैंपेन चलाया ताकि सबको सेनेटरी नेपकिन मिले। जल्द ही पहले चरण के तहत 50 स्कूल और हॉस्टल में वेंडिंग मशीन भी लगा रहे हैं।
बड़ी चीज है बैलेंस
शोरूम, कैफे, परिवार और एफएलयू के लिए वक्त निकालने की बात पर आरती कहती हैं आपसी समन्वय के साथ बैलेंस बनाए रखना बड़ी बात है। मैंने यही किया। जब आप काम करते हो तो मल्टी टास्किंग की आदत हो जाती है। इसमें पति और परिवार ने मेरा भरपुर साथ दिया। उनका कहना है कि हर महिला अपनी प्रतिभा को पहचाने। वह अपनी प्रतिभा का जितना दोहन करेगी, उतनी सफलता मिलेगी।
इंदौर. विनोद शर्मा ।
ईश्वर के शुक्रगुजार हैं जो उसने हमें सक्षम बनाया इसीलिए जो कमजोर हैं उनकी मदद करना हमारा दायित्व है। जिस सोसायटी में रह रहे हैं वहां कुछ ऐसा करें कि लोग याद रखें। अकेले नहीं कर सकते तो किसी आर्गनाइजेशन के साथ जुड़कर करें। मगर करें। यह कहना है खुद्दारी के साथ कुछ गर गुजरने की चाह रखने वाली आरती सांघी का। इंदौर और भोपाल में आॅफिस संभालने और कैफे संचालित करने के साथ आरती फेडरेशन आॅफ इंडियन चेम्बर आॅफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) द्वारा 2014 में इंदौर में स्थापित किए गए फिक्की लेडिस आॅर्गनाइजेशन (फ्लो) की कमान भी संभाल रही है।
कोलकाता के मॉर्डन हाइस्कूल फॉर गर्ल्स में पढ़ाई करते-करते ही आरती ने खुद्दार व स्वावलम्बी जीवन की शपथ ले ली थी। राजीव सांघी से 2002 में शादी हुई और वे इंदौर आ गई। दो-तीन साल बाद ही उन्होंने घर की दहलीज लांघकर नई पहचान बनाने की ठानी और गीताभवन चौराहे पर ब्लू के नाम से शोरूम खोल दिया। चार साल पहले इसकी भोपाल में ब्रांच खोली। दो साल पहले इंदौर में कैफे@ब्लू भी खोला। अब दूसरे कैफे की तैयारी है। काम के प्रति उनकी लगन और समर्पण को फिक्की ने भी स्वीकारा। शायद यही वजह थी कि जब 10 दिसंबर 2014 को फ्लो के इंदौर चेप्टर की शुरूआत हुई तो आरती को उसका फाउंडर चेयरपर्सन बनाया गया।
फ्लो को भी दी पहचान
31 मार्च 2016 को बतौर चेयरपर्सन आरती का कार्यकाल खत्म हो रहा है। करीब 16 महीनों में उन्होंने 112 महिलाओं को संस्था से जोड़ा। महिला सशक्तिकरण की दिशा में काफी काम किया। प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को सपोर्ट करते हुए वे अपनी सहभागियों संग झाड़ू लेकर लोगों को क्लीन इंदौर के लिए प्रेरित करती दिखीं। बीत कुछ दिनों से वे निम्न आयवर्गीय महिलाओं के लिए ‘सेनेटरी नेपकिन फॉर आॅल’ कैंपेन चला रही हैं। मिथकों को तोड़कर मासिक धर्म में महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के मकसद से चलाए जा रहे इस कैम्पेन को फिक्की की गवर्निग बॉडी ने सराहा है, जल्द ही बाकी 14 चेप्टर में भी शुरू होगा। आरती मानती है कि स्वच्छता प्रबंधन, कचरा प्रबंधन और साफ-सफाई के बड़े-बड़े दावों के बीच शर्म की बात यह है महिलाओं और लड़कियां मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता सामग्रियों से महरूम हैं। इसीलिए कैंपेन चलाया ताकि सबको सेनेटरी नेपकिन मिले। जल्द ही पहले चरण के तहत 50 स्कूल और हॉस्टल में वेंडिंग मशीन भी लगा रहे हैं।
बड़ी चीज है बैलेंस
शोरूम, कैफे, परिवार और एफएलयू के लिए वक्त निकालने की बात पर आरती कहती हैं आपसी समन्वय के साथ बैलेंस बनाए रखना बड़ी बात है। मैंने यही किया। जब आप काम करते हो तो मल्टी टास्किंग की आदत हो जाती है। इसमें पति और परिवार ने मेरा भरपुर साथ दिया। उनका कहना है कि हर महिला अपनी प्रतिभा को पहचाने। वह अपनी प्रतिभा का जितना दोहन करेगी, उतनी सफलता मिलेगी।
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